अफसरों के दावे, किसानों के सवाल.. क्या है यूरिया-डीएपी मामला?
(सभी तस्वीरें- हलधर)राजस्थान में रबी फसलों की बुवाई के बाद अब बिजाई की शुरुआत हो चुकी है, लेकिन किसान परेशान हैं। प्रदेश में अफसर दावा कर रहे हैं कि किसानों के लिए खाद (उर्वरक) की उपलब्धता पर्याप्त मात्रा में हैं। लेकिन हकीकत इसके उलट ही नज़र आ रही है। राज्य के कई जिलों में किसानों को फसलों में बिजाई के लिए मांग के अनुसार खाद नहीं मिल पा रहा है। हनुमानगढ़ जिले के किसानों का कहना है कि जिला मुख्यालय के अलावा अन्य तहसीलों में मांग के अनुसार, डीएपी नहीं मिलने से वह परेशान हो रहे हैं। जिले के भादरा, रावतसर, संगरिया सहित अन्य तहसीलों में खाद की कमी है। उनका कहना है कि कृषि विभाग के पास डीएपी व यूरिया का पर्याप्त स्टॉक बताया जा रहा है। लेकिन हकीकत में किसानों को एक आधार कार्ड पर दो से पांच थैले खाद ही दिए जा रहे हैं। कहीं-कहीं तो किसानों को बेरंग लौटना पड़ रहा है। किसानों का सवाल है कि जब प्रदेश में खाद का पर्याप्त स्टॉक है तो फिर एक आधार कार्ड पर दो-तीन थैले की बाध्यता क्यों की जा रही है? विभाग अपने दावों के सामने फेल होता नज़र आ रहा है।
डीएपी के लिए परेशान हो रहे हैं किसान
इधर, रावतसर के किसानों का कहना है कि क्षेत्र के किसानों को डीएपी-यूरिया की किल्लत के कारण भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। किसान सुबह से डीएपी-यूरिया के लिए लाइन में लगकर घंटों इंतजार करते हैं, और इसके बाद मात्र दो बैग खाद मिल रहा है। वहीं कई किसानों को तो खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। क्रय-विक्रय सहकारी समिति के अध्यक्ष भगाराम बेनीवाल का कहना है कि डीएपी के लिए डिमांड तो कई गुना की जाती है, लेकिन डीएपी काफी कम मात्रा में भेजी जाती है। इस वजह से किसान डीएपी के लिए भटकते रहते हैं। इफको द्वारा दुकानदारों को डीलर बना दिया गया है, लेकिन किसान दुकानदारों के पास मिलने वाली डीएपी पर भरोसा नहीं करते हैं।
वहीं, भारतीय किसान संघ के तहसील अध्यक्ष जयवीर गोदारा ने बताया कि अगर सरकार किसानों को राहत देना चाहती है तो, जो पूर्ति बिजाई के समय या उसके बाद में की जाती है, वह पहले ही कर देनी चाहिए। इससे किसानों को बिजाई के समय बाजार में डीएपी-यूरिया के लिए घंटों लाइन में लगकर अपना समय बर्बाद नहीं करना पड़ेगा। उनका कहना है कि वर्तमान में स्थिति यह है कि क्षेत्र में किसानों ने सरसों की बिजाई तो कर दी है, परंतु कई क्षेत्रों में गेहूं की बिजाई अभी बाकी है। इसलिए लिए किसान डीएपी खाद की जरूरत के लिए चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें डीएपी नहीं मिल पा रहा है।
डीएपी व यूरिया का पर्याप्त स्टॉक: अधिकारी
कृषि विभाग हनुमानगढ़ के संयुक्त निदेशक प्रमोद यादव का कहना है कि वर्तमान में डीएपी व यूरिया का पर्याप्त स्टॉक है। जिन किसानों को खाद नहीं मिल रही है, वह तत्काल कृषि विभाग को शिकायत कर सकते हैं। उन्होंने कहा, 'सभी किसानों को जरूरत के हिसाब से खाद उपलब्ध हो, इसके लिए विभाग स्तर पर आधार कार्ड से खाद वितरित करवा रहे हैं। अभी लगातार खाद के रैक पहुंच रहे हैं। पांच-सात दिन बाद जिले में डिमांड से अधिक का स्टॉक हो जाएगा।'
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