बुवाई से पहले करें बीज उपचार, बढ़ेगी फसल की पैदावार
(सभी तस्वीरें- हलधर)मूंगफली
मूंगफली में गलकट (कॉलर रॉट) रोग से बचाव के लिए बुवाई से पहले प्रति किलो बीज की 3 ग्राम थाईरम 75 प्रतिशत डब्ल्यू पी अथवा 2 ग्राम मेनकोजेब से उपचारित करें। अथवा
कॉबक्सीन 37.5 प्रतिशत + थाईरम 37.5 प्रतिशत डब्ल्यू पी 3 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से बीज को उपचारित करके बुवाई करें।
रासायनिक फंगु दनाशी का कम उपयोग करना हो तो बीज को थाईरम 75 प्रतिशत डब्ल्यू पी (1.5 ग्राम) + ट्राईकोडर्मा (10 ग्राम) + राईजोबियम कल्चर (पैकेट) प्रति किलो ग्राम बीज की दर से उपचारितकर बुवाई करें। साथ ही, बुवाई से पूर्व ट्राईकोडर्मा 2.5 किलो प्रति हैक्टेयर की दर से 500 किलो गोबर की खाद में मिलाकर भूमि में मिलावे।
कलम्प विषाणु रोग: इस रोग से प्रभावित क्षेत्रों को ध्यान में रखते हुए ऐसे प्रभावित क्षेत्रों में बुवाई के समय ब्लाइटोक्स 50 डब्ल्यू.पी. दवा से मृदा मंजन करें (10 किलोग्राम दवा प्रति हैक्टेयर)।
जून की पहली वर्षा के साथ ही बाजरे की बुवाई की जाती है इसलिए बुवाई के समय को ध्यान में रखते हुए उन्नत रोग प्रतिरोधी किस्मों का चयन करें।
बीजोपचार: जोगिया रोग: बीजों को एप्रोन एसडी. 35 दवा 6 ग्राम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करें।
चेप्पा (अरगट): बीजों को 20 प्रतिशत नमक के घोल में डुबोकर हिलायें, तैरते बीजों और स्केलेरोसिया को निथार कर निकाल ले और जला दें। डूबे हुए स्वस्थ बीजों को साफ पानी से धोकर सुखाायें और बाद में थाईरम दवा (3 ग्राम प्रति किलो बीज) से उपचारित करके बोयें।
उन्नत किस्मों का बुवाई के लिए चयन करें।
बीजोपचार: बीजों को 3 ग्राम थाईरम प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करके ही बोयें।
उन्नत किस्में जैसे आरजीसी 197, आरजीसी 986, आरजीसी 936, आरजीसी 1003 दुर्गाजय और दुर्गापुरा सफेद को बुवाई के काम में लेवें।
बीजोपचार: शाकाणु अंगमारी रोग ग्वार की फसल का एक प्रमुख रोग है जिसके शाकाणु बीज जन्य होते हैं। इस रोग का प्रमुख स्रोत है, इसलिए बुवाई से पूर्व बीजों को 250 पीपीएम. एग्रीमाईसीन (4 लीटर पानी में 1 ग्राम दवा) अथवा 100 पीपीएम. स्ट्रेप्टोसाईक्लिन (10 लीटर पानी में 1 ग्राम दवा) के घोल में 5 घंटे भिगोकर उपचारित करें।
बीजों को बुवाई से पूर्व 3 ग्राम थाईरम अथवा 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम 50 प्रतिशत डब्ल्यू पी, बैलिटोन अथवा बैनगार्ड से प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें। मूंग और चंवले में सूखा तना सड़न रोग नियंत्रण के लिये बाविस्टिन (1 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज) दवा से बीजोपचार करें।
मोठ की फसल में शाकाणु पत्ती धब्बा रोग के नियंत्रण हेतु बुवाई से पूर्व स्ट्रेप्टोसाईक्लिन 100 पी.पी.एम. (एक ग्राम दवा दस लीटर पानी में) के घोल में एक घंटे भिगोने के बाद बीज को कैप्टान 75 एसडी. 2 ग्राम प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें।