संतुलित उर्वरक उपयोग से फसल गुणवत्ता के साथ मृदा स्वास्थ्य भी बेहतर

नई दिल्ली 22-Sep-2026 12:31 PM

संतुलित उर्वरक उपयोग से फसल गुणवत्ता के साथ मृदा स्वास्थ्य भी बेहतर

(सभी तस्वीरें- हलधर)

गुड़ामालानी (बाड़मेर)। कृषि विज्ञान केंद्र, गुड़ामालानी में आयोजित 15 दिवसीय उर्वरक प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। कार्यक्रम में 35 प्रशिक्षणार्थियों ने भाग लिया। मुख्य अतिथि डॉ. एम.एस. मीणा ने कहा कि उर्वरकों का उपयोग मृदा परीक्षण और फसल की आवश्यकता के आधार पर किया जाना चाहिए। संतुलित उर्वरक प्रबंधन से उत्पादन व फसल गुणवत्ता में सुधार के साथ मृदा स्वास्थ्य भी कायम रखा जा सकता है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. एस.एन. सक्सेना ने उर्वरकों के सही भंडारण, मात्रा, समय एवं विधि की जानकारी देते हुए जैविक खाद, जैव उर्वरक और रासायनिक उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर जोर दिया। संस्था प्रमुख डॉ. प्रदीप पगारिया ने मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन अपनाने का आह्वान किया। प्रशिक्षण में मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सूक्ष्म पोषक तत्व एवं उर्वरक प्रबंधन की जानकारी दी गई। समापन पर प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए।


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