खेत का कचरा अब बरसाएगा सोना, पराली बनेगी कमाई का जरिया
(सभी तस्वीरें- हलधर)भारत एक कृषि प्रधान देश हैं। जहां हर ,साल बहुत ज्यादा मात्रा में फसलें उगाई जाती हैं, वहीं इन फसलों के बाद खेतों में काफी मात्रा में पराली और बाकी हुआ कचरा रह जाता है। जिसे अक्सर किसान जला देते हैं लेकिन यही पराली अब भारत के लिए एक बड़ी ताकत बन सकता है। पराली सिर्फ कृषि कचरा नहीं, बल्कि ऊर्जा का अच्छा साधन है।
350 मिलियन टन कृषि कचरा
भारत में हर साल लगभग 350 मिलियन टन कृषि निकलता है। इसमें धान और गेहूं की पराली, भूसा और दूसरे फसल के अवशेष शामिल होते हैं। इतनी बड़ी मात्रा में होने के बाद कृषि कचरे का सही इस्तेमाल नहीं हो पाता। अगर इस कचरे का सही इस्तेमाल किया जाए तो देश के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है।
कैसे बनेगी कचरे से ऊर्जा
सरकार और वैज्ञानिक इस कृषि कचरे को ऊर्जा में बदलने का काम कर रहे हैं। पराली और दूसरे कचरे से बायोगैस, बायोफ्यूल और बिजली बनाई जा सकती है। देश में GOBARdhan योजना और नेशनल बायोएनर्जी प्रोग्राम जैसे कई कदम उठाए गए हैं। जनवरी 2026 तक देश में करीब 979 बायोगैस प्लांट काम कर रहे हैं, जो इस कचरे से ऊर्जा बना रहे हैं।
क्या होगा फायदा
जब पराली से ऊर्जा बनाई जाती है, तो उससे खाद भी बनती है। जो खेतों के लिए काफी जरूरी होती है। इससे किसानों को रासायनिक ऊर्जा कम इस्तेमाल करनी पड़ती है। इसके साथ ही, गांवों में रोजगार के नए मौके भी बनेंगे और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल सकती है।