दलहन किसानों को MSP से कम दाम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगी रिपोर्ट
दलहन किसानों को MSP से कम दाम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, केंद्र से मांगी रिपोर्ट
(सभी तस्वीरें- हलधर)सुप्रीम कोर्ट ने देश में दलहन किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से कम दाम मिलने के मामले में महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए। किसान महापंचायत द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने केंद्र सरकार को संबंधित पक्षों के साथ बैठक कर पूरी स्थिति स्पष्ट करने और विस्तृत रिपोर्ट अदालत के समक्ष पेश करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की खंडपीठ ने रिट याचिका संख्या 911/2025 की सुनवाई के दौरान दिया।
मामले में अगली सुनवाई 8 मई को
सर्वोच्च अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 मई, 2026 की तारीख तय की है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि देश में दलहन उत्पादन को बढ़ावा देने और घोषित MSP व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए जरूरी नीतिगत कदमों पर विचार किया जाना चाहिए।
सरकारी नीतियों पर उठे सवाल
याचिका में कहा गया है कि केंद्र सरकार ने दलहन उत्पादन बढ़ाने के लिए “मिशन फॉर आत्मनिर्भरता इन पल्सेज” नामक छह वर्षीय कार्यक्रम शुरू किया है, जिसके लिए लगभग 11,400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस योजना का उद्देश्य MSP आधारित खरीद व्यवस्था को मजबूत करना बताया गया है, लेकिन दलहन आयात से जुड़ी नीतियां कई मामलों में इस लक्ष्य के अनुरूप नहीं दिखाई देतीं।
आयात नीति से किसानों को नुकसान का आरोप
किसान महापंचायत की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि सरकार द्वारा पीली मटर के आयात पर शुल्क शून्य करने से देश में बड़ी मात्रा में सस्ती दाल आने लगी। इसके कारण घरेलू बाजार में चना और अरहर जैसी प्रमुख दलहन फसलों के दाम दबाव में आ गए, जिससे किसानों को कई जगह MSP से कम कीमत पर अपनी उपज बेचनी पड़ी। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने इसी मुद्दे को लेकर सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की थी। उनका कहना है कि सस्ती आयातित दालों के कारण भारतीय दलहन किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
आयात शुल्क बढ़ाने की भी उठी मांग
याचिका में यह भी बताया गया कि केंद्रीय कृषि मंत्री ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री को पत्र लिखकर पीली मटर पर आयात शुल्क बढ़ाने का सुझाव दिया था। उनका कहना था कि पीली मटर की लैंडिंग कीमत भारत में प्रमुख दलहनों की MSP कीमतों से काफी कम है, इसलिए घरेलू किसानों के हितों की रक्षा के लिए इस पर करीब 50 प्रतिशत आयात शुल्क लगाया जाना चाहिए।
रिकॉर्ड स्तर पर बढ़ा दालों का आयात
अदालत को यह भी बताया गया कि वर्ष 2024 के बाद से देश में दलहन का आयात रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया है, जिससे घरेलू किसानों पर आर्थिक दबाव बढ़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए सरकार को निर्देश दिया कि वह सभी संबंधित पक्षों- किसानों, नीति विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों के साथ बैठक कर विस्तृत रिपोर्ट अदालत में प्रस्तुत करे।
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