मुर्गी से आगे निकला टर्की पालन, किसानों की आय दोगुनी
टर्की पालन से लागत, फ्री प्रणाली, नस्लें, प्रजनन, अंडा उत्पादन और किसानों की आय वृद्धि
मधुमक्खी पालन से बढ़ेगी कमाई, उदयपुर में किसानों को खास ट्रेनिंग
उदयपुर में प्रशिक्षण से किसानों को मधुमक्खी पालन द्वारा अतिरिक्त आय, रोग प्रबंधन की जानकारी
बोर्ड परीक्षा से पहले बड़ा फैसला: 2026 में पशु कल्याण अनिवार्य
राज्य के स्कूलों में पशु कल्याण जागरूकता माह, नई गतिविधियां, शिक्षकों पर अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी
मुर्गीपालन से रोजगार, कम लागत में ज्यादा कमाई का तरीका
मुर्गीपालन प्रशिक्षण से कौशल विकास, स्वरोजगार और समय में आय बढ़ाने के अवसर मिलते हैं।
पशुपालकों के लिए खुशखबरी: सही देखभाल से दोगुनी आमदनी
पशुपालन विशेषज्ञ सलाह से गर्भावस्था, प्रसव, पोषण, रोग-नियंत्रण और खनिज आहार द्वारा दुग्ध उत्पादन बढ़ाएं
14 से पशु कल्याण पखवाड़ा शुरू, शिविर-प्रतियोगिताओं की भरमार
14-30 जनवरी पशु कल्याण पखवाड़ा, शिविर, डिवर्मिंग, निबंध प्रतियोगिता और पशु क्रूरता जागरूकता कार्यक्रम आयोजन
दूध से बनता है शरीर मजबूत, जानिए कौन सा दूध सबसे बेहतर
दूध आहार है, श्वेत क्रांति से पोषण, स्वास्थ्य, शक्ति और विकास को मजबूती मिलती है।
मुर्गीपालन से लाखों कमाई! कम लागत में रोजगार का सुनहरा मौका
कम लागत में अधिक आय, रोजगार और पोषण बढ़ाने वाला मुर्गीपालन किसानों के लिए लाभकारी व्यवसाय आज ही
डेयरी फार्मिंग से कमाई सीखें, 12 जनवरी से प्रशिक्षण शुरू
एमएसएमई नागौर द्वारा 12 जनवरी से सात दिवसीय डेयरी फार्मिंग प्रशिक्षण, प्रमाण पत्र सहित अवसर।
सर्दी का कहर: पशु और मुर्गियों की सुरक्षा कैसे करें
सर्दियों में पशुधन व मुर्गियों की सुरक्षा, रोग लक्षण, उपचार और नवजात देखभाल के उपाय
सर्दियों में बकरी पालन से मुनाफा, वैज्ञानिक तरीके जानिए
सर्दी में वैज्ञानिक बकरी पालन प्रशिक्षण, नस्ल, पोषण, स्वास्थ्य प्रबंधन से लाभकारी व्यवसाय की जानकारी।
नर बछड़ों की समस्या क्यों नहीं सुलझी? सरकारी योजना की सच्चाई
सेक्स सॉर्टेड सीमन योजना की धीमी प्रगति से नर बछड़ों की समस्या बढ़ी किसानों चिंता
पशुशाला में अंगीठी जलाना खतरनाक, सर्दी में अपनाएं सुरक्षित विकल्प
पशुओं को ठंड से बचाने के सुरक्षित उपाय अपनाएं, अंगीठी और धुएँ से दूरी रखें।
वैज्ञानिक बकरी पालन प्रबंधन: नस्ल, आहार, आवास और रोग नियंत्रण गाइड
वैज्ञानिक बकरी पालन से नस्ल चयन, आहार, आवास, प्रजनन, रोग नियंत्रण द्वारा बेहतर आय संभव
श्वेत क्रांति 2.0 से बदलेगी डेयरी व्यवस्था, बढ़ेगी पशुपालकों की आय
श्वेत क्रांति 2.0 डेयरी में उत्पादन नहीं, व्यवस्था, प्रजनन सुधार, महिला सशक्तिकरण और आय केंद्रित
बकरीपालन से बढ़ेगी कमाई: सूरतगढ़ में होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम
31 जनवरी को सूरतगढ़ पशु विज्ञान केन्द्र में एक दिवसीय बकरीपालन किसान प्रशिक्षण आयोजित होगा।
मकर संक्रांति: चाइनीज मांझा प्रतिबंध, पशुपालन विभाग की सख्त एडवाइजरी
मकर संक्रांति पर पशुपालन विभाग एडवाइजरी, चाइनीज मांझे पर रोक, जागरूकता और उपचार शिविर निर्देश।
पशु चिकित्सालय का उद्घाटन, पशुपालन मंत्री ने प्रदेश के लिए कही ये बात
पाली में पशु चिकित्सालय उद्घाटन, मंत्री कुमावत बोले—प्रदेश में पशु चिकित्सा व्यवस्था सुदृढ़ होगी जल्द
जयपुर में मास्टर ट्रेनर कार्यशाला, प्रति पशु उत्पादन बढ़ाने पर फोकस
जयपुर में मास्टर ट्रेनर कार्यशाला, प्रति पशु उत्पादन बढ़ाने, जी प्लस ई मॉडल लागू जोर
हाइड्रोपोनिक हरा चारा उत्पादन कैसे करें पूरी जानकारी हिंदी में
हाइड्रोपोनिक हरा चारा तकनीक से कम लागत, कम पानी में वर्षभर पौष्टिक पशु आहार उत्पादन
पशुपालन विभाग की समीक्षा बैठक, शासन सचिव ने दिए निर्देश
पशुपालन समीक्षा बैठक में मोबाइल वेटरनरी यूनिट, टीकाकरण, बीमा और योजनाओं की प्रगति पर निर्देश
आत्मनिर्भरता के लिए आयुर्वेद से जुड़े गौशालाएं
मुख्य सचिव के साथ गौशाला संचालकों की बैठक
केवीके ने किए 5 गांवो के किसानों को चूजे वितरित
केवीके चित्तौड़गढ़ ने जनजाति उपयोजना अंतर्गत पांच गांवों के किसानों को प्रतापधन चूजे वितरित किए
बेहतर पशुपालन से अधिक आमदनी
वैज्ञानिक पशुपालन, रोग रोकथाम, स्वच्छता और पोषण प्रबंधन से दुग्ध उत्पादन बढ़ाकर किसानों की आय
मुर्गीपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाये किसान
कृषि विज्ञान केन्द्र में एससी उपयोजना अंतर्गत मुर्गीपालन पाँच दिवसीय कौशल प्रशिक्षण सम्पन्न हुआ आयोजन
वन्यजीव मानव जीवन का हिस्सा
वन्य जीवों के बचाव की तकनीक पर कार्यशाला आयोजित
पशु जैव विविधतासंरक्षण की चुनौती
राजस्थान की पशु जैव विविधता, संरक्षण चुनौतियाँ, पारिस्थितिक संतुलन, पर्यटन, सांस्कृतिक मूल्य और सामुदायिक प्रयास
दुधारू पशुओं में खनिज तत्व की कमी: कारण, लक्षण और समाधान
खनिजों की कमी से पशु उत्पादन घटता है; संतुलित खनिज पूरक से स्वास्थ्य व दुग्ध क्षमता बढ़ती है।
यूरिया-मोलासेस चारा ब्लॉक का निर्माण और पशु पोषण
यूरिया-मोलासेस ब्लॉक सस्ता संतुलित पशु आहार है, जो पोषण बढ़ाकर उत्पादन और सेहत सुधारता है।
पशु उत्पादकता के लिए स्वस्थ पोषण जरूरी
स्वस्थ पोषण, सही प्रबंधन और प्रशिक्षण से पशुपालक कम लागत में अधिक आय पाते हैं।
मुर्गीपालन को बनाएं आय का जरिया
मुर्गीपालन से आजीविका, पोषण और रोजगार बढ़ता है, प्रशिक्षण घुमन्तु समुदाय को लाभ देता है।
बकरीपालन से उद्यमिता विकास संभव
कौशल विकास प्रशिक्षण कार्यक्रम
राजस्थान में पशु जैव विविधता: आवश्यकता और चुनौतियां
राजस्थान की समृद्ध पशु जैव विविधता संरक्षण हेतु चुनौतियाँ, उपाय और समुदाय की भूमिका पर आधारित जानकारी।
मुर्गीपालन से आय और रोजगार
मुर्गीपालन आय, रोजगार और ग्रामीण विकास का लाभकारी क्षेत्र है, जिसमें प्रबंधन और पोषण है महत्वपूर्ण।
कृत्रिम गर्भाधान: लाभ, प्रक्रिया, सही समय व पूरी जानकारी
कृत्रिम गर्भाधान से पशु नस्ल सुधार, अधिक उत्पादन, सुरक्षित प्रजनन और बेहतर प्रबंधन की विश्वसनीय तकनीक।
पशुओं को सर्दी से बचाना है तो जरूर करें ये 7 काम
सर्दी में पशुओं की सुरक्षा हेतु गर्माहट, सूखा बिछावन, संतुलित आहार और समयानुकूल उपचार आवश्यक।
सर्दियों में बकरियों का काल बन जाती है ये दो बीमारियां, ऐसे करें उपाय
सर्दी में बकरियों को घातक पीपीआर और चेचक से बचाने के आसान व प्रभावी उपाय जानें।
पाली-जालौर में ब्लू टंग अब भी बेकाबू
पशुपालन निदेशक ने लिया स्थिति का जायजा
खनिज तत्वों से बढ़ेगा पशु स्वास्थ्य और दुग्ध उत्पादन
खनिज तत्वों की संतुलित मात्रा से पशु स्वस्थ रहते हैं और दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होती है।
नवजात पड्डे-पड्डियों को पशुपालक कैसे बचायें
नवजात पड्डे-पड्डियों की देखभाल से स्वस्थ पशु तैयार होते हैं, मृत्यु दर घटती है।
पुष्कर मेले में छाए 15 करोड़ के शाहबाज और 23 करोड़ की नगीना
उप मुख्यमंत्री ने किया पुष्कर पशु मेले का शुभारंभ
पुष्कर मेले में भैंसे 'कुबेर' की धूम, देशी-विदेशियों में सेल्फी लेने की मची होड़
राजस्थान का पुष्कर मेला अपने पशु मेले के लिए देश में अपनी एक अलग पहचान रखता है। इस बार पुष्कर मेला एक भैंसे के कारण सुर्खियों में बना हुआ है
शुष्क क्षेत्रों में पशुधन-खेती में चुनौतियां
डेयरी भारत में सबसे बड़ी कृषि वस्तु है। यह राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था में 5 प्रतिशत का योगदान देता है और 80 मिलियन डेयरी किसानों को सीधे रोजगार देता है
पशुओं में टिटनेस रोग: एक मौन घातक संक्रमण
डॉ. निखिल श्रृंगी, डॉ. पारमेष्ट विष्णु कुमार शर्मा, पशु विज्ञान महाविद्यालय, जोधपुर
घोड़ों के स्वस्थ विकास, कार्यक्षमता और दीर्घायु के लिए सही पोषण और आहार प्रबंधन अत्यधिक महत्वपूर्ण है। घोड़ों की शारीरिक संरचना और पाचन तंत्र विशेष प्रकार के आहार की मांग करते हैं, जो उनकी प्राकृतिक खाने की आदतों के अनुसार होता है।
पशु आहार में खनिज लवणों का महत्व
पशुओ के आहार में सभी तत्वों की उचित मात्रा का होना उनके स्वास्थ्य और उत्पादन में विशेष योगदान देता है। यह सभी तत्व शरीर की विभिन्न क्रियाओ को नियंत्रित करते है। पशुओ के आहार में कार्बोहाईड्रेट, वसा, प्रोटीन, विटामिन के साथ-साथ खनिज लवणों का विशेष महत्व होता है ।
पशुओं में खनिज तत्वों की कमी से संभावित रोग
डॉ. राजेश नेहरा, पशु पोषण विभाग, पशु विज्ञान महाविद्याालय, राजुवास, बीकानेर डेयरी के व्यवसाय से अधिक लाभ लेने के लिए खनिज लवण पशुओं की खुराक में उतना ही आवश्यक है। जितना पशुओं की खुराक में हरा चारा और दाना। पशु आहार में इन सब खनिज तत्वों की मात्रा पर्याप्त होने के साथ-साथ इनका अनुपात भी सही होना चाहिए।
घोड़ों के लिए पोषण और आहार प्रबंधन
अधिक उत्पादन हेतु दुधारू पशुओं का पोषण प्रबंधन
दुधारू पशुओं की उत्पादन लागत में कमी करने के लिए पशु पोषण वैज्ञानिकों द्वारा अनेक विश्वसनीय परीक्षण किये गये और निष्कर्ष निकाला गया कि ऐसे दुधारू पशुओं को जिन्हें वैज्ञानिक पद्धति द्वारा पालन पोषण नहीं किया जाता तो उनका उत्पादन उनकी क्षमता से काफ ी कम होता है और ऐसे पशु को संतुलित आहार खिलाकर उनका उत्पादन 30-50 प्रतिशत तक बढाया जा सकता है।
एंटीबायोटिक के विकल्प : जड़ी-बूटी आधारित वृद्धि प्रवर्तक
पशुधन उत्पादन और पशुपालन का आर्थिक महत्व, मानव जीवन में खाद्य सुरक्षा और कृषि विकास के संदर्भ में अत्यधिक महत्वपूर्ण है। पशुधन के स्वास्थ्य और उनकी वृद्धि के लिए लंबे समय से एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग किया जाता रहा है।
सर्दियों पालतू श्वान की देखभाल
जल्दी ही सर्दियों का मौसम शुरू होने जा रहा है जिस तरह हम सर्दियों के मौसम में शारीरिक मौसमी बदलावों से प्रभावित होते हैं। इस तरह हमारे पालतू जानवर भी प्रभावित होते हैं और उन्हें विशेष देखभाल की आवश्यकता होती है।
बहुरंगी मत्स्य किस्म की विशेषता
देश में मछलियों की 2500 प्रजातियां पायी जाती है। इनमें एक हजार प्रजातियों का पालन मीठे पानी में किया जाता है। मीठे पानी में पाली जाने वाली मछलियों को सजावटी मछलियों की श्रेणी में रखा गया है। गौरतलब है कि देश में सजावटी मछलियों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
पशुओं की प्रजनन तकनीक
पशु आहार में मिलावट की पहचान
वर्षाकाल में मुर्गियों की देखभाल
पालतू जानवरों का कैसे बढ़ाएं कौशल - एक दिनचर्या स्थापित करें
राजस्थान में बकरी पालन कैसे शुरू करें? पूरी जानकारी और लाभ.
किसी व्यवसाय को शुरू करने और उसके सफल संचालन के लिए उस व्यवसाय से संबंधित आंकड़ों का होना अति आवश्यक है । व्यवसायी चाहे कोई बहुराष्ट्रीय कंपनी चला रहा हो अथवा चाहे कोई छोटे पशुपालक हो। अपने व्यवसाय के रिकॉर्ड को लिखित रूप में रखना अनिवार्य होता है । अमूमन हम देखते हैं कि छोटे पशु पालक लिखित मे रिकॉर्ड नहीं रखते हैं।
दुधारू पशुओं में अनेक कारणों से बहुत सी बीमारियाँ होती है। सूक्ष्म विषाणु, जीवाणु, फफूंदी, अंत: -बाह्य परजीवी, प्रोटोजोआ, कुपोषण और शरीर के अंदर की चयापचय (मेटाबोलिज्म) क्रिया में विकार आदि प्रमुख कारणों में है।
ऊँट पालक अनुकूलन और अपनी समृद्धि के लिए संघर्षरत हैं। ऊँट और ऊँट उत्पादों के संरक्षण और संवर्धन के लिए सभी हितधारकों के बीच अधिक सहयोग की आवश्यकता है। ताकि, रेगिस्तान के जहाज को डूबने से बचाया जा सके।
मई-जून के महीनें में हमारे यहाँ वातावरण का तापमान अत्यधिक होता है। इसका सीधा असर पशुओ के उत्पादन पर पडता है।
तापघात अथवा हीटस्ट्रोक अथवा उष्माघात अवस्था, जिसे सामान्य भाषा में लू लगना भी कहते है। इस अवस्था में प्रभावित पशु का शारीरिक तापमान अत्यधिक धूप अथवा गर्मी की वजह से बढऩे लगता है। इस स्थिति में पशु के शरीर का प्राकृतिक सिस्टम ,जिससे अपने शरीर को वातानुकूलित रखता है , वह सुचारू रूप से काम करना बंद कर देता है। जिसकी वजह से पशु का शारीरिक तापमान लगातार बढ़ता जाता है। पशु को इस स्थिति में अच्छा उपचार न दिया जावे और अच्छी देखभाल न की जाए तो बहुत ही भयावह स्थिति उत्पन्न हो सकती है और प्रभावित पशु की जान भी जान सकती है।
खरगोश पालन एक लाभदायक व्यवसाय है। खरगोश पालन बहुत कम लागत वाला व्यवसाय होने के साथ ही इसमें घर के पिछवाडे, छत अथवा बगीचे में भी शुरू किया जा सकता है।
पशुपालन कृषि विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत पालतू पशुओं के विभिन्न पक्ष जैसे भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य, प्रजनन आदि का अध्ययन किया जाता है।
यदि आहार अच्छा है। लेकिन, आहार और आहार की विधियां अनुचित होने के कारण पानी प्रदूषित हो सकता है जिसके परिणाम स्वरूप उत्पादन क्षमता मे कमी आ सकती है।
कृत्रिम गर्भाधान एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें नर और मादा पशुओं के प्राकृतिक मिलन न करवा कर, नर अश्व के शुक्राणु को ताज़ा, ठंडे किये हुये अथवा हिमीकृत वीर्य को मादा के गर्भाशय में पहुँचा कर मादा को गर्भित किया जाता है। वर्तमान में यह विधि गाय और भैंस में काफ ी लोकप्रिय है।
मुर्गी पालन व्यवसाय अण्डा एवं मांस दोनों के ही उत्पादन के लिए किया जाता है। लेकिन आमतौर पर ऐसा देखा गया है कि अण्डा उत्पादन से ज्यादा मुनाफा ब्रॉयलर पालन यानि मांस उत्पादन में होता है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि मांस उत्पादन के लिए चूजें 40-45 दिन में तैयार हो जाते हैं।
डॉ. अनिल कुमार लिम्बा, पशु चिकित्सा अधिकारी, पांचोडी, नागौर देश में उत्तम कोटि की पशुधन सम्पदा है। लेकिन, पौष्टिक पशु आहार का अभाव होने के कारण प्रति पशु दूध, मांस आदि की उत्पादकता अत्यन्त कम है। प्राकृतिक आपदाओं के कारण पशुओं की आवश्यकता के अनुसार उसी अनुपात में हरे चारे की पैदावर सम्भव नहीं हो पा रही है। विशेषकर राजस्थान जैसे प्रान्त जहां अकाल से प्रभावित क्षेत्र सर्वाधिक है। जिसकी वजह से राज्य का पशुधन और उसकी उत्पादकता प्रभावित होती है। भयंकर सूखे की स्थिति में यहां का पशुधन दूसरे राज्यों में पलायन तक कर जाता है या फिर चारे के अभाव में मृत्यु का शिकार हो जाता है।
किसानों की बदलेगी किस्मत, इजरायल यात्रा कराएगी एमपी सरकार
खेतों में चमका काला सोना, अफीम की रखवाली में जुटे किसान
बाजरा खेती में क्रांति: डबल मेटेंनर से बनी RHB-273 किस्म