मक्का में फॉल आर्मी वर्म का कहर, 75 फीसदी तक नुकसान संभव

नई दिल्ली 28-Jul-2026 12:07 PM

मक्का में फॉल आर्मी वर्म का कहर, 75 फीसदी तक नुकसान संभव

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। मेवाड़ संभाग के जनजातिय किसानों के निवाले पर फॉल आर्मी वर्म का अटैक शुरू हो गया है। राजसमंद जिले में कीट का प्रकोप सामने आने के बाद कृषि विभाग और कृषि वैज्ञानिक हरकत में आए है। कृषि वैज्ञानिक कीट निगरानी के लिए किसानों के खेतों का अवलोकन कर रहे है। साथ ही, कीट नियंत्रण के उपाय किसानों को बता रहे है। बता दें कि फॉल आर्मी वर्म बहुभक्षी कीट है। कृषि विज्ञान केन्द्र, प्रतापगढ़ के पौध संरक्षण वैज्ञानिक डॉ. बीएल रोत कहना है कि खरीफ में कीट प्रकोप की आंशका तो थी। लेकिन, छोटी अवस्था से ही कीट का प्रकोप होना चिंताजनक है। क्योंकि, पौधे की बढ़वार ही नहीं होगी तो उत्पादन मिलना दूर की कौढ़ी हैं। हालांकि, कृषि वैज्ञानिक कीट प्रकोप को ईटीएल से नीचे बता रहे है। फिर, भी किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। 

75 फीसदी तक गिरावट

इस कीट की नवजात सुण्डी मक्का के पौधे के तने में छेद करके अन्दर घुस जाती है, जैसे-जैसे पौधा बड़ा होता जाता है, पत्तियों पर एक पंक्ति में कुछ छेद दिखाई देते है, जो की इसके शुरूआती लक्षण है। जैसे-जैसे सूण्डी बड़ी होती जाती है, पौधे के अन्दर के भाग को खाती रहती है। जिससे पतियॉ कटी-फटी दिखाई देती है। जिस जगह सुण्डी खाती है। उस जगह बहुत सारी विष्ठा एकत्रित हो जाती है, जो इस कीट से ग्रसित पौधों की पहचान का लक्षण है। खेत में सुण्डियों की संख्या बढ़ जाने पर यह मक्का के भुट्टो में भी छेद कर दानों को खाती है। अधिक आक्रमण के कारण पौधा छोटा रह जाता है, जिससे मक्का के उत्पादन में लगभग 15 से 75 प्रतिशत कमी हो जाती है। 

क्या है फॉल आर्मी वर्म

यहां पहुंचे वैज्ञानिकों का कहना है कि यह कीट बहु फसल भक्षी कीट है। इसकी समय पर पहचान एवं प्रभावी निंयत्रण जरूरी हैं अन्यथा आने वाले समय में फसलोंं की भारी तबाही संभव है। वैज्ञानिकों के अनुसार प्रतापगढ़, राजसमंद, भीलवाड़ा, बांसवाड़ा, उदयपुर और चित्तौडग़ढ़ में किसानों के खेतों पर इस कीट का प्रकोप दर्ज होना शुरू हो गया है। 

ऐसे करें नियंत्रण

डॉ. रोत ने इस कीट के नियंत्रण के लिए ईमामेक्टीन बेन्जोएट 5 एस जी 0.4 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल करके छिडक़ाव करने की सलाह किसानों को दी है। इसके अलावा स्पिनोसेड़ 45 ईसी 175 0.3 मिली प्रति लीटर पानी अथवा क्लोरएंट्रानिलीप्रोल 18.5 एसी 0.4 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव कर सकते है। वैज्ञानिकों ने इसके मौथ नियंत्रण के लिए खेतों में प्रकाशपाश लगाने की सलाह दी है। बता दें कि इसके मौथ एक रात में 100 किलोमीटर तक की दूरी तय कर संक्रमण फैलाते है। इसकों रोक ने के लिए खेत की मेड पर नेपियर घास की रोपाई करें। 


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