खरीफ प्याज गंठिया तैयारी: कम लागत में ज्यादा कमाई
(सभी तस्वीरें- हलधर)प्याज एक महत्वपूर्ण व्यापारिक फसल है। जिसमें विटामिन सी, फास्फोरस आदि पौष्टिक तत्व प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। प्रदेश में अधिकांश किसान रबी में प्याज का उत्पादन लेते है। लेकिन, पिछले कुछ वर्षो से किसानों का रूझान खरीफ प्याज की ओर बढ़ा है। क्योंकि, खरीफ प्याज के अच्छे भाव किसान को मिल रहे है। किसान गंठियाँ उगाकर भी अच्छा लाभ कमा सकते है। अलवर, सहित हाड़ौती संभाग में खरीफ प्याज उत्पादन के सकारात्मक परिणाम सामने आए है। गौरतलब है कि प्याज का उपयोग सलाद, सब्जी, अचार और मसाले के रूप में किया जाता है।
जलवायु- समशीतोष्ण
नर्सरी में पौध तैयार करना
पौध तैयार करने के लिए 3 मीटर लम्बी और 1 मीटर चौड़ी क्यारी भूमि से लगभग 15-20 सेमी ऊंची बना लेनी चाहिए। उपरोक्त आकार की 50 क्यारियां एक हैक्टयर में रोपण के लिए पर्याप्त होती हैं। बीज बोने से पहले क्यारी की भलीभांति गुड़ाई करनी चाहिए। प्रति वर्ग मीटर क्षेत्र में 4-5 ग्राम कैप्टान अथवा थायरम मिलना चाहिए। प्रत्येक क्यारी में 15-20 किग्रा अच्छी तरह सडा हुआ गोबर का खाद और 10-15 ग्राम कार्बोफ्यूरान मिला देना चाहिए। क्यारी को समतल करने के बाद 8-10 सेमी की दूरी पर 1.2 सेमी गहरी नालियां बनाकर क्यारी तैयार कर लेना चाहिए। बुवाई के बाद बीज को मिट्टी और सड़े-गले गोबर खाद के मिश्रण से ढककर उसके ऊपर कांस अथवा पुआल आदि की एक पतली परत बिछा देना चाहिए। जिससे तेज धूप और वर्षा से बीज की रक्षा हो सके। यह परत भूमि में नमी बनाए रखने में भी सहायक होती है। बीज बोने के तुरंत बाद क्यारी में फव्वारे अथवा झारे से हल्की सिंचाई करनी चाहिए। इसके बाद एक दिन के अंतर पर सिंचाई करते रहे। जब बीज का जमाव (अंकुरण) हो जाये तो कांस अथवा पुआल की परत को हटा देना चाहिए। नर्सरी में आवश्यकतानुसार हल्की सिंचाई और निराई करते रहने से 6-7 सप्ताह बाद पौध रोपाई के लायक हो जाती है। अंकुरण के बाद कैप्टान अथवा थायरम अथवा डायथेन एम-45 (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का घोल पौधों की जड़ों के पास मृदा में डालने (ड्रेंनचिंग) से जड़ गलन और दूसरी बीमारियों का भय नहीं रहता है। आवश्यक हो तो 10-15 दिन बाद फिर ड्रेंनचिंग करना चाहिए।