दिसम्बर में धूजणी गायब, रबी पर भी असर

नई दिल्ली 23-Dec-2025 02:22 PM

दिसम्बर में धूजणी गायब, रबी पर भी असर

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। दिन-रात के तापमान में हो रही बढौत्तरी किसानों की उम्मीदों के साथ-साथ रबीउत्पादन पर भारी पड़ती नजर आ रही है। अधिक तापमान के चलते रबी फसलों की रंगत उडऩे लगी है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि रबी फसलों के लिए सर्दी जरूरी है। दिन-रात का पारा ऐसा ही बना रहा तो रबी फसलों के उत्पादन स्तर में बड़ी कमी देखने को मिल सकती है। वहीं, कृषि लागत भी बढ़ जायेंगी। किसानों को सिंचाई की समस्या से दो चार होना पड़ सकता है। गौरतलब है कि ज्यादा पारे का असर सरसों और गेहूं-जौ में ठीक विपरीत है। वैज्ञानिकों ने बताया कि ज्यादा तापमान से सरसों की वानस्पतिक वृद्धि ज्यादा होगी। वहीं, गेहूं-जौ में पौधों की वृद्धि धीमी पड़ जायेगी। पौधें पीले पडक़र नष्ट होना शुरू हो जायेंगे। दरअसल, ठंड के लिहाज से दिसम्बर सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन, इस महीने में मौसम के तेवर बदले हुए है। तापमान कम होने का नाम नहीं ले रहा है। बढ़ता तापमान फसल के लिए खतरा बनता जा रहा है। ऐसे में रबी की फसलों में जो नमी मिलनी चाहिए थी। वह नहीं मिल पा रही है। गौरतलब है कि प्रदेश में मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे है। पश्चिमी मैदानी इलाकों में फसलों पर बर्फ जमने लगी है। वहीं, दूसरे क्षेत्रों में दिन का पारा गर्मी लोगों को गर्मी का अससास करवा रहा है।

सर्दी क्यों जरूरी

सर्दियों के मौसम में फसलों की पत्तियों पर जमी ओस से पौधे कुछ मात्रा में पानी अवशोषित करते हैं। हालांकि बड़ी मात्रा में उन्हें जड़ो से पानी मिलता है लेकिन ओस से अवशोषित पानी से पौधों में नमी बनी रहती है। रबी की फसलों का स्वभाव नमी में अच्छी बढ़ोतरी करने का होता है। ऐसे में तेज तापमान होने पर फसलों पर अच्छा असर नहीं पड़ता है। पत्तियां जल्दी मुरझाने लगती है। साथ ही उन पर पीलापन आने लगता है। इससे पैदावार प्रभावित होती है।

सरसों में नुकसान ऐसे

सरसों अनुसंधान संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि दिसम्बर में सरसों की फसल में फूल और फली में दाना बनने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है। इसके लिए 12-15 डिग्री सेल्सियस तापमान की जरूरी है। जबकि, वर्तमान में दिन-रात का पारा औसत से काफी ज्यादा है। इस स्थिति में सरसों की वानस्पतिक ग्रोथ ज्यादा होगी। वहीं, फलियों में दाना बनने की प्रक्रिया प्रभावित होगी। उन्होंने बताया कि पौधें की जो उर्जा फूल और फली बनने पर खर्च होनी चाहिए, वह पत्तियों के निर्माण पर खर्च हो रही है। ऐसे में फसल से अपेक्षित उत्पादन नहीं मिल पायेगा।

रूक जायेगी वृद्धि

कृषि महाविद्यालय कोटपुतली के अधिष्ठाता और कृषि विशेषज्ञ डॉ. सुरेन्द्र सिंह मनोहर ने बताया कि अधिक तापमान से गेहूं-जौ की फसल प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि ज्यादा तापमान से पौधों की ग्रोथ रूक जायेगी। फुटान नहीं होने से उत्पादन भी प्रभावित होगा। गौरतलब है कि गेहूं के लिए औसतन तापमान 5 से 15 डिग्री तापमान अनुकूल रहता है। जबकि, इन दिनों तापमान अधिकतम 30 और न्यूनतम 10 डिग्री सेल्सियस है। इस गर्मी का असर रबी की दूसरी फसलों पर भी आएगा।

सरसों में मोयला का प्रकोप

उधर, ज्यादा तापमान से सरसो की फसल में मोयला कीट का प्रकोप नजर आने लगा है। इस कीट के ज्यादा प्रकोप से से सरसों की पत्तियां मुडऩे लगती हैं, पीली पड़ जाती हैं और धीरे-धीरे सूख जाती हैं। समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन पर सीधा असर पड़ता है। बता दें कि इस कीट का शुरूआती प्रकोप खेत की मेड़ों पर दिखाई देता है। प्रारंभिक अवस्था में ही कीटनाशी पाउडर अथवा दवा का प्रयोग कर इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। गौरतलब है मोयला एक रसचूसक कीट है।  इस कीट के नियंत्रण के लिए किसान इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल की 3 मिलीलीटर मात्रा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव करें। छिडक़ाव सुबह अथवा शाम के समय करें, जब हवा की गति कम हो।

लक्ष्य से 96 फीसदी रबी

उधर, पारे के चढ़ाव-उतार के बीच रबी फसलों की बुवाई निर्धारित लक्ष्य एक करोड़ 20 लाख हैक्टयर की तुलना में 96 फीसदी हो चुकी है। इस साल जौ और चने की बुवाई ही लक्ष्य के पार पहुंची है। शेष दूसरी रबी फसलों की बुवाई लक्ष्य से पिछड़ी हुई है।  गौरतलब है कि गेहंू बुवाई का समय अब समाप्ति की ओर है। हालांकि, लक्ष्य से गेहूं की बुवाई 95 फीसदी हो चुकी है। कृषि विभाग के मुताबिक रबी फसलों की बुवाई एक करोड़ 15 लाख हैक्टयर क्षेत्र में हो चुकी है।

कोहरे और ठंड का अलर्ट

दिसंबर के आखिरी सप्ताह में सर्दी के तेवर और तीखे होने वाले हैं। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक, 24 दिसंबर से उत्तरी हवाओं के प्रभाव के कारण न्यूनतम तापमान में पुन: 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की गिरावट आएगी। साथ ही, 23 और 24 दिसंबर को राज्य के पश्चिमी और  उत्तरी भागों में कहीं-कहीं घना कोहरा दर्ज होने की संभावना जताई गई है। मौसम में आ रहे इस उतार-चढाव को देखते हुए वाहन चालकों और किसानो से सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। तापमान गिरने से आने वाले दिनों में ठिठुरन बढेगी, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है।


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