हाड़ौती से गायब होता धनिया, खेती घटी, निर्यात पर संकट
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। धनिया की खुशबू के साथ निर्यात में पहचान रखने वाले हाड़ौती क्षेत्र में अब धनिया की खेती हाशिए पर पहुंच चुकी है। भविष्य में भी हालत वर्तमान जैसे ही बने रहे तो हाड़ौती मेें धनिया ढूंढने से नहीं मिलेगा। गौरतलब है कि वर्ष 2012-13 में हाड़ौती संभाग में 1.56 लाख हैक्टयर क्षेत्र में धनिया की बुवाई होती थी। जो वर्ष 2024-25 में घटकर महज 30 हजार हैक्टयर क्षेत्र पर आ टिकी है। ऐसे में धनिया फसल के साथ-साथ निर्यात पर भी संकट के बादल मंडराते नजर आने लगे है।
कागजों में सिमटा एईजेड
हाड़ौती में निर्यात गुणवत्ता के धनिये के उत्पादन के चलते केन्द्र और राज्य सरकार के साझा कार्यक्रम के तहत 2005 में कृषि निर्यात जोन (एईजेड ) बनाया था, लेकिन सरकारी सुस्ती के चलते यह योजना फाइलों में ही सिमट कर रह गई।
कालिया रोग भी एक कारण
धनिया को नाजुक फसल माना जाता है। ज्यादा सर्दी इसको रास नहीं आती और इसके झुलसने का डर रहता है। इस बार औसत से अधिक बरसात से ज्यादा, सर्दी से धनिये के झुलसने के डर से किसानों ने धनिया की बुवाई नहीं की है। वहीं, कालिया रोग भी एक कारण है। किसान इस फसल में इमेजाथापर और मैन्कोजेब का भी जमकर प्रयोग कर रहे है।
