अलर्ट ! गेहूं फसल में हीट स्ट्रॉक का खतरा, किसान करें ये वैज्ञानिक उपाय

नई दिल्ली 09-Mar-2026 04:47 PM

अलर्ट ! गेहूं फसल में हीट स्ट्रॉक का खतरा, किसान करें ये वैज्ञानिक उपाय

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। प्रदेश में एक तरफ जहां सर्दी की विदाई हुई है तो वहीं दूसरी तरफ समय पूर्व ही गर्मी की दस्तक दे चुकी है। इससे गेहूं में हिट स्ट्रोक  की समस्या देखने को मिल सकती है। बता दें कि चढ़ते पारे के कारण सुबह-शाम हल्की सर्दी का अहसास भी अब खत्म हो चुका है। मौसम साफ और शुष्क बना हुआ है।  मौसम विभाग के दिन-रात के तापमान के आंकडों पर नजर डाले तो पश्विमी जिलों में दिन का अधिकतम तापमान 36 डिग्री  तक पहुंच गया है। तापमान में हो रही बढौत्तरी का प्रभाव गेहूं-जौ की फसल के साथ-साथ मरू वनस्पतियों पर भी देखने को मिल रहा है। मौसम विभाग की मानें तो गर्मी जल्द ही अपने तेवर दिखाना शुरू कर देगी। कडक़ धूप निकलेगी। तापमान में भी दो से तीन डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी दर्ज हो सकती है। गौरतलब है कि इन दिनों किसान रबी फसलों की कटाई में जुटे हुए है। गेहूं-जौ और चना फसल को तैयार होने में अभी समय लगेगा। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस साल एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय रहने से मौसम रबी फसलों के अनुकूल बना हुआ है। लेकिन, एकदम से तापमान में बढौत्तरी होने से फसल पर विपरीत प्रभाव देखने को मिल सकता है। इस कारण गेहूं-जौ की फसल समय से पहले ही पककर तैयार होने की संभावना है। इससे उत्पादन में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है  

फसलों में आने लगा बदलाव 

किसानों के अनुसार इस बार खेजड़ी की पौधों पर एक माह पहले ही टहनियां बनने लगी है। अमूमन खेजड़ी में फुटान अप्रैल के पहले सप्ताह में आता है। वहीं ज्यादा गर्मी से रबी की फसलें पकाव अवस्था से पहले ही सूखने लगी है। गर्मी की वजह से गेहूं, जौ, सरसों की फसल खेतों में सूख रही है। किसानों के अनुसार समय से पहले आई गर्मी रबी फसलों की पैदावार को भी बड़ा नुकसान पहुंचाएगी।

यह करें किसान

  1. भिण्डी, मिर्च, टमाटर, नीबू और पपीता : विषाणु जनित रोग की रोकथाम के लिए डाईमिथोएट 30 ई. सी. 0.1 प्रतिशत अथवा एसिफेट 75 डब्लू पी 0.15 प्रतिशत अथवा इमिडाक्लोपरिड 17.8 एस.एल. 1 मिली. 3 लीटर पानी के घोल का छिडकाव करें।
  2. मिर्च में डाईबैेक : मिर्च की फसल में डाईबैेक नियंत्रण के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लू पी 3 ग्राम प्रति लीटर पानी के घोल का छिडकाव करें। साथ ही, झुलसा रोग के लक्षण दिखाई देने पर रोग के नियंत्रण के लिए मैन्कोजेब 75 प्रतिशत डब्लू पी 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर दवा का छिडक़ाव करें। 
  3. पपीते में तना गलन : पपीते में तना गलन रोग के लक्षण दिखाई देने पर जल निकास का उचित प्रबन्ध करें। कैप्टान 2 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में मिलाकर छिडक़ाव करें।
  4. ग्रीष्म कालीन नर्सरी : मिर्च और टमाटर की नर्सरी तैयार करने के लिए बुवाई से पूर्व बीजो को 2 ग्राम कैप्टान प्रति किलों बीज की दर से उपचारित करें। नर्सरी में 8-10 ग्राम कार्बोफ्यरान 3 जी प्रति वर्गमीटर की दर से नर्सरी की क्यारी में मिलावें। 

फसल अवशेष से बनाएं खाद 

रबी फसलों की कटाई के साथ ही प्रशाासन भी सतर्क हो गया है। प्रशासन ने फसल अवशेष जलाने से रोकने के लिए किसानों को जागरूक करने और उल्लंघन करने वाले काश्तकारों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिए। उपखण्ड अधिकारी तहसीलदार, विकास अधिकारी, कृषि पर्यवेक्षकों, ग्राम विकास अधिकारियों, पटवारियों को निर्देश दिए गए कि वह किसानों को अपनी फसल अवशेष को नहीं जलाने दें। इसके लिए समझाइश करें और उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई करें। गौरतलब है कि फसल अवशेष जलाने पर वायु प्रदुषण और रोकथाम अधिनियम अधिनियम 1981 की धारा 19 (5) के तहत 2 एकड़ तक अवशेष जलाने पर 2500 रुपए जुर्माना और 2 से 5 एकड़ तक अवशेष जलाने पर 5000 रुपए के जुर्माने से दंडित करने का प्रावधान है। 

शुष्क रहेगा मौसम

आने वाले दिनों में मौसम स्थिर और शुष्क बने रहने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार राज्य के अधिकांश हिस्सों में अगले एक सप्ताह तक किसी बड़े मौसम परिवर्तन की संभावना नहीं है। इस दौरान तापमान में भी अधिक उतार-चढ़ाव देखने को नहीं मिलेगा।

चने में बड़े पैमाने पर उखटा का प्रकोप

भीलवाड़ा जिले में इस साल चना फसल में बडे पैमाने पर उखटा रोग का प्रकोप देखने को मिला है।  रोग के कारण फसल सूख रही है, जिससे किसान चिंतित नजर आ रहे हैं। उधर, संयुक्त निदेशक कृषि विनोद कुमार जैन के मुताबिकजल्द ही कृषि विभाग की टीम का गठन कर रोग प्रकोप का आंकलन किया जायेगा।  इसके बाद कृषि आयुक्तालय को रिपोर्ट भेजी जायेगी। बता दें कि गुलाबपुरा, शाहपुरा, फुलिया कला, खारी का लाम्बा, गागेडा, सरेरी और तस्वारिया क्षेत्र में इस रोग का प्रकोप ज्यादा देखने को मिला है।

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