ICAR ने जारी कीं 4 नई भेड़ नस्लें, 5 तकनीकों को मिली मान्यता
(सभी तस्वीरें- हलधर)पीयूष शर्मा
जयपुर। केन्द्रीय भेड़ और ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर के वैज्ञानिकों ने रिसर्च में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है। यह पहला मौका है, जब किसी संस्थान को एक ही समारोह में 5 तकनीकी विकास के लिए पुरस्कार मिला हो। बता दें कि आईसीएआर स्थापना दिवस के मौके पर अविकानगर की 5 तकनीकियों को विमोचन केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किया है। यह पुरस्कार भेड़ नस्ल अविशान, अविकालीन, भारत मेरिनो, अविहिल्स (गद्दी सिंथेटिक) और कृत्रिम गर्भाधान के लिए सीमन संग्रह के लिए विकसित पोर्टेबल के्रट के लिए मिला है। संस्थान के निदेशक डॉ. अरूण कुमार तोमर ने बताया कि चार भेड़ नस्ल और एक तकनीकी का विमोचन मैदानी परिणाम जांचने के बाद आईसीएआर ने किया है। उन्होंने बताया कि संस्थान के क्षेत्रीय केन्द्र, गडसा कुल्लू द्वारा भेड़ नस्ल अविहिल्स, दक्षिण क्षेत्रीय अनुसंधान केंद्र कोइडाईकनाल-तमिलनाडु की भेड़ नस्ल भारत मेरिनो, अविकानगर की अविशान और अविकालीन को मान्यता प्रदान की गई है। इन सभी नस्लों का विमोचन इनकी विशेषताओं के आधार पर किया गया है। इससे ऊन, कालीन, वस्त्र, कालीन ऊन का उत्पादन बढाने में मदद मिलेगी। वहीं, पोर्टेबल के्रट के जरिए भेड़ और बकरी में कृत्रिम गर्भाधान कार्य में तेजी आयेगी।
पोर्टेबल के्रट
सीमन संग्रह के लिए बनाया गया पोर्टेबल के्रट हल्का, फोल्ड होने वाला और सुरक्षित ढांचा है। इसे आसानी से किसान अथवा पशुपालक के घर तक ले जाया जा सकता है। यह उपकरण भेड़ और बकरियों के लंबे इलाज के दौरान एक जगह खडे रहने में मदद करता है। साथही, यह नर पशुओं के प्राकृतिक व्यवहार में बिना कोई बाधा डाले डमी पशु को सुरक्षित रखता है, जिससे उनके अपने परिचित माहौल में ही बिना किसी तनाव के सीमन संग्रह और ट्रेनिंग आसान हो जाती है। इससे एआई कार्य को मजबूती मिलेगी।
अविहिल्स (गद्दी सिंथेटिक)
इस भेड़ नस्ल का विकास हिमालयी शीतोष्ण क्षेत्र की आवश्यकता को देखते हुए किया गया है। 80 के दशक से वैज्ञानिक नस्ल विकास के प्रयास में जुटे हुए थे। यह नस्ल अपनी उच्च गुणवत्ता की महीन ऊन, बेहतर वृद्धि, उत्कृष्ट प्रजनन क्षमता और पर्वतीय परिस्थितियों के प्रति बेहतर अनुकूलन के लिए जानी जाती है। इस नस्ल के मेमनों का जन्म के समय औसत भार लगभग 3.6 किलोग्राम, 6 माह की आयु में लगभग 22 किलोग्राम और 12 माह में लगभग 27 किलोग्राम होता है। यह प्रतिवर्ष लगभग 2.0 किलोग्राम महीन ऊन (धुलाई के बाद लगभग 1.2 किलोग्राम स्वच्छ ऊन) देती है। इसके औसत फाइबर की मोटाई लगभग 20 माइक्रॉन होती है। इस नस्ल के विकास से कुल्लू शॉल उद्योग को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
भारत मेरिनो
इस नस्ल को 75 प्रतिशत विदेशी मेरिनो (रैबुलेट ओर रुसी मेरिनो) और 25 प्रतिशत भारतीय नस्ल (चोकला, मालपुरा और नाली) के मिश्रण से तैयार किया गया। यह भेड़ बेहतरीन परिधान ऊन और मांस के लिए तैयार की गई है। इसके वयस्क नर- मादा का क्रमश: वजन लगभग 59 और 38 किलोग्राम होता है। सालाना प्रति भेड़ 2.5 किलोग्राम कच्ची ऊन प्राप्त होती है। जिसकी मोटाई 20 माइक्रोमीटर के आसपास है। यह नस्ल कठिन मौसम को सहने और रोग प्रतिरोधकता से भरपूर है।
अविशान
अविशान भेड़ नस्ल पशुपालन क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति बनकर उभरी है। यह नस्ल विशेष रूप से अपनी असाधारण बहुप्रजनन क्षमता (एक से अधिक मेमने देने की क्षमता) के लिए जानी जाती है। यह नस्ल एक बार में दो से तीन मेमनों को जन्म दे रही हैं।
अविकालीन
अविकानगर संस्थान की अविकालीन भेड़ नस्ल तैयार की है। यह नस्ल देशी मालपुरा और अमेरिकी रामबुइलट के समागम से तैयार हुई है। इसमें उच्च गुणवत्ता की कारपेट ऊन देने की क्षमता है।