अरहर भारत में उगाई जाने वाली महत्वपूर्ण दलहनी फसल में से एक है। इसमें प्रोटीन 26 प्रतिशत पाई जाती है। इसमें फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है जो पाचन तंत्र को स्वस्थ रखता है कब्ज को रोकता है। अरहर में आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मैग्नीशियम और जिंक जैसे खनिज तत्व होते हैं जो एनीमिया से बचाते हैं और हड्डियों को मजबूत बनाते हैं। यह सूखा सहिष्णु होने के कारण अर्ध शुष्क क्षेत्र के लिए उपयुक्त है। लेकिन, इस फसल में कीट-रोग उत्पादन गिराने का काम करते हैं। इसलिए समय पर कीट की पहचान और वैज्ञानिक तौर-तरीके से नियंत्रण जरूरी है।
- फली छेदक : फली छेदक को आकर्षित करने के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाएं। प्रकाश प्रपंच का उपयोग करें, जो रात में कीटों को आकर्षित करता है। बेसिलस थुरींजिएंसिस (बीटी), एनएसकेएस 8 प्रतिशत और निम्बेसीडीन जैसे जैविक कीटनाशकों का छिड़काव फूल आने अथवा फली बनने के समय करें। कार्बोरिल 15 डब्ल्यूपी 1.50 लीटर को 700 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हैक्टयर की दर से छिड़काव करें। अथवा ल्युफनुरान 5.4 ईसी 2.5 लीटर को 700 लीटर पानी में मिलाकर प्रति हैक्टयर की दर से छिड़काव करें।
- चित्तीदार फली छेदक : हेलीकोवरपा आर्मिजैरा एनपीवी का छिड़काव 500 लीटर प्रति हैक्टयर की दर से गुड़ के साथ मिलकर करें। अथवा एजाडिरेक्टिन 0.03 प्रतिशत की डब्ल्यू एसपी (300 पीपीएम) 1000 मिली प्रति एकड़ की दर से प्रयोग करना चाहिए।
- फली बग : ट्राइकोग्राम का उपयोग करें, जो फली बग के अंडों को नष्ट करते हैं। इमिडाक्लोप्रीड 17.8 एसएल अथवा एसीटामिप्रीड 20 डब्ल्यूपी जैसे कीटनाशकों का छिड़काव फली बग के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता हैं।
हेमन्त कुमार कुमावत, डॉ. प्रदीप कुमार, आयुष पंवार, कृषि विज्ञान संस्थान, बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी झांसी (उ. प्र.)