आम की फसल में कीट-रोग का वैज्ञानिक तरीके से करें उपाय

नई दिल्ली 09-Mar-2026 06:40 PM

आम की फसल में कीट-रोग का वैज्ञानिक तरीके से करें उपाय

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। प्रदेश के वांगड़ अंचल के किसान आम की फसल की तैयारी में लग गए हैं। लगभग 120 दिन तक चलने वाले आम के सीजन के शुरुआत होते ही किसानों के चेहरे तो खिले हैं। लेकिन, फूल खराब होने की भी चिंता सता रही है। ऐसे में कृषि वैज्ञानिक ने किसानों को आम के फूल के बचाव साझा किए हैं। मामूली सा उपाय कर किसान अपने आम की फसल को सुरक्षित और इसकी उत्पादन क्षमता बढ़ा सकते हैं। कृषि विज्ञान केन्द्र, डूंगरपुर के प्रभारी डॉ. सीएम बलाई ने बताया कि आम के पेड़ों पर बोर आना शुरू हो गए हैं। फूलों के कुछ दिन बाद ही आम पर फल आना शुरू हो जाते हैं। लेकिन, बदलते मौसम के दुष्प्रभाव आम के फूल पर पडऩे लगते हैं। इन दिनों में बरसात और ओलावृष्टि हो जाने की स्थिति में फसल में कीट और रोग की संभावना बढ़ जाती है। फिलहाल, राज्य में ऐसी स्थित नहीं है। फिर भी किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। उल्लेखनीय है कि डूंगरपुर- बांसवाड़ा जिले में दो से ढ़ाई हजार हैक्टयर क्षेत्र में आम की पैदावार होती है। उत्पादित आम की खपत स्थानीय स्तर पर हो जाती है। साथ ही, आम उत्पादक किसान उच्च क्वालिटी के आम को दिल्ली, मुबंई, गुजरात, जयपुर आदि मंडियों में भेजते है। आम की फसल दोनों ही जिलों के किसानों के लिए नगद आमदनी का स्त्रोत है। 

झुलसा रोग 

फूल पर झुलसा रोग देखने पर उसमें कार्बेंडाजिम  के साथ मैंकोजेब  2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिडक़ाव करें।  

फल छेदक कीट

इस समय फसल में फलछेदक कीट का प्रकोप होता है। प्रबंधन के अभाव में यह कीट का प्रबंधन भारी नुकसान का सबब बन जाता है। इस कीट का लार्वा दो सटे हुए आम के फलों पर लगता है। शुरुआत में यह आम के फल पर काला धब्बा जैसा दाग देता है। यदि समय से इसकी रोकथाम नहीं की गई तो यह फल को छेद कर अंदर से सड़ा देता है। संक्रमित फल कुछ ही दिनों में गिर जाता है। इस कीट को रेड बैंडेड मैंगो कैटरपिलर भी कहते है। उन्होंने बताया कि इस कीट का प्रकोप फल में गुठली बनने की प्रक्रिया के दौरान होता है। कीट के प्रबंधन के लिए क्लोरीनट्रानिलिप्रोएल (कोरिजन) 0.4 मिली अथवा इमामेक्टिन बेंजोएट 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से घोल बनाकर छिडक़ाव करें। 

किसानों को हो सकता है खासा मुनाफा

आम की खेती में फूलों से फल लगने तक कई कीट और रोग नुकसान पहुंचाते हैं, जिसका असर आम उत्पादन पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस प्रकार से फसल का पूर्ण रूप से बचाव किया जा सकता है और उत्पादन क्षमता भी अधिक हो जाती है। किसानों को लगातार अपने पेड़ों पर नजर बनाए रखने की जरूरत है। 

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