भारत का 'ऑयल हब' बन सकता है राजस्थान
(सभी तस्वीरें- हलधर)प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से खाने के इस्तेमाल कम से कम करने की अपील की है। जिसकी सबसे बड़ी वजह है कि भारत पेट्रोल-डीजल के बाद सबसे ज्यादा विदेशी मुद्रा खाने के तेल खरीदने में खर्च करता है। बता दें कि, देश में हर साल करीब 250 लाख टन खाने का तेल इस्तेमाल होता है, लेकिन इसमें से लगभर 60 प्रतिशत तेल विदेशों में खरीदना पड़ता है। जिसके लिए भारत को लगभग हर साल करीब 18.3 अरब डॉलर यानी 1.61 लाख करोड़ रुपए खर्च करने पड़ते हैं।
बनें आत्मनिर्भर
एक्सपर्ट्स का मानना है कि जैसे हरित क्रांति ने भारत को अनाज के मामले में आत्मनिर्भर बनाया था, वैसे ही अब तिलहन क्रांति की जरूरत है, ताकि देश खाद्य तेल के मामले में आत्मनिर्भर बन सके और राजस्थान इस दिशा में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
तिलहन क्रांति की जरूरत
राजस्थान अभी अपनी जरूरत से लगभग दोगुना खाने का तेल पैदा कर रहा है। अगर किसानों को बेहतर नीतियां, उचित दाम और आधुनिक तकनीक मिले तो राजस्थान पूरे देश के लिए प्रेरणा बन सकता है। प्रयास किए जाएं तो भारत में खाने के तेलों की खपत और उत्पादन के अंतर को
भरा जा सकता है। अब देश को तिलहन क्रांति की जरूरत है।