ककड़ी की फसल में डाउनी मिल्ड्यू का खतरा, किसान समय पर करें नियंत्रण
(सभी तस्वीरें- हलधर)ककड़ी की फसल में इन दिनों डाउनी मिल्ड्यू रोग का प्रकोप किसानों के लिए बड़ी चिंता बन सकता है। यह एक फफूंद जनित रोग है, जो अधिक नमी और लगातार सिंचाई वाले वातावरण में तेजी से फैलता है। समय पर इसकी पहचान और नियंत्रण नहीं करने पर फसल की पैदावार पर गंभीर असर पड़ सकता है।
रोग के लक्षण कैसे पहचानें
किसान भाई इस रोग को कुछ प्रमुख लक्षणों से पहचान सकते हैं। संक्रमित पौधों की पत्तियों की निचली सतह पर सुबह के समय फफूंद की परत दिखाई देती है। वहीं पत्तियों की ऊपरी सतह पर पीले रंग के धब्बे बन जाते हैं। जैसे-जैसे रोग बढ़ता है, पत्तियों पर धब्बों की संख्या बढ़ने लगती है और अंततः पत्तियां सूखकर गिरने लगती हैं। इससे पौधों की वृद्धि रुक जाती है और उपज में भारी कमी आ सकती है।
किसान ऐसे करें प्रभावी नियंत्रण
डाउनी मिल्ड्यू रोग से बचाव के लिए किसानों को खेत में जल निकासी की उचित व्यवस्था रखनी चाहिए और अनावश्यक अधिक सिंचाई से बचना चाहिए। रोग दिखाई देने पर मैन्कोजेब 0.2 प्रतिशत (लगभग 2 ग्राम प्रति लीटर पानी) की दर से घोल बनाकर फसल पर छिड़काव करना चाहिए। आवश्यकता होने पर 15 दिन बाद पुनः छिड़काव किया जा सकता है। समय पर सही उपाय अपनाकर किसान अपनी ककड़ी की फसल को इस रोग से बचा सकते हैं और बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
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