किसानों को दी ‘ग्राम एग्रीटेक मीट’ की जानकारी, 31 मार्च तक कर सकते हैं पंजीकरण
बीकानेर में ग्राम एग्रीटेक मीट 2026 के लिए किसानों का पंजीकरण 31 मार्च तक खुलेगा।
पीएम किसान योजना: लाभ जारी रखने के लिए आधार सीडिंग और डीबीटी अनिवार्य
पीएम किसान योजना में आधार सीडिंग, डीबीटी और ई-केवाईसी अनिवार्य प्रक्रिया।
जलशक्ति मंत्री ने रामजल सेतु लिंक परियोजना को प्रदेश के लिए बताया वरदान
C. R. Patil ने जल संचय अभियान में रामजल सेतु परियोजना को राजस्थान के लिए वरदान बताया।
प्रदेश में 841 नई राशन दुकानों की प्रक्रिया शुरू, आमजन को मिलेगा सस्ता खाद्यान्न
Rajasthan में 841 नई राशन दुकानों की प्रक्रिया शुरू, सस्ता खाद्यान्न मिलेगा।
राज्य का पहला ‘नेफेड बाजार’ शुरू, किसानों को मिलेगा उचित मूल्य
जयपुर में पहला ‘नेफेड बाजार’ शुरू, किसानों को मिलेगा उचित मूल्य
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने का मौका, 9 फरवरी तक विशेष शिविर
गिरदावर सर्किल पर 5 से 9 फरवरी तक शिविरों में किसानों को योजनाओं लाभ मिलेगा
बड़ी राहत! मुख्यमंत्री ब्याज राहत योजना की अवधि 31 मार्च तक बढ़ी
सहकारी भूमि विकास बैंक के अवधिपार ऋणियों को मुख्यमंत्री ब्याज राहत योजना में 31 मार्च तक लाभ मिलेगा।
असम के जैविक उत्पादों को मिलेगा ग्लोबल बाजार, गुवाहाटी में बड़ा सम्मेलन
गुवाहाटी जैविक सम्मेलन में असम के जैविक उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिला राष्ट्रीय अवसर
किसानों के लिए बड़ी खबर! 31 से लगेंगे ग्राम उत्थान शिविर
राजस्थान एग्रीटेक मीट से पहले 31 जनवरी से ग्राम उत्थान शिविर, योजनाओं का सीधा लाभ
रबी उर्वरक पर बड़ा धमाका: सरकार ने 736 करोड़ बढ़ाया अनुदान
रबी 2025-26 में उर्वरक सब्सिडी बढ़ी, डीएपी, एनपीके, एसएसपी पर किसानों को राहत मिलेगी सरकार
PM किसान पोर्टल बंद, लाखों किसानों की किस्त अटकी
पीएम किसान पोर्टल बंद, पंजीयन अटका, किसानों को किस्त, अपडेट और भुगतान से वंचित डर
SC किसानों के लिए खुशखबरी, कृषि यंत्र अनुदान आवेदन फिर शुरू
कम आवेदन आने पर सरकार ने अनुसूचित जाति किसानों हेतु कृषि यंत्र आवेदन तिथि बढ़ाई।
मनरेगा खत्म? जी राम जी से बदलेगा ग्रामीण रोजगार का भविष्य
जी राम जी कानून ग्रामीण रोजगार बढ़ाकर टिकाऊ विकास, भुगतान, कृषि समन्वय सुनिश्चित करता है
कृषि सखी योजना: महिलाओं को 5000 मासिक, स्मार्टफोन जरूरी
राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन से कृषि सखियों को रोजगार, प्रशिक्षण, मानदेय और बायोइनपुट सुविधा मिलेगी
मेले में प्याज की उन्नत किस्मों का प्रदर्शन
1500 से अधिक किसानों ने लिया भाग
एफपीओ योजना पांच साल बढ़ी, इक्विटी लिमिट बढ़ाकर एक करोड़
एफपीओ योजना पांच साल बढ़ी, इक्विटी लिमिट एक करोड़, किसानों को मिलेगा मजबूत बाजार समर्थन
फॉलोअप अभियान के दिए निर्देश
मंजू राजपाल ने सहकारी सदस्यता आवेदनों के शीघ्र निस्तारण और नवगठित पैक्स रजिस्ट्रेशन निर्देश दिए।
31 तक करवाएं फसल बीमा
रबी फसलों के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में आवेदन की अंतिम तिथि 31 दिसंबर
कम खर्च में युवा बनेंगे ड्रोन पायलट
सरकार देगी 50 फीसदी अनुदान
प्रदेश में स्थापित होंगी 5 हजार वर्मी कम्पोस्ट इकाईयां
गर्मी के मौसम में पशु के बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन, यदि देखरेख और खान-पान संबंधी कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखा जाए तो गर्मी में पशु को बीमार होने से बचाया जा सकता है। साथी ही, अगली ब्यांत में अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है।
पशुपालन कृषि विज्ञान की वह शाखा है जिसके अंतर्गत पालतू पशुओं के विभिन्न पक्ष जैसे भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य, प्रजनन आदि का अध्ययन किया जाता है।
प्रदेश में चारागाह अतिक्रमण की भेंट चढ़ते जा रहे है। इसके चलते किसान और पशुपालक के सामने चारे की समस्या साल दर साल गहराती जा रही है। एक दुधारू पशु को प्रतिदिन 5 किलोग्राम हरे चारे और 15 किलोग्राम भूसे अथवा सूखे चारे की आवश्यकता होती है जिसका बाजार मूल्य 75 से 90 रूपए बैठता है। किसान भूसा तैयार करता है तो उसे बायलर और भट्टों में जलाने के लिए ऊचें दाम पर उद्योगपति खरीद लेते हैं।
ऊंट प्रजाति मरुस्थलीय और शुष्क क्षेत्रों में पाया जाने वाला बहुपयोगी पशुधन है। पिछले दो दशकों में ऊंटनी के दूध के औषधीय मूल्यों के कारण दूध उपयोग में वृद्धि और दिलचस्पी बढ़ती देखी गई है।
पशुपालन को वैज्ञानिक विधि से करने पर पशु का स्वास्थ्य उत्तम रहता है। वहीं, उत्पादन बढऩे से औसत लाभ में भी वृद्धि होती है। पशुपालन की लागत कम करने के लिए पशुपालकों को सामान्य बीमारियों की जानकारी होना जरूरी है।
पशुपालन कारोबार के तौर पर विकसित होने से लोगों की जहां कृषि पर निर्भरता घटी है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारों को स्वरोजगार का एक बेहतर विकल्प मिला है। पशुपालन व्यवसाय को ज्यादा से ज्यादा फायदेमंद बनाने के लिए वैज्ञानिकों ने भी कई तरीके ईजाद किए हैं।
बीटी कपास की बुवाई के लिए पौधे से पौधे की दूरी 2.5 से 2.5 फीट होनी चाहिए। बुवाई के पश्चात अच्छी बढ़वार और पौध मजबूती के लिए निराई-गुड़ाई करते रहे।
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