खेत से बाजार तक श्रृंखला को मिलेगी मजबूती 

नई दिल्ली 09-Sep-2026 06:00 PM

खेत से बाजार तक श्रृंखला को मिलेगी मजबूती 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने कहा कि क़ृषि क्लस्टर्स को केवल उत्पादन और प्रसंस्करण तक सीमित न रखते हुए खेत से बाजार तक मूल्य श्रृंखला को मजबूत किया जाए। इसके लिए छंटाई एवं श्रेणीकरण, पैकेजिंग, शीत भंडारण, प्रसंस्करण, परिवहन एवं आपूर्ति व्यवस्था, ब्रांड निर्माण और बाजार से जुड़ाव की सुविधाएं विकसित की जाएं, जिससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान में कमी आए और किसानों को बेहतर बाजार और बेहतर मूल्य मिल सके! वे एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स की पहली बैठक में बोल रहे थे! उन्होंने क्लस्टर्स फसल की क्षेत्रवार विस्तृत मैपिंग कर उनकी आर्थिक, निवेश और निर्यात संभावनाओं को चिन्हित करने को लेकर ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए! उन्होंने ने नाबार्ड को प्रस्तावित क्लस्टर्स की आर्थिक संभावनाओं की एफपीओ मैपिंग करने और संबंधित विभागों को आगामी समीक्षा में क्लस्टरवार विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। बैठक में अतिरिक्त मुख्य सचिव, उद्योग शिखर अग्रवाल ने निर्यात योग्य कृषि उत्पादों और उनके संभावित बाजारों को चिन्हित करने और एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स को फूड पार्कों के साथ राज्य की औद्योगिक और निवेश प्रोत्साहन नीतियों से जोड़ने पर जोर दिया!

39 फूड पार्क प्रस्तावित बैठक में 

प्रमुख शासन सचिव, कृषि मंजू राजपाल ने बताया कि राजस्थान फूड पार्क डेवलपमेंट पॉलिसी-2026 के तहत प्रदेश में 39 फूड पार्क प्रस्तावित हैं, जिनमें 35 स्थानों पर भूमि आवंटित की जा चुकी है। वर्तमान में प्रदेश में 2 मेगा फूड पार्क, 4 एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स और 6 आरआईआईसीओ/स्पाइस पार्क सहित कृषि प्रसंस्करण से जुड़ा आधारभूत ढांचा उपलब्ध है। इसके साथ ही 1,500 से अधिक एग्रो-प्रोसेसिंग इकाइयां और प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना के तहत समर्थित 1,850 से अधिक सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयां हैं।

10 एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स

उन्होंने बताया कि मूंग, सरसों, सोयाबीन, किन्नू, अनार, अमरूद, संतरा, इसबगोल, जीरा और लहसुन पर आधारित 10 एग्रो-प्रोसेसिंग क्लस्टर्स विकसित करने की दिशा में कार्य किया जा रहा है। इनके लिए प्रमुख उत्पादन क्षेत्रों की फसल एवं जिलेवार मैपिंग की गई है, ताकि उत्पादन वाले क्षेत्रों को प्रसंस्करण सुविधाओं और बाजार से प्रभावी रूप से जोड़ा जा सके।

7 कलस्टर्स एनएचबी के 

उद्यानिकी आयुक्त श्वेता चौहान ने बताया कि प्रस्तावित 10 क्लस्टर्स में से 7 राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के क्लस्टर विकास कार्यक्रम (सीडीपी 2.0) के तहत पात्र हैं। इनमें अमरूद, अनार और जीरा के तीन क्लस्टर्स के प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा चुके हैं, जबकि इसबगोल, किन्नू, लहसुन और संतरा के चार क्लस्टर्स को आगामी चरण में प्रस्तावित किया जाना है। सरसों, सोयाबीन एवं मूंग के क्लस्टर्स को फूड पार्क, निवेश समझौतों एवं राज्य सरकार की योजनाओं के माध्यम से आगे बढ़ाने पर कार्य किया जा रहा है।

बैठक में यह रहे मौजूद 

बैठक में खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, भारत सरकार, उद्योग एवं वाणिज्य, वित्त, कृषि एवं उद्यानिकी विभाग, राजस्थान राज्य कृषि विपणन बोर्ड, राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, नाबार्ड, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के विभिन्न संस्थानों, चौधरी चरण सिंह राष्ट्रीय कृषि विपणन संस्थान तथा प्रदेश के कृषि विश्वविद्यालयों के अधिकारियों एवं विशेषज्ञों , कृषि  प्रसंस्करण  से  जुड़े निवेशक एवं प्रगतिशील कृषकों  ने भाग लिया।


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