कम लागत में किसान करें मसूर की खेती, मिलेंगे अनगिनत फायदे
कम लागत में मसूर खेती से ज्यादा उत्पादन और मुनाफा पाने का आसान तरीका किसानों के लिए फायदेमंद विकल्प
ग्वारपाठा की फसल से बड़ा मुनाफा कमाना है तो करना होगा ये काम
ग्वारपाठा खेती में रोग नियंत्रण, सही देखभाल और बेहतर विपणन से अधिक मुनाफा संभव।
कृषि ग्रंथ कृषिपराशर:
कृषिपराशर: एक प्राचीन भारतीय ग्रन्थ है, जिसकी रचना सदियों पहले पराशर ऋषि ने की थी। ऋषि पराशर ने इसमें कृषि के विभिन्न प्रकार, विकास, वृष्टि, वर्षा, विभिन्न ऋतुओं के लक्षण और धान्य के विकास को अपने विचारों के जरिए गहनता से समझाया है। धर्म-ग्रन्थों में कृषि का बड़ा महत्त्व बताया गया है। यहां तक कि कृषि कर्म में किसान अपने दोषों से भी मुक्त हो जाता है। हमारे ऋषि-मुनियों ने कृषि को पवित्र कर्म माना है और कृषि का महत्त्व समझाया है।
नींबू के पौधों में रोग? अभी अपनाएं ये कारगर उपाय
नींबूवर्गीय पौधों में प्रमुख रोगों की पहचान, समय पर नियंत्रण उपाय और सुरक्षित उत्पादन तकनीक
राजस्थान में प्राकृतिक खेती बनेगी किसानों की आय बढ़ाने रास्ता
प्राकृतिक खेती टिकाऊ कृषि, जल संरक्षण, मृदा सुधार और किसानों की आय बढ़ाने का भविष्य
गाजर को निरोगी बनायें: फसल रक्षा के बेहतरीन वैज्ञानिक उपाय!
गाजर को निरोगी रखें: प्रमुख रोग और कीट नियंत्रण के आसान उपाय किसानों के लिए।
किन्नू की फसल बचानी है? जानें कीट-रोग नियंत्रण का सही तरीका
किन्नू संतरा कीट-व्याधि प्रबंधन, प्रमुख कीट, रोग नियंत्रण, छिड़काव विधि और उत्पादन बढ़ाने के उपाय
बेमौसमी खरबूजा खेती से किसान कमा रहे भारी मुनाफा
पॉलीहाउस में बेमौसमी खरबूजा खेती से कम समय में गुणवत्ता उत्पादन और अधिक मुनाफा संभव
खरीफ प्याज गंठिया तैयारी: कम लागत में ज्यादा कमाई
खरीफ प्याज की गंठी उत्पादन तकनीक से किसान लागत में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं
माहू-एफिड का खतरनाक हमला, एक छिड़काव में समाधान
एफिड कीट फसलों का रस चूसकर पौधों को कमजोर करता है, समय पर नियंत्रण जरूरी है।
फ्रेंचबीन की खेती: कम खर्च में जबरदस्त मुनाफे का फार्मूला
फ्रेंचबीन की वैज्ञानिक खेती से कम लागत में अधिक उत्पादन व बेहतर आमदनी प्राप्त होती है।
खेती में क्रांति: नैनो टेक्नोलॉजी से रोग प्रबंधन आसान
पौध रोग प्रबंधन में नैनो तकनीक: पर्यावरण अनुकूल समाधान, उच्च उपज और टिकाऊ खेती
अरावली खतरे में: खनन नहीं रुका तो भारत की खाद्य सुरक्षा डूबेगी
अरावली विनाश से मरुस्थलीकरण बढ़ेगा, जलवायु संकट गहराएगा और भारत की खाद्य सुरक्षा खतरे में।
सरसों की उपज 20–30% बढ़ाने का वैज्ञानिक तरीका, बस यह छिड़काव करें
सरसों में थायोयूरिया छिड़काव से फूल-फलन, दाना भराव, पाला सहनशीलता बढ़े, उपज में वृद्धि सुनिश्चित
किसान ध्यान दें! छाछ्या रोग चुपचाप फसल नष्ट करता
छाछ्या रोग पत्तियों पर सफेद चूर्ण बनाता है, गंधक या केराथेन से प्रभावी नियंत्रण संभव।
सरसों में चेंपा कीट नियंत्रण: पहचान, नुकसान और प्रभावी प्रबंधन उपाय
सरसों में चेंपा कीट पहचान, नुकसान, अनुकूल मौसम और एकीकृत प्रबंधन की प्रभावी जानकारी उपाय
धनिया झुलसा रोग नियंत्रण: कारण, लक्षण और प्रभावी रोकथाम उपाय
धनिया ब्लाइट रोग रोकथाम हेतु बेलीटॉन या मैन्कोजेब छिड़काव करें, अधिक सिंचाई से बचें किसान
एग्रो टूरिज्म: खेती, पर्यटन और संस्कृति से बढ़ेगी किसानों की आय
खेती से पर्यटन तक, एग्रो टूरिज्म से किसान कमाई, रोजगार और ग्रामीण संस्कृति को बढ़ावा
अरावली धरोहर संकट में: नई परिभाषा से जल जंगल जमीन पर खतरा
अरावली धरोहर संकट में: नई परिभाषा से जल, जंगल, आदिवासी अधिकार और पर्यावरण पर खतरा
आलू में प्रमुख रोग, लक्षण और प्रभावी प्रबंधन की पूरी जानकारी
आलू में रोग प्रबंधन की पूरी जानकारी, काली रूसी से अंगमारी तक सटीक नियंत्रण उपाय जानें
जीरे के पौधे काले पड़ रहे हैं? झुलसा रोग कारण व इलाज
जीरे के पौधे काले पड़ने का कारण, झुलसा रोग की पहचान, नुकसान और असरदार रोकथाम उपाय जानें
मृदा एवं जल संसाधन प्रबंधन पर कार्यशाला का आयोजन
एमपीयूएटी उदयपुर में मृदा जल प्रबंधन पर ड्रोन, डीजीपीएस आधारित एकदिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई
गेहूं रस्ट रोग: लक्षण, प्रबंधन और प्रतिरोधी किस्में
गेहूं रस्ट रोग के प्रकार, लक्षण और प्रभावी प्रबंधन उपायों की संक्षिप्त जानकारी किसानों हेतु
गाजर की फसल को निरोगी रखने के उपाय और कीट रोग नियंत्रण
गाजर फसल को रोग और कीट नियंत्रण से सुरक्षित रखकर अधिक उत्पादन व बेहतर आय।
चना फसल बचाएं – तना सड़न रोग उपचार का सही तरीका
चना तना सड़न रोग पहचान, लक्षण, नियंत्रण और दवा छिड़काव से फसल बचाने के उपाय।
भारत में कृषि मशीनीकरण की क्रांति: बढ़ेगी उत्पादकता, घटेगा खर्च
मशीनीकरण से कृषि लागत घटे, श्रम निर्भरता कम हो, उत्पादकता बढ़े, आधुनिक तकनीक से प्रतिस्पर्धा बढ़े।
डेंगू में बकरी का दूध उपयोगी, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की बड़ी जानकारी
डेंगू में बकरी का दूध पाचन आसान, शरीर को पोषण देकर रिकवरी में मददगार माना जाता।
अमरूद-संतरे में कीट-रोग नियंत्रण
अमरूद-संतरा फसलों में प्रमुख कीट-रोग पहचानकर सुरक्षित नियंत्रण हेतु प्रभावी उपाय और छिड़काव निर्देश।
सुपरफूड किनोवा: किसानों के लिए रबी सीजन की नई कमाई फसल
सुपरफूड किनोवा रबी फसल है, पौष्टिक, हाई-प्रोटीन, नवंबर में बोई जाती और आसान खेती वाली।
गेहूं की नवीनतम किस्में, बीजोपचार और खाद
रातों-रात टमाटर की फसल पर ‘कटवा लट’ का कहर
इस कीट की लटें रात्रि में भूमि से बाहर निकल कर छोटे-छोटे पौधों को सतह के बराबर से काटकर गिरा देती हैं
गेंदे की वैज्ञानिक खेती
मौसमी फूलों में गेंदे का महत्वपूर्ण स्थान हैं। इसके फूल विभिन्न रंग- आकार में आते हैं। किसान इसकी खेती करके वर्ष भर आय प्राप्त कर सकता है
धैर्य, सौन्दर्य और सृजन की कला- बोनसाई
बोनसाई सजावटी बागवानी की एक विशिष्ट और सजीव कला है। जिसमें पौधों को इस प्रकार प्रशिक्षित किया जाता है
मैथी की वैज्ञानिक खेती
मेथी की खेती पूरे प्रदेश में की जाती है। मेथी के सूखे दानों का उपयोग मसाले के रूप में, सब्जी, अचार और दवा निर्माण में किया जाता है
हर्षोल्लास का पर्व दिवाली से जुड़ी आस्था का रोमांच जोरों है। कार्तिक मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह महापर्व अँधेरी रात को असंख्य दीपों की रोशनी से भर देता है।
सरसों तिलहनी फसल के रूप में उगायी जाती है। मृदा में आवश्यक मात्रा में अनुपलब्ध पोषक पदार्थों की आपूर्ति के लिए फसलों में उर्वरकों का प्रयोग किया जाता है।
अक्षय ऊर्जा: आज की आवश्कता
ऊर्जा आधुनिक जीवन शैली का अविभाज्य अंग है। ऊर्जा का पर्यावरण से सीधा सम्बन्ध है। ऊर्जा के परम्परागत साधन (कोयला, गैस, पेट्रोलियम आदि) सीमित मात्रा में होने के साथ-साथ पर्यावरण के लिए बहुत हानिकारक हैं। आपको बता दें कि भारत अभी भी अपनी कुल ऊर्जा का 40 प्रतिशत परम्परागत ईंधन के रूप में इस्तेमाल करता है।
मिट्टी बिना खेत कैसे, खेत बिना भोजन ?
मृदा हमारी पृथ्वी का सबसे मूल्यवान प्राकृतिक संसाधन है। जो खाद्य उत्पादन, पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन और जलवायु स्थिरता का आधार स्तम्भ है। स्वस्थ मृदा वह है, जो पौधों को बिना किसी बीमारी अथवा अतिरिक्त बाहरी सहायता के बढऩे में मदद करती है। वर्तमान में मृदा का स्वास्थ्य गिरता जा रहा है जो मानवता और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यधिक चिंताजनक हैं।
कृषि क्षेत्र में ड्रोन की भूमिका और उपयोग
कृषि कार्यों में मशक्कत और इसे कम आमदनी का जरिया मानकर युवा पीढ़ी का खेती से मोह भंग हो रहा है। इसके चलते ग्रामीण युवा शहरों की ओर पलायन कर रहे है। ड्रोन नई तकनीकी से परिपूर्ण होने के कारण युवा पीढ़ी को अवश्य ही आकर्षित करेगा और खेती की तरफ कदम बढ़ाने के लिये प्रोत्साहित करेगा।
खेती की ओर लौट रहे है औद्योगिक श्रमिक
शहरों में जाकर काम करने वाले भारत के लोग बड़ी संख्या में अपने गांवों की ओर लौट रहे हैं। ग्रामीण अंचलों के श्रमिकों को 'कम मुनाफादायकÓ कृषि से शहरी केंद्रों में बेहतर रोजग़ार के अवसरों की तलाश में धकेलने वाली नीति-समर्थित चाल पिछले पांच सालों में उलट गई लगती है।
मौसमी फूलों में गेंदे का महत्वपूर्ण स्थान हैं। इसके फूल विभिन्न रंग- आकार में आते हैं। किसान इसकी खेती करके वर्ष भर आय प्राप्त कर सकता है। इसकी खेती अधिकतर खुले पुष्पों के लिए की जाती हैं, जिनका माला, गजरा, वेणी, गुलदस्ता और दूसरे सजावटी कार्यों के लिए प्रयोग किया जाता हैं।
अलसी से स्वास्थ्य सुरक्षा
स्वस्थ रहने के लिए आहार में फल-सब्जियों के साथ-साथ विभिन्न तरह के बीजों को भी जरूर शामिल करना चाहिए। ऐसे ही बीजों में से एक है अलसी, जिसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन, फाइबर, विटामिन्स और मिनरल्स पाए जाते हैं।
पौधशाला की तैयारी
अगर आप के पास थोड़ी सी जमीन है और आप ज्यादा मुनाफा कमाना चाहते हैं तो पौधों की नर्सरी बेहतर विकल्प हो सकती है। पौधशाला बनाने में लागत कम आती है। लेकिन, देखभाल काफी करनी पड़ती है, हालांकि यह पौधे मुनाफा भी ज्यादा देते हैं।
टमाटर की संरक्षित और मैदानी खेती
टमाटर में कार्बोहाइड्रेट, विटामिन, कैल्शियम, आयरन तथा अन्य खनिज लवण प्रचुर मात्रा में उपस्थित रहते हैं । टमाटर में लाइकोपीन नामक वर्णक (पिगमेंट) पाया जाता है । जिसे विश्व का सबसे महत्वपूर्ण एंटीऑक्सीडेंट बताया गया है ।
शकरकंद की वैज्ञानिक खेती
शकरकंद में स्टार्च अधिक मात्रा में पाया जाता है । इसको शीतोष्ण और समशीतोष्ण जलवायु क्षेत्र में अधिक उगाया जाता है।
सरसों की बुवाई: बीज दर और उर्वरक प्रबंधन
सरसों फसल की समय पर बुवाई, सही भूमि उपचार, बीज दर और उर्वरक प्रबंधन से पैदावार में बढोत्तरी की जा सकती है। इसके लिए किसानो को निम्न अनुसंशित सिफ ारिशों को अपनाना चाहिये।
सूत्रकृमि: मृदा पारिस्थितिकी पर प्रभाव
सूत्रकृमि: मृदा पारिस्थितिकी पर प्रभाव, कार्बनिक पदार्थ पुनर्चक्रण में भूमिका सीमा यादव, पार्वती, डॉ. हेमराज गुर्जर, डॉ. बीएस. चंद्रावत राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर
चना फसल में सूत्रकृमि की रोकथाम
ग्लोबल वार्मिंग से भूजल विषाक्त होने का खतरा
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट-24 दो मायनों में अभूतपूर्व रहा। पहली तो यह कि देश के इतिहास में पहली बार किसी वित्त मंत्री ने 7 वीं बार बजट पेश किया है। दूसरी यह कि कृषि की वर्तमान आवश्यकता के मद्दे नजर इस बजट में देश की खेती और किसानों के लिए ऐतिहासिक रूप से अपर्याप्त न्यूनतम राशि प्रावधानित की गई है।
2020 सम्पूर्ण विश्व के लिए एक चुनौतिपूर्ण वर्ष था। कोरोना वायरस के प्रकोप ने सम्पूर्ण मानव जाति के अस्तित्व को एक गंभीर चुनौती दी।
टमाटर की खेती प्रदेश के सभी जिलों में होती हैं। यह फसल किसान के लिए लाभकारी हैं।
बीज अच्छी किस्म के अच्छे और स्वस्थ फलों से लेने चाहिए। चूंकि यह नई किस्म संकर प्रजाति की है, लिहाजा हर बार इसका नया बीज ही बोना चाहिए।
भूमि से पूर्ण लाभ उठाने और उर्वरा शक्ति का पता लगाने के लिए किसानों को खेत की मिट्टी जांच कराकर मृदा स्वास्थ्य कार्ड प्राप्त करना आवश्यक है।
गिलोय के पत्ते पान के पत्ते जैसे दिखाई देते हैं और जिस पौधे पर यह चढ़ जाती है। उसे मरने नहीं देती। इसके बहुत सारे लाभ आयुर्वेद में बताए गए है।
प्रदेश के कपास उत्पादक जिलों में किसानों ने फसल बुवाई हेतु खेत तैयार करना शुरू कर दिया है। वहीं, कृषि विभाग से अनुमति मिलने के साथ ही सहकारी और निजी बीज प्रदाता कंपनियों ने बीटी कपास बीज की बिक्री शुरू कर दी है।
बढ़ते तापमान ने बढ़ाई चिंता, सीएम भजनलाल ने जारी की एडवाइजरी
श्वेत क्रांति का नया दौर, फसलों को पछाड़कर 'किसान का एटीएम' बना डेयरी क्षेत्र
जानवरों के खाने लायक भी नहीं है भारतीय चावल, चीन ने लौटाई खेप
किसानों को सता रही है सूखे की चिंता, क्या इस साल खेती पर रहेगी 'अल नीनो' की मार!