पाली में पोषण वाटिका से बदली किसानों की जिंदगी, बढ़ा पोषण और मुनाफा
(सभी तस्वीरें- हलधर)पाली जिला राजस्थान के शुष्क-अर्द्धशुष्क भौगोलिक क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इस क्षेत्र की जलवायु परिस्थितियां अत्यंत कठोर हैं, जहां वर्षा की अनिश्चितता, अत्यधिक तापमान, तीव्र हवाएं और सिंचाई जल की भारी कमी बनी रहती है। ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण क्षेत्र में ताजी हरी सब्जियों का नियमित उत्पादन और उपलब्धता एक बड़ी चुनौती रही है। परिणामस्वरूप, पाली जिले के ग्रामीण, छोटे-सीमांत किसान और भूमिहीन मजदूर परिवार पारंपरिक रूप से मुख्य रूप से सूखी सब्जियों (जैसे काचरी सांगरी केर, कुमटिया और सूखी मिर्च आदि) और बाजार से आने वाली महंगी सब्जियों पर ही आश्रित रहते थे। ताजी सब्जियों के दैनिक सेवन का अभाव होने के कारण विशेषकर महिलाओं, गर्भवती माताओं, किशोरी बालिकाओं और छोटे बच्चों में सूक्ष्म पोषक तत्वों (जैसे आयरन, विटामिन ए, बीटा कैरोटीन और कैल्शियम) की गंभीर कमी देखी जाती थी। जिससे एनीमिया और कुपोषण की समस्या आम बात थी। इसके अतिरिक्त, बाजार से महंगी सब्जियां खरीदने के कारण गरीब परिवारों का दैनिक वित्तीय बजट भी प्रभावित होता था। इस स्वास्थ्य और आर्थिक समस्या के स्थाई वैज्ञानिक समाधान के लिए कृषि विज्ञान केंद्र, पाली के डॉ. धीरज सिंह, डॉ. चन्दन कुमार और डॉ. ऐश्वर्या डूडी ने 5 गांवों (डेंडा, वाला, बोमाड़ा, कूरना और गुड़ाई) के 800 घरों में घर-घर पोषण वाटिका मॉडल की शुरुआत की।
तकनीकी सहायता और ठोस रणनीति
संस्थान द्वारा केवल बीज वितरण तक सीमित न रहकर ग्रामीणों का सर्वांगीण क्षमता निर्माण किया गया:
सामग्री/इनपुट वितरण: उच्च गुणवत्ता वाले सब्जी बीज किट, पौधा सामग्री और बहुवर्षीय पौधे जैसे सहजन का वितरण।
जैविक-सतत खेती प्रशिक्षण: जैविक खाद, वर्मीकंपोस्ट, मटका खाद, नीम आधारित प्राकृतिक कीटनाशक निर्माण और संतुलित फसल चक्र का व्यावहारिक प्रशिक्षण।
महिला सशक्तिकरण: महिला स्वयं सहायता समूहों का गठन कर निर्णय प्रक्रिया, पोषण जागरूकता और वाटिका प्रबंधन में अग्रणी भूमिका सुनिश्चित की गई।
नियमित तकनीकी मार्गदर्शन: केवीके विशेषज्ञों द्वारा समय-समय पर गांवों का भ्रमण, पौधों की सुरक्षा और वैज्ञानिक सलाह प्रदान की गई।
वाटिका विविधता और फसलें
पोषण के साथ आमदनी
पोषण वाटिका अपनाने से पूर्व वसंत देवी-बोमाड़ा को बाजार से महंगी सब्जी खरीदने में कठिनाई होती थी। केवीके के मार्गदर्शन से 100 वर्ग मीटर क्षेत्र में वाटिका स्थापित करने के पश्चात न केवल उनके परिवार को वर्षभर ताजा और पौष्टिक सब्जियां प्राप्त हो रही हैं।
पोषण और स्वास्थ्य स्तर पर प्रभाव (प्रति व्यक्ति / दैनिक दर्ज परिवर्तन)
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पोषक तत्व |
वाटिका से पूर्व |
वाटिका के बाद |
आरडीए मानक |
कुल वृद्धि |
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दैनिक सब्जी सेवन |
75 ग्राम |
275 ग्राम |
300 ग्राम |
+266.6 प्रतिशत |
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प्रोटीन |
3.42 ग्राम |
5.78 ग्राम |
संतुलित आहार पूरक |
+69.0 प्रतिशत |
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आयरन |
1.78 मिग्रा |
11.75 मिग्रा |
एनीमिया से सुरक्षा |
+560.1 प्रतिशत |
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बीटा कैरोटीन |
2302.7 µg |
4046.2 µg |
नेत्र व त्वचा स्वास्थ्य |
+75.7 प्रतिशत |
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विटामिन सी |
92.6 मिग्रा |
150.2 मिग्रा |
रोग प्रतिरोधक क्षमता |
+62.2 प्रतिशत |
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कैल्शियम |
20.6 मिग्रा |
316.3 मिग्रा |
अस्थि मजबूती |
+162.2 प्रतिशत |
आर्थिक प्रभाव (प्रति वर्ष)
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आर्थिक प्रभाव |
प्रति परिवार औसत |
760 परिवारों का कुल वार्षिक प्रभाव |
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बाजार से सब्जी खरीद की बचत |
8,500 |
64,60,000 (64.60 लाख) |
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अतिरिक्त सब्जी-फल बिक्री से आय |
14,000 |
1,06,40,000 (1.06 करोड़) |
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कुल शुद्ध आर्थिक लाभ |
22,500 |
1,71,00,000 (1.71 करोड़) |
बचत के अतिरिक्त उत्पन्न बेचकर प्रतिवर्ष लगभग 18,000 की आय भी अर्जित कर रही हैं। इस पहल से प्रेरणा लेकर 42 गांवों में 8600 पोषण वाटिका स्थापित हो चुकी हैं, जो कि केवल सब्जी उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि यह शुष्क क्षेत्रों में पोषण सुरक्षा, स्वास्थ्य सुधार, महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भर समृद्ध गांव के निर्माण की दिशा में एक अत्यंत प्रभावी मॉडल सिद्ध हो रहा है।
डॉ धीरज सिंह, डॉ चन्दन कुमार, डॉ ऐश्वर्या डूडी, कृषि विज्ञान केंद्र, काजरी-पाली