प्रबंधन, पोषण, बाजार, रिसर्च से शुष्क भूमि बनेगी ताकत
(सभी तस्वीरें- हलधर)कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि शुष्क भूमि कोई कमजोरी नहीं हैं। सतत प्रबंधन, पोषण, बाजार और नीतियों पर ध्यान केंद्रित करके शुष्क इलाकों को ताकतवर बनाया जा सकता है। चौहान नई दिल्ली में ड्राईलैंड कांग्रेस-2026 के शुभारंभ सत्र में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि व्यवस्था में बदलाव का मुख्य उद्देश्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि किसानों की आय, आजीविका और समृद्धि में सुधार होना चाहिए। बता दें कि इस सम्मेलन काउद्देश्य शुष्क भूमि पर खेती करने वाले समुदायों के लिए आजीविका का बेहतर अवसर उत्पन्न करने के साथ-साथ, फसलों की सहन-क्षमता को मजबूत करना, शुष्क भूमि वाले इलाकों का सतत प्रबंधन, पोषण, बाज़ार और नीतियों पर ध्यान केंद्रित करना है। ड्राईलैंड कांग्रेस में 25 से अधिक देशों के 800 से ज्यादा प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।
उत्पादन बढ़ाना सफलता नहीं
चौहान ने कहा कि सफलता का एकमात्र पैमाना सिर्फउत्पादन बढ़ाना नहीं होना चाहिए । बल्कि, किसान समुदायों की बेहतर आजीविका और समृद्धि भी होनी चाहिए। उन्होने किसानों की आजीविका को बेहतर बनाने के लिए विज्ञान, नीति और बाजार समर्थन के लिए एक समग्र दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
कृषि में बदलाव का रास्ता
सम्मेलन को आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एमएल जाट ने भी सम्बोधित किया। उन्होंने कहा, सुझावों से अमल तक, अलग-अलग हिस्सों से पूरी प्रणाली तक, यही शुष्क इलाकों की खेती में बदलाव लाने का रास्ता है। वहीं, भूमि संसाधन विभाग के सचिव नरेंद्र भूषण ने शुष्क भूमि क्षेत्रों में भूमि और संसाधन प्रबंधन को मजबूत करने करने पर जोर दिया। इक्रीसेट के महानिदेशक डॉ. डॉ हिमांशु पाठक कृषि विकास में शुष्क क्षेत्रों को केंद्र में रखने की आवश्यकता पर भी बल दिया। जबकि, डॉ. आरएस परोदा ने हर बूंद पानी से अधिक आर्थिक और पोषण संबंधी मूल्य सुनिश्चित करने की बात की। डॉ. पंजाब सिंह ने लाभदायक, लचीली, पर्यावरण अनुकूल और आगामी पीढ़ी के लिए कृषि को आकर्षक बनाने , डॉ त्रिलोचन मोहापात्रा ने शुष्क मिट्टी वाले क्षेत्रों में सफल मॉडलों को साझा करने की आवश्यकता जताई। सम्मेलन में इक्रीसेट मिस कैथी रीड,पूर्व महानिदेशक, डॉ. विलियम डी. डार और सीजीआईएआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. सैंड्रा मीलाच ने भी शुष्क भूमि को लेकर अपने विचार रखे।
आईसीआरआईएसएटी जर्नी का भी विमोचन
सम्मेलन के दौरान ट्रांसफॉर्मिंग द ड्राईलैंड्स: द आईसीआरआईएसएटी जर्नी का भी विमोचन किया गया। इसका संपादन डॉ. हिमांशु पाठक और डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड ने किया है और इसका प्रकाशन आईसीआरआईएसएटी ने किया है। यह प्रकाशन एशिया, अफ्रीका और अन्य क्षेत्रों में विज्ञान, नवाचार, साझेदारियों एवं प्रभाव के क्षेत्र में आईसीआरआईएसएटी के पांच दशकों से अधिक के कार्य का दस्तावेज़ प्रस्तुत करता है। इस मौके पर ड्राईलैंड कांग्रेस 2026 की सार-पुस्तिका और आईसीआरआईएसएटी रिसर्च एंड कॉर्पोरेट प्रोफ़ाइल भी लॉन्च की गईं।