मंूग-चना का दाना-दाना खरीद से बाहर

नई दिल्ली 30-Oct-2025 01:14 PM

मंूग-चना का दाना-दाना खरीद से बाहर

(सभी तस्वीरें- हलधर)

सरकार का ये कैसा प्रोत्साहन

जयपुर। देश को दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए भारत सरकार ने राष्ट्रीय दलहन मिशन शुरू किया है। साथ ही, किसानों से दलहन की शत प्रतिशत खरीद यानी दाने-दाने की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद का वादा भी किया है। लेकिन, इस मिशन का लाभ प्रदेश के चुनिंदा किसानों को ही मिलेगा। क्योंकि, एमएसपी खरीद में मूंग और चना फसल को शामिल नहीं किया गया है। किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रामपाल जाट का कहना है कि सरकार की यह घोषणा किसानों केलिए कटे पर नमक छिडक़ने जैसी है। गौरतलब है कि प्रदेश में 20-22 लाख हैक्टयर क्षेत्र में मूंग और 15 से 17 लाख हैक्टयर क्ष्ेात्र में चना फसल की बुवाई होती है। जब, इन दोनों फसलो की एमएसपी पर खरीद ही नहीं होगी तो किसान दलहन उत्पादन के लिए कैसे प्रोत्साहित होंगे। साथ ही, दलहन मिशन का लाभ प्रदेश के किसानों को कैसे मिलेगा? यह बात प्रदेश सरकार के लिए सोचनीय और चिंतनीय है। गौरतलब है कि केन्द्र सरकार ने दलहन मिशन में अरहर, उड़द और मसूर की शत प्रतिशत खरीद करने का ऐलान किया है।

किसानों को होता है आर्थिक नुकसान

उन्होंने बताया कि हर साल फसल तैयार होने पर मूंग और चना उत्पादक किसानों को प्रति क्विंटल एक से दो हजार रूपए का नुकसान उठाना पड़ता है। क्योंकि, बाजार में फसल पहुंचने के साथ ही दलहन के भाव में गिरावट का दौर शुरू हो जाता है और सरकारी खरीद अधिकांश फसल पहुंचने के बाद शुरू होती है। ऐसे में जरूरतमंद किसान बाजार में अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर हो जाता है। गौरतलब है कि सरकार एमएसपी पर कुल उपज का 25 फीसदी ही खरीद करती है।

हाशिएं पर मसूर-अरहर उत्पादन

उन्होंने बताया कि प्रदेश में मसूर और अरहर का उत्पादन हाशिये पर है। देश के सकल उत्पादन का 5 फीसदी यहां पैदा होता है। कर्नाटक, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश, तेलंगाना, ओड़ीसा अग्रणी है। जबकि, उड़द उत्पादन में मध्यप्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, उत्तरप्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र के बाद राजस्थान का सातवां स्थान है। गौरतलब है कि प्रदेश में 27 हजार हैक्टयर में मसूर और तीन से साढे तीन लाख हैक्टयर क्षेत्र में उड़द का उत्पादन होता है।