'खाद' को लेकर प्रदेश में मचा हाहाकार
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। प्रदेश में खाद को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। सरकार यूरिया डीएपी की पर्याप्त उपलब्धता के लाख दांवे करे। लेकिन मैदानी हालात कृषि विभाग की पोल खोलते नज़र आ रहे है। सरकार कह रही है रबी फ़सलों का बुवाई रक़बा बढ़ने से खाद की माँग बढ़ी है। अब सवाल ये उठता है कि कृषि विभाग बेहतर मानसून के बाद भी खाद का सही आकलन क्यों नहीं कर पाया। शायद यही कारण है कि विभागीय अधिकारियों की अदूरदर्शिता को छिपाने के लिए अब कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीना को मैदान सम्भालना पड़ रहा है।
गौरतलब है कि प्रदेश में संगीनो के साये में उर्वरकों का वितरण हो रहा है। इसके बाबजूद भी हालात बद से बदत्तर नज़र आ रहे हैं। कई जिलो में खाद का स्टॉक शून्य के कगार पर पहुँच चुका है। इस कारण सुबह से शाम तक क़तार में खड़े होने के बाद भी किसानों को यूरिया डीएपी जैसे उर्वरक नहीं मिल पा रहे है। इसके चलते किसान का समय तो ख़राब हो ही रहा है। साथ ही, गाँव से शहर आने का पैसा भी बेकार जा रहा है।
बड़ी हुई उर्वरक माँग ने कृषि विभाग की खोली पोल
किसानों का कहना है कि खाद की कमी के कारण उनकी रबी की फसलें में खाद देने का समय हाथ से निकल रहा है। निजी दुकानदार खाद को मनमाने दामों पर बेच रहे हैं। साथ ही किसानों को अन्य उत्पाद खरीदने को मजबूर कर रहें हैं। किसान दुकानदारों पर कृषि विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत के चलते कालाबाजारी कराने का आरोप लगा रहे हैं। जिला मुख्यालय हो तहसील मुख्यालय और ब्लाक मुख्यालय या फिर गांव देहात हो। सहकारी समितियों पर खाद आती है और एक दिन में खत्म हो जाती है। किसानों का दिन समितियों पर निकलता है और दोपहर तक खाद बंट जाती है। इसका कारण है कि समितियों पर सरकारी दाम में खाद मिल रही है।
प्राइवेट में ओवररेटिंग हो रही है। इसलिए किसान सरकारी समिति से एनपीके खरीद रहे हैं। घंटों लाइनों में लगने के बाद भी किसानों को उम्मीद नहीं रहती कि उनको खाद मिल ही जाएगी। युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक खाद के लिए लाइन में लगकर पसीना बहा रहे हैं। वहीं, निजी दुकानों पर एनपीके व डीएपी के साथ जाइम, कैल्सियम टैग कर लेने को मजबूर किया जा रहा है। किसानों ने आरोप लगाया कि बाजार में खाद की कालाबाजारी हो रही है, बाद में निजी दुकानदार ओवररेट खाद बेचते हैं। किसानों का आरोप है कि दुकानदार कृषि विभाग के अधिकारियों से सांठगांठ कर खाद की कालाबाजारी कर रहे हैं। गौरतलब है कि इफको व कृभको की एजेंसिया खाद सप्लाई में जुटे होने के बावजूद किसान को खाद नहीं मिल पा रही है। बता दें कि किसानों को समय रहते खाद नहीं फसलों की बढ़वार रुक जाएगी।
बुआई का अनुमान क्यों नहीं लगा पाए कृषि अधिकारी
किसान नेता रामेश्वर चौधरी का कहना है कि खाद बिक्री के इस गोरखधंधे में दुकानदार से लेकर विभाग के अधिकारियों की भी मिली भगत है। उधर,अधिकारियों का दावा है कि प्रदेश में खाद की कोई कमी नहीं है। अगर कोई विक्रेता तय कीमत से अधिक ले रहा है, तो जांच कराकर कार्रवाई की जा रही है। जबकि, किसानों को एनपीके व डीएपी के लिए भटकना पड़ रहा है। सहकारी समितियों पर किसानों का हुजूम लगा मिलता है। किसानों को उनके मांग के अनुसार खाद नहीं मिल पा रही है तो, किसानों को दुकानों से मंहगे दामों पर खरीदनी पड़ती है। जितने किसान समितियों पर पहुंचते है, उनमे से आधे किसानों को बमुश्किल खाद मिल पाती है। दिन भर किसान समितियों पर लाइन में खड़े रहते है फिर भी किसानों को खाली हाथ लौटना पडता है। गोरतलब है कि किसानों को खाद के लिए ऐसे ही भटकना पड़ा तो अच्छी फसल का उत्पादन कैसे होगा?
कृषि मंत्री डॉ. मीणा ने खाद संकट पर ये कहा
प्रदेश के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीणा ने गुरुवार को प्रेसवार्ता कर कहा, 'किसानों द्वारा आवश्यकता से अधिक उर्वरक खरीदने की प्रवृत्ति भी मांग में वृद्धि का एक प्रमुख कारण है।' बावजूद इसके राज्य सरकार ने उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में कोई कमी नहीं रखी। पिछले 2 वर्षों में डीएपी की औसत आपूर्ति 2.53 लाख मैट्रिक टन करायी जा चुकी है, जो पूर्व सरकार के 5 वर्षीय औसत से अधिक है। कृषि मंत्री ने बताया कि रबी सीजन के पहले दो महीनों अक्टूबर व नवम्बर में 7.53 लाख मैट्रिक टन की मांग के विरुद्ध 9.15 लाख मैट्रिक टन यूरिया उपलब्ध करवा दिया गया है। इसके अतिरिक्त 24 हजार मैट्रिक टन की आपूर्ति जारी है। आगामी दो दिनों में 31 हजार मैट्रिक टन यूरिया और उपलब्ध होने से माह के अंत तक कुल उपलब्धता 9.70 लाख मैट्रिक टन से अधिक हो जाएगी, जो मांग से 29 प्रतिशत अधिक है।
उन्होंने कहा कि नवम्बर माह के शेष दिनों में लगभग 50 हजार मैट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु भारत सरकार एवं आपूर्तिकर्ता कंपनियों को निर्देशित किया गया है। दिसंबर 2025 हेतु स्वीकृत मांग 3.80 लाख मैट्रिक टन को बढ़ाकर 4.50 लाख मैट्रिक टन करने का आग्रह भी रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय को भेज दिया गया है |