बेमौसम बारिश से फसलें चौपट, सरसों पर कीट प्रकोप से किसान चिंतित

नई दिल्ली 07-Nov-2025 12:03 PM

बेमौसम बारिश से फसलें चौपट, सरसों पर कीट प्रकोप से किसान चिंतित

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। प्रदेश के अधिकांश जिलों में मोंथा चक्रवात का असर देखने को मिला है। हाड़ौती और उदयपुर संभाग में तीन दिन लगातार चली बारिश से खेतों में कटी पड़ी धान की फसल खराब हो गई। वहीं, खेत दरिया बन जाने से किसानों का लहसुन बीज खराब हो गया। हालांकि, अगेती सरसों और चना की फसल को इस बारिश से फायदा मिला है। लेकिन, इस फायदे से ज्यादा किसानों को नुकसान हुआ है। किसानों का कहना है कि पहले ही अतिवृष्टि के कारण धान फसल की गुणवत्ता कमजोर थी। अब बालियां भिग गई है। ऐसे में धान को बाली से चावल का निकलना भी मुश्किल हो चला है। गौरतलब है कि इस बेमौसमी बारिश से किसानों को चारा फसल का भी नुकसान हुआ है। ऐसे में आगामी दिनों में चारे के दाम में बढौत्तरी होने का अनुमान है। गौरतलब है कि किसानों की बाजरा, उड़द, मूंग, सोयाबीन, तिल, मक्का की फसल पहले अतिवृष्टि की भेंट चढ़ चुकी थी। अब फसल कटाई के समय हो रही बेमौसमी बरसात से किसानों की गाढ़ी कमाई पानी के साथ बहती नजर आ रही है। खेतों कीं हकाई, जुताई, भूमि और बीजोपचार दवा पर भी हजारों रुपए की राशि किसानों की खर्च हुई। ऐसे में अब दाना सहेजना किसानों के लिए भारी पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि खेतों में भरे पानी से लागत निकलना भी मुश्किल नजर आ रहा है। उधर, सरसों की फसल पर चितकबरी कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। इस बार प्रदेश में सर्दी की जल्दी दस्तक और बंपर बारिश से हवा में घुली नमी से कीट सक्रिय हो रहा है। खेतों में फसल की बढ़वार के साथ ही इस कीट की संख्या तेजी से बढऩे लगी है, जिससे पौधों की पत्तियों और फली पर असर दिखाई देने लगा है। क्षेत्र में सरसों की फसलों पर कीटों का खतरा मंडराने से किसानों की चिंता बढऩे लगी है।


सरसों में चितकबरा कीट
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार चितकबरी कीट सरसों की पत्तियों, कोमल शाखाओं और फूलों से रस चूसता है। इसके कारण पौधे की वृद्धि रुक जाती है और फली बनना प्रभावित होता है। अधिक प्रकोप की स्थिति में फसल की पैदावार पर सीधा असर पड़ता है। हाल के दिनों में तापमान में गिरावट और सुबह-शाम की नमी ने इस कीट के प्रसार के लिए अनुकूल माहौल बना दिया है।


यह करें किसान
खड़ी फसल में कीट लग नियंत्रण के लिए किसान मैलाथियान 5 डीपी अथवा क्यूनालफॉस 1.5 डीपी अथवा फेनवेलरेट 0.4 डीपी में से किसी भी एक दवा को 25 किलो प्रति हैक्टयर अथवा 5 किलो प्रति बीघा की दर से भुरकाव करें। 


चने में गलन रोग
कृषि विभाग के अजमेर केंद्र द्वारा किसानों को चने की फसल में होने वाले विभिन्न रोगों से बचाव के लिए उपाय बताए गए हैं। केंद्र के कृषि अधिकारी पुष्पेन्द्र सिंह ने बताया कि चने की फसल में मृदा तथा बीज जनित रोग जैसे की जड गलन, सुखा जड गलन और उकठा रोग का प्रकोप होता है। उन्होंने बताया कि भूमि उपचार के लिए बुवाई से पहले 2.5 किलो ट्राईकोडर्मा को 100 किलो गोबर की खाद में अच्छी तरह मिलाकर 10-15 दिन तक छाया में रखें। इस मिश्रण को बुवाई के समय प्रति हैक्टयर की दर से पलेवा करते समय मिट्टी में मिला दें। जड गलन, सूखा जड़ गलन और उकठा रोगों की रोकथाम के लिए कार्बेन्डाजिम एक ग्राम अथवा थाईरम ढाई ग्राम अथवा 2 ग्राम कार्बोक्सीन 37.5 प्रतिशत अथवा ट्राईकोडर्मा 10 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित कर बुवाई करें।


अभी बिगड़ा रहेगा मौसम
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि आज से एक और नया पश्चिमी विक्षोभ पुन: सक्रिय होने जा रहा है। इस विक्षोभ के सक्रिय होने के कारण पश्चिमी और पूर्वी दोनों भागों में मौसम एक बार फिर करवट लेगा। इस नए विक्षोभ के प्रभाव से राज्य के पश्चिमी और पूर्वी हिस्सों में मेघगर्जन, गरज.चमक के साथ हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश होने की संभावना है। किसानों और आम जनता को इस संभावित मौसम परिवर्तन के लिए तैयार रहने की सलाह दी गई है।


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