यूरिया-मोलासेस चारा ब्लॉक का निर्माण और पशु पोषण

नई दिल्ली 12-Dec-2025 12:25 PM

यूरिया-मोलासेस चारा ब्लॉक का निर्माण और पशु पोषण

(सभी तस्वीरें- हलधर)

श्रेष्ठ नस्ल के पशु को अनुकूलित वातावरण में रखकर संतुलित आहार दिया जाये तो अधिकतम उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। पशुपालन के कुल खर्च का लगभग 65-70 प्रतिशत भाग पशु आहार पर खर्च किया जाता है।  राजस्थान की शुष्क जलवायु और अकाल की समस्या के कारण पशुओ के लिए वर्षभर हरा चारा उपलब्ध नहीं हो पाता है। जो सूखा चारा उपलब्ध होता है उसकी पौष्टिकता कम होती है और अधिक उत्पादन वाले पशुओ में पोषक तत्वों की पूर्ति नहीं हो पाती है। पशु कमजोर और रोगग्रस्त हो जाते है। पशुपालन आजीविका का प्रमुख स्रोत होने के कारण संतुलित आहार देने के लिए यूरिया-मोलासेस उपचारित चारे का प्रयोग किया जा सकता है। ज्यादातर पशुपालक सूखे चारे,  तुड़ी, बेरी, पाला, भूसा, खाखला, कडबी इत्यादि का प्रयोग करते है। जिनसे पशुओ को ऊर्जा, प्रोटीन और खनिज लवण प्राप्त नहीं हो पाते और उत्पादन में कमी आती है।  पशुपालको को प्रशिक्षित कर यूरिया-मोलासेस ब्लाक तैयार करवा कर पशुओ को चाटने के लिए दिए जा सकते है।  यूरिया मोलासेस ब्लाक ऊर्जा, प्रोटीन, खनिज लवण के उत्तम स्रोत है।  जिसे उचित मात्रा में प्रयोग कर अमोनिया विषाक्तता का खतरा टाला जा सकता है। क्योकि, चाटने से पशु के शरीर में धीरे-धीरे यूरिया नाइट्रोजन को विसर्जित करते है। 

पशु के शरीर में उपापचय 

यूरिया मोलासेस उपचारित चारा प्रोटीन, नाइट्रोजन का प्रमुख स्रोत है। जिसमे पर्याप्त मात्रा में ऊर्जा, खनिज लवण और विटामिन होते है । जुगाली करने वाले पशु के रुमन में  सूक्ष्म जीव बैक्टीरिया, प्रोटोजोआ, कवक इत्यादि होते है। इनके लिए मोलासेस ऊर्जा का प्रमुख स्रोत है। साथ ही, यूरिया पशु के रुमन में हाइड्रोलायसिस से अमोनिया में परिवर्तित हो जाता है। जो इन सूक्ष्म जीवो के लिए नाइट्रोजन का प्रमुख स्रोत होता है इससे सूक्ष्म जीव उच्च गुणवता की माइक्रोबियल प्रोटीन बनाते है जो पशुओ के काम आती है।  

उपचारित चारे की निर्माण विधि  

सबसे पहले 2 किलो यूरिया को 10 किलो पानी में घोल ले। इस घोल को 10 किलो मोलासेस में डालकर अच्छी तरह मिश्रित कर ले। अब इसमें 1 किलो नमक और 1 किलो खनिज तत्व मिला ले। यह मिश्रण 100 किलो चारे के लिए पर्याप्त है। सूखे चारे को छोटे छोटे टुकडो में कट लेवे और दो से तीन इंच की परत में फैला ले। अब सूखे चारे पर मिश्रण या घोल का आधा भाग छिडक कर 30 मिनट तक सूखने देवे। जिस से घोल चारे पर चिपक जाये। अब चारे को उल्टा पुल्टा कर शेष बचे आधे मिश्रण का भी छिडकाव कर देवे। इसे अच्छी तरह से सुखा कर इसका भण्डारण कर लेवे । इसके बाद पशुओ को आवश्यकता के अनुसार खिलाया जा सकता है। 

निर्माण की विधि 

यूरिया मोलासेस मिनरल ब्लाक निर्माण की दो विधियों( गर्म तथा ठंडी)  में से ठंडी विधि अधिक सस्ती और फायदेमंद है।

सबसे पहले मोलासेस लेकर इसमे पानी डालकर पतला किया जाता है। घुले हुए मोलासेस में नमक खनिज तत्व व यूरिया को मिश्रित किया जाता है। तत्पश्यात इसमे गेंहू की चापड़ को अच्छी तरह समान रूप से मिलते है। अब इसमे सीमेंट पाउडर ध् केल्सायिट मिश्रित किया जाता है। इस मिश्रण को लकउी या मशीन के सांचो में डालकर दबा दिया जाता है। आजकल यूरिया मोलासेस मिनरल ब्लाक बनाने हेतु लघु मशीन भी उपलब्ध है। 

पशुओ को दी जाने वाली मात्रा 

बडे पशुओ में 500 ग्राम मात्रा प्रतिदिन के हिसाब से पर्याप्त रहती है। जबकि भेड- बकरी के लिए 100 ग्राम मात्रा प्रतिदिन पर्याप्त है। 

यूरिया मोलासेस उपचारित चारे का महत्व 

मरुस्थलीय इलाको में ज्यादातर सूखे चारे पर ही पशुपालन किया जा रहा है। जिससे पशुओ को आवश्यक पोषक तत्व नहीं मिल पाते और वह कमजोर- रोग ग्रस्त रहते है तथा उत्पादन भी काफ ी कम होता है। पशुपालन की ओर युवाओ को आकर्षित करने और इसको लाभ का व्यवसाय बनाने के लिए वैज्ञानिक विधियों का उपयोग किया जाना चाहिए। यूरिया मोलासेस उपचारित चारा सस्ता और संतुलित आहार होता है। जिससे पशु को ऊर्जाए प्रोटीन, खनिज लवण् और विटामिन प्राप्त होते है। इससे पशु के सुखा चारा खाने की मात्रा और पाचन क्षमता बढ जाती है। जुगाली करने वाले पशु के रुमन में सूक्ष्म जीव अधिक प्रोटीन का निर्माण करते है । जिससे प्रोटीन की आवश्यकता की पूर्ति हो जाती है द्य यूरिया मोलासेस मिनरल ब्लाक सूखे चारे के साथ खिलने से मीथेन गैस उत्पादन कम किया जाकर वातावरण प्रदुषित होने से बचाया जा सकता है । 

उपचारित चारा खिलाते समय सावधानिया 

यूरिया मोलासेस उपचारित चारे की मात्रा शुरू में कम देनी चाहिए। फिर धीरे-धीरे बढाई जानी चाहिए। इसमें नमी की मात्रा 10 प्रतिशत से अधिक नहीं होनी चाहिए। यूरिया मोलासेस उपचारित चारे का निर्माण वैज्ञानिक विधियों से और निर्दिष्ट मात्रा के अनुसार ही होना चाहिए। इसका संग्रहण सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए। जुगाली ना करने वाले और छोटे बछडे-बछडियो (6 माह तक) को उपचारित चारा नहीं खिलाना चाहिए। कभी-कभी दुर्घटनावश पशु द्वारा अधिक यूरिया का सेवन कर लेने से रक्त में अमोनिया का स्तर बढ जाता है। जिससे यूरिया विषाक्तता हो जाती है। इसके प्रमुख लक्षण मुंह  से अधिक लार टपकना, आफरा आना,ए मांस पेशियों में ऐठन पशु का लडखडानाए श्वास लेने में दिक्कत इत्यादि है। यूरिया विषाक्तता के लक्षण प्रकट होते ही पशुचिकित्सक की सलाह से पशु को सर्वप्रथम 25 से 30 लीटर ठंडा पानी पिलाना चाहिए।  फिर 100 से 200 मिलीलीटर सिरका दो से पांच लीटर पानी में पिलाना चाहिए।


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