किन्नू की गलत दूरी से घट रही पैदावार वैज्ञानिकों ने किया बड़ा खुलासा
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। प्रदेश के श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिले में किन्नू की खेती जिम्मेदारों के अधूरे ज्ञान की वजह से कम उपज दें रही है। यह बात हम नहीं, कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक कह रहे है। किन्नू बगीचा स्थापना पर पंजाब और हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के द्वारा किए गए शोध में यह बात सामने आई है। वैज्ञानिको का मानना है कि राजस्थान मेें बगीचा स्थापना के दौरान पौधे से पौधें की दूरी कम है। इसके कारण पौधें को फलने-फूलने का अवसर नहीं मिलता है। इससे किसान को कठिनाई के साथ-साथ उत्पादन मेें भी गिरावट आती है। वैज्ञानिक रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे 5 साल तो अच्छी उपज किसान को मिलती है। बाद में गिरावट आना शुरू हो जाता है। गौरतलब है कि श्रीगंगानगर जिले में 12 हजार से अधिक हैक्टयर क्षेत्र किन्नू के बाग है। इसके अलावा नींबू, माल्टा-मौसमी, अमरूद, अनार, आवंला, बेर, खजूर की खेती होती है।
यह रखें दूरी
विश्वविद्यालय ने अपनी रिपोर्ट में पौधें से पौधें की दूरी 20 गुना 20 फीट रखने की सिफारिश की है। जबकि, प्रदेश में 20 गुना 14, 20 गुना 18, 18 गुना 18 और 19 गुना 16 फीट की दूरी पौधों के मध्य रखी जा रही है।
तो 30 साल तक उत्पादन
विश्वविद्यालय की रिपोर्ट को लेकर कृषि विज्ञान नवाचार संस्थान, हनुमानगढ़ के अध्यक्ष जयनारायण बेनीवाल ने बताया कि 20 गुना 20 फिट पर किन्नू बगीचे की स्थापना से किसान 30 साल तक उपज प्राप्त कर सकता है। उन्होंने बताया कि 8 साल तक पौधा छोटा रहता है। लेकिन, इसके बाद लगातार पौधें का आकार बढ़ता रहता है। इससे प्रति बीघा औसत उत्पादन कम होता जाता है।