प्रदेश के वैज्ञानिकों का कमाल, किसानों के लिए बनाया किफ़ायती सौर बूम स्प्रेयर

नई दिल्ली 09-Mar-2026 03:31 PM

प्रदेश के वैज्ञानिकों का कमाल, किसानों के लिए बनाया किफ़ायती सौर बूम स्प्रेयर

(सभी तस्वीरें- हलधर)

पीयूष शर्मा

जयपुर। प्राकृतिक उर्जा को लेकर वैसे तो दुनियाभर में कई आविष्कार हुए है। कई नई तकनीकों का विकास हुआ है। लेकिन, अधिकांश आविष्कार किसान की पहुंच से दूर रहे। क्योंकि, तैयार मशीनो की लागत काफी ज्यादा है। पहली बार किसान की आवश्यकता पर फोकस करते हुए कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के वैज्ञानिकों ने नवीकरणीय ऊर्जा आधारित एक वाहन तैयार किया है। जिसे बूम स्प्रेयर नाम दिया है। कृषि अभियांत्रिकी महाविद्यालय के द्वारा तैयार इस स्प्रेयर की लागत काफी कम है। वहीं, ये वाहन बढ़ती ईंधन कीमतों और पर्यावरण की चिंताओं को भी दूर करने में सहायक है। बड़ी बात यह है कि यह वाहन लघु और सीमांत किसानों की आय बढाने में कारगर साबित होगा। क्योंकि, इस वाहन की लागत मोटर साइकिल से भी कम है। महाविद्यालय के अभियांत्रिकी वैज्ञानिकों का कहना है कि पश्चिमी राजस्थान के साथ-साथ देश के सभी राज्यो के किसानों छोटे किसानों के लिए यह वाहन गेमचेंजर साबित होगा। किसान इस वाहन का उपयोग करके केवल श्रम लागत पर कृषि रसायनों का छिडक़ाव आसानी से एक समान रूप से कर सकेंगे। अभियांत्रिकी महाविद्यालय के डॉ. आशीष पवार ने बताया कि बूम स्प्रेयर वाहन का विकास लघु और सीमांत किसानों की आर्थिक की स्थिति को ध्यान में रखकर किया गया है। उन्होंने बताया कि तरल कृषि रसायनों के छिडक़ाव के लिए अधिकांश किसान पावर चलित स्प्रेयर का उपयोग करते है। वहीं, छोटे किसान हस्तचलित और बैटररी चलित स्प्रेयर का उपयोग करते है। लेकिन, इस प्रकार के स्प्रेयर से रसायन के छिडक़ाव के दौरान किसान की जान पर जोखिम बना रहता है। वहीं, छिडक़ाव की लागत भी ज्यादा आती है। क्योंकि, ईंधन की कीमतें किसी से छिपी नहीं है। साथ ही, रसायन का असमान छिडक़ाव भी किसानों की एक समस्या है और पावर चलित स्प्रेयर के रख-रखाव का खर्च भी ज्यादा है। लेकिन, बूम स्प्रेयर वाहन किसानों की इन सारी चिंताओं को दूर करने वाला है। क्योंकि, वाहन के परीक्षण परिणाम काफी सकारात्मक रहे है। गौरतलब है कि इस बूम स्प्रेयर वाहन को तैयार करने में महज 20 हजार 271 रूपए की लागत आई है। ऐसे में एक मोटर साईकि ल की कीमत मेें चार से पांच स्प्रेयर वाहन खरीदे जा सकते है। बता दें कि सरकार रसायन छिडक़ाव के लिए कृषि ड्रोन को बढ़ावा देने में लगी है। इसके लिए ड्रोन दीदी और ड्रोन पायलट प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाएं जा रहे है। लेकिन, सरकार की इस योजना पर्यावरण और आर्थिक रूप से किसान के अनुकूल नहीं कहा जा सकता। क्योंकि, ड्रोन की खरीद और ऑपरेटिंग छोटे क्या, बड़े किसानों के बूते से बाहर है। 

ऐसे काम करता है स्प्रेयर वाहन

यह स्प्रेयर वाहन प्रत्यक्ष सौर ऊर्जा रूपांतरण सिद्धांत पर कार्य करता है। इसमें दो 50 वॉट के सोलर पैनल श्रृंखला में जोड़े गए हैं, जो लगभग 24 वोल्ट डीसी आउटपुट प्रदान करते हैं। यह ऊर्जा सोलर चार्ज कंट्रोलर से होकर सीधे 24 वोल्ट डीसी डायफ्र ाम पंप मोटर को चलाती है। इस प्रणाली में बैटरी का उपयोग नहीं किया गया है। जिससे इसकी लागत और रखरखाव दोनों कम हो जाते हैं। पर्याप्त धूप में यह प्रणाली निरंतर कार्य करती है। उन्होंने बताया कि सूर्य प्रकाश जैसे ही सोलर पैनलों पर पड़ता है, पैनल डीसी विद्युत उत्पन्न करते हैं। चार्ज कंट्रोलर वोल्टेज को नियंत्रित करता है। 24 वोल्ट डीसी पंप टैंक से द्रव को खींचकर दबाव बनाता है। पाँच नोजल वाले बूम से समान रूप से फ सल पर छिडक़ाव संभव होता है। 

लागत काफी कम

उन्होने बताया कि पूरे प्रोटोटाइप की अनुमानित लागत लगभग 20,271 रही। यह लागत डीजल चालित स्प्रेयर की तुलना में दीर्घकाल में अधिक किफ ायती सिद्ध होती है। क्योंकि, इसमें ईंधन खर्च शून्य है। इस स्प्रेयर का उपयोग गेहूँ, सरसों, मूंगफली जैसी फसलों में किया जा  सकता है। यह वाहन ना केवल किसानों के लिए कि फायती है। बल्कि, ईंधन और प्रदूषण रहित, बैटरी रहित, रसायन जोखिम में कमी, श्रम-समय की बचत, समान और प्रभावी छिडक़ाव के लिए उपयुक्त है।

35 लीटर क्षमता का टैंक

इस वाहन में रसायन भरने के लिए 35 लीटर क्षमता का टैंक दिया हुआ है। डॉ. पवार ने बताया कि वाहन का मैदानी परीक्षण 35-38 डिग्री सेटीग्रेड़ तापमान पर किया गया। परीक्षण के  दौरान सोलर पैनलों से 36-37 वोल्ट आउटपुट प्राप्त हुआ। पंप ने निरंतर 1.5 एलपीएम की दर से छिडक़ाव किया। एक बार में करीब 315 वर्गमीटर क्षेत्र कवर हुआ। वहीं, एक एकड़ क्षेत्र के लिए लगभग 90 मिनट का समय लगा। उन्होंने बताया कि एक एकड़ क्षेत्र में छिडक़ाव के लिए पांच टैंक रसायन की जरूरत पड़ी। वहीं, सभी नोज़लों से समान और नियंत्रित फु हार प्राप्त हुई, जिससे रसायनों की बर्बादी कम हुई।

सीधी धूप और रसायन से बचाव

उन्होंने बताया कि सौर ऊर्जा से चलने वाला बूम स्प्रेयर वाहन में 50-50 वॉट के दो सोलर पैनल लगाएं हुए है। जिनकी वोल्टेज क्षमता  37 वोल्ट है। पैनल ऊपरी फ्रे म पर लगाए इस तरह लगाएं गए है, जो ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ ऑपरेटर को छाया भी प्रदान कर सके। उन्होंने बताया कि  24 वोल्ट डीसी पंप मोटर से 80 पीएसआई कार्य दबाव पैदा होता है। जबकि अधिकतम क्षमता 140 पीएसआई है। यानी एक मिनिट में 1.5 लीटर रसायन घोल का छिडक़ाव पांच नोजल के जरिए संभव है। 1 मिमी व्यास की नोजल 1.8 मीटर चौड़ाई  क्षेत्र में छिडक़ाव संभव है। उन्होंने बताया कि एक बार टैंक में रसायन भरने पर  20-25 मिनिट तक छिडक़ाव किया जा सकता है। वहीं, बूम स्प्रेयर वाहन की मजबूती की बात करें तो इसमें माइल्ड स्टील से निर्मित मजबूत चेसिस दिया गया है। वहीं, चार व्हील वाला हल्का, सुरक्षित संतुलित ढाँचा दिया गया है। इस स्प्रेयर को संकरी खेत की पंक्तियों में आसानी से चलाया जा सकता है। उन्होंने बताया कि ऑपरेटर को छिडक़ाव के दौरान हैंडल साधना है। इससे किसान रसायन की पहुंच से दूर बना रहता है।