किसानों को मिला प्रशिक्षण, इस क्षेत्र में बांस खेती की खुलेगी नई राह
(सभी तस्वीरें- हलधर)स्वामी केशवानन्द राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर के उद्यान विभाग द्वारा श्रीगंगानगर जिले के गांव मदेरा स्थित धारणिया जैविक फार्म पर राष्ट्रीय बांस मिशन के तहत एक दिवसीय कृषक प्रशिक्षण आयोजित किया गया। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य शुष्क क्षेत्र में बांस की खेती की संभावनाओं और तकनीकों से किसानों को जोड़ना था।
विशेषज्ञों ने दी तकनीकी जानकारी
प्रशिक्षण कार्यक्रम में कृषि विशेषज्ञों ने भाग लिया। इसमें केवीके पदमपुर की इंचार्ज डॉ. सीमा चावला, परियोजना अधिकारी डॉ. पीके यादव, उप-परियोजना अधिकारी डॉ. सीपी मीणा और कृषि वैज्ञानिक डॉ. रघुवीर सिंह मीणा शामिल रहे। कार्यक्रम सह-समन्वयक डॉ. चंद्रप्रकाश ने किसानों को बांस परियोजना की विस्तृत जानकारी दी।
बांस की उन्नत किस्मों पर जोर
डॉ. पीके यादव ने किसानों को बांस की उन्नत किस्मों जैसे बम्बूसा वुल्गैरिस, हैमिल्टनी और बालकोआ की विशेषताओं के बारे में बताया। उन्होंने शुष्क क्षेत्र में बांस की खेती के लिए मिट्टी, पानी और प्रबंधन तकनीकों की विस्तार से जानकारी दी, जिससे किसान बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकें।
प्रोसेसिंग और वैल्यू एडिशन की जानकारी
डॉ. सीमा चावला ने किसानों को बांस से बनने वाले आचार और मुरब्बा जैसे उत्पादों की विधियां बताईं। इससे किसानों को खेती के साथ-साथ वैल्यू एडिशन के जरिए अतिरिक्त आय बढ़ाने के अवसर भी समझाए गए।
ड्रिप सिंचाई और अंतरफसल पर फोकस
डॉ. रघुवीर सिंह मीणा ने गंगानगर क्षेत्र में बांस की खेती की संभावनाओं पर प्रकाश डालते हुए ड्रिप सिंचाई और अंतरफसल प्रणाली अपनाने की सलाह दी। उन्होंने सैम (खारे) प्रभावित क्षेत्रों में भी बांस की खेती को लाभकारी बताया।
किसानों को दिए गए बांस के पौधे
प्रशिक्षण के अंत में परियोजना अधिकारियों द्वारा जैविक फार्म पर 100 बांस के पौधे उपलब्ध कराए गए, ताकि किसान इसे अपनाकर अपनी आय में वृद्धि कर सकें।
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