बरसात में पशुओं को स्वस्थ रखने के लिए अपनाएं ये तरीके
(सभी तस्वीरें- हलधर)बारिश का मौसम पशुओं के लिए लाभदायक होने के साथ-साथ अनेक चुनौतियाँ भी लेकर आता है। अधिक नमीए जलभरावए परजीवी संक्रमण और संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है। उचित प्रबंधन द्वारा इन समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। स्वच्छता, संतुलित पोषण, उचित आवास, टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच पशुओं को स्वस्थ रखने की कुंजी हैं।
आवास प्रबंधन : पशुशाला का फर्श ऊँचा और ढलानदार होना चाहिए। ताकि पानी जमा न हो। छत से पानी नहीं टपकना चाहिए। पशुशाला में पर्याप्त प्रकाश और वेंटिलेशन होना चाहिए। गीली जगह पर पशुओं को नहीं बांधना चाहिए।
पोषण प्रबंधन : हरे चारे की उपलब्धता बढ़ जाती है। लेकिन, अत्यधिक गीला अथवा फ फूं दयुक्त चारा नुकसानदायक हो सकता है। हरे चारे के साथ सूखा चाराए दाना मिश्रण, खली, मिनरल मिक्सचर और नमक देना चाहिए।
पेयजल प्रबंधन : पशुओं को स्वच्छ और ताजा पानी उपलब्ध कराना आवश्यक है। गंदे जल स्रोतों से रोग फैल सकते हैं। पानी की टंकियों और नांदों की नियमित सफाई करनी चाहिए।
रोग नियंत्रण, टीकाकरण : बारिश के मौसम में खुरपका-मुंहपका, गलघोंटू-लंगड़ा बुखार, निमोनिया और दस्त जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। समय पर टीकाकरण औरं पशु चिकित्सक की सलाह आवश्यक है।
परजीवी नियंत्रण : आंतरिक और बाहरी परजीवियों जैसे कृमि, जूँ और किलनी का प्रकोप बढ़ता है। नियमित कृमिनाशन और बाह्य परजीवी नियंत्रण कार्यक्रम अपनाना चाहिए।
दुग्ध पशुओं की देखभाल : दूध देने वाले पशुओं के थनों की स्वच्छता बनाए रखें। दुहने से पहले और बाद में थनों को साफ और सूखा रखें। इससे थनैला रोग की संभावना कम होती है।
बछड़ों की देखभाल : बछड़ों को ठंडी हवा और बारिश से बचाएं। उन्हें सूखे स्थान पर रखें और पर्याप्त पोषण दें। दस्त अथवा कमजोरी दिखाई देने पर तुरंत उपचार कराएं।
आपदा और आपातकालीन प्रबंधन : बिजली कड़कने, जलभराव अथवा बाढ़ की स्थिति में पशुओं को सुरक्षित स्थान पर ले जाएं। पशुओं की पहचान और स्वास्थ्य रिकॉर्ड सुरक्षित रखें।
आर्थिक लाभ : उचित प्रबंधन से रोग कम होते हैं, उपचार खर्च घटता है। दूध उत्पादन बेहतर रहता है और पशुपालक की आय में वृद्धि होती है।
डॉ अनिल कुमार लिम्बा, वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी, गुढ़ा भगवानदास-नागौर