पारंपरिक बीजों के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं

नई दिल्ली 11-Sep-2026 02:10 PM

पारंपरिक बीजों के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं

(सभी तस्वीरें- हलधर)

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों को आमनक बीज के कारण होने वाले नुकसान से बचाने के लिए सरकार नया सीड एक्ट लाने जा रही है, जिसकी तैयारी अंतिम चरण में है। नए कानून में अमानक बीज बेचने वालों पर भारी जुर्माने के साथ जेल की सजा का भी प्रावधान होगा। चौहान नए बिल को लेकर किसान नेताओं के साथ राय-मशविरा कर रहे थे। उन्होने कहा कि प्रस्तावित कानून किसानों के मौजूदा अधिकारों पर रोक नहीं लगाएगा। किसान पारंपरिक और किसानों द्वारा विकसित किस्मों के बीजों का इस्तेमाल, लेन-देन और बिक्री करने के लिए आजाद रहेंगे। पारंपरिक बीजों के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी नहीं होगा।

ऐसे समझे किसान की आजादी

उन्होंने कहा कि अगर किसान चाहें तो अपनी मर्जी से अपनी किस्मों का रजिस्ट्रेशन करा सकते हैं।   जो किसान अपने निजी इस्तेमाल, गांव में बांटने अथवा किसी कंपनी के लिए बीज उगा रहा है, उसे इन नियमों के तहत डिजिटल रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी।

30 लाख रुपये तक का जुर्माना

नकली बीज बेचने, बिना रजिस्ट्रेशन के कारोबार करने अथवा जानबूझकर धोखाधड़ी करने जैसे गंभीर अपराधों के मामले में 30 लाख रुपये तक का जुर्माना और जेल हो सकती है। छोटे-मोटे उल्लंघन के मामले में पहली बार चेतावनी देकर छोड़ दिया जाएगा और दूसरी बार उल्लंघन करने पर 50,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाएगा। जानबूझकर किए गए उल्लंघन के लिए जिसमें क्यूआर कोड न लगाना, जरूरी डेटा न देना अथवा गलत ब्रांडिंग जैसे अपराध शामिल हैं, पहली बार अपराध करने पर 1 लाख रुपये और दूसरी बार अपराध करने पर 2 लाख रुपये का जुर्माना होगा।

सुझावों पर होगा अमल

उन्होंने कहा कि किसान संगठनों के सुझावों का विश£ेषण किया जाएंगा। इसके बाद अच्छे सुझाव को सीड बिल के अंतिम मसौदे में शामिल किया जायेगा। उन्होंने कहा कि किसानों को नकली और घटिया बीजों से बचाने के लिए सरकार बीज रेगुलेटरी सिस्टम बनाने की दिशा में एक जरूरी कदम उठा रही है।

बैठक में यह संगठन रहे मौजूद

कृषि मंत्रालय के मुताबिक बैठक में करीब 20 किसान संगठनों ने अपने विचार रखे। इसमें भारतीय किसान संघ, भारतीय किसान यूनियन के अलग-अलग ग्रुप, ऑल इंडिया किसान कोऑर्डिनेशन कमेटी , किसान महापंचायत, भारतीय कृषक समाज, गांव किसान उन्नयन, सोसाइटी फॉर इंडिपेंडेंट फार्मर्स एसोसिएशन, कर्नाटक राज्य रैयत संघ, तेलंगाना रैयत संघम, महाराष्ट्र के शेतकरी संगठन, गुजरात का खेदुत समाज, राजस्थान और बिहार से नेशनल किसान प्रोग्रेसिव एसोसिएशन, तमिलनाडु का विवसायगल संगम, झारखंड का प्रगतिशील कृषि मंच और कोट्टायम, केरल का एक किसान संगठन, वगैरह के प्रतिनिधियों ने कंसल्टेशन में हिस्सा लिया।


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