कम पानी वाली किस्मो का करे चयन
(सभी तस्वीरें- हलधर)श्रीगंगानगर! क़ृषि विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ सतीश शर्मा ने कहा की वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए किसान कम पानी में तैयार होने वाली फसलों का चयन करें! इस वर्ष मानसूनी वर्षा औसत से कम रही है तथा इसका प्रभाव दिसंबर 2026 तक रहने का अनुमान है। इसके चलते शीत ऋतु में मावठ से होने वाली वर्षा की संभावनाएं भी कम रहने की आशंका है। ऐसी स्थिति में आगामी समय में नहरों में पानी की कम आवक की संभावना को देखते हुए किसानों द्वारा फसल चयन और सिंचाई जल प्रबंधन में विशेष सावधानी बरतना आवश्यक है। वे विभागीय बैठक में बोल रहे थे! बैठक में जिले के क़ृषि अधिकारियो ने भाग लिया!
जौ - सरसों किसानों के लिए लाभकारी
डॉ. शर्मा ने बताया कि विभागीय तुलनात्मक आर्थिक आंकड़ों के अनुसार जौ में लगभग 3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है तथा इसकी औसत उत्पादकता 5,261 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर है। इसकी अनुमानित लागत 45,881 रुपये प्रति हेक्टेयर के मुकाबले अनुमानित शुद्ध लाभ 80,319 रुपये प्रति हेक्टेयर है। सरसों में 2-3 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है और इसकी अनुमानित लागत 43,720 रुपये प्रति हेक्टेयर है, जबकि अनुमानित शुद्ध लाभ 71,280 रुपये प्रति हेक्टेयर है।
चना भी फायदेमंद
इसी प्रकार चना में मात्र 1-2 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है। इसकी अनुमानित लागत 48,604 रुपये प्रति हेक्टेयर और अनुमानित शुद्ध लाभ 28,396 रुपये प्रति हेक्टेयर है। इसके विपरीत गेहूं में लगभग 5-6 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है।