मौसम बदलेगा चाल, बारिश-ओले से गेहूं-चना फसलों को नुकसान का खतरा

नई दिल्ली 16-Mar-2026 06:50 PM

मौसम बदलेगा चाल, बारिश-ओले से गेहूं-चना फसलों को नुकसान का खतरा

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। दिनों-दिन चढ़ता पारा आमजन के लिए परेशानी का सबब बनने लगा है। वहीं, जायद फसलों पर भी संकट गहराने लगा है। हालांकि, मौसम विभाग ने 19 मार्च से मौसम का मिजाज बदलने की बात कही है। इससे तापमान में गिरावट आने की संभावना है। बता दें कि मौसम विभाग ने एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने का अलर्ट जारी किया है। जिससे प्रदेश के कई जिलों में आंधी, बारिश और ओलावृष्टि देखने को मिल सकती है। मौसम के बदलाव से खेत में खड़ी गेहूं-जौ और चना की फसल को नुकसान संभव है। वहीं, खेत में कटकर पड़ी सरसों फसल को भी नुकसान पहुंंचने की बात से इंकार नहीं किया जा सकता है। ऐसे में किसानों को सतर्क रहने की जरूरत है। आपको बता दें कि प्रदेश के अधिकांश जिलों में दिन का तापमान 40 डिग्री तक पहुंच चुका है। उधर, प्रदेश के पश्चिमी जिलोंं में आमजन के साथ-साथ पशुधन के हल्क सूखने लगे है। मानसून की कमी के चलते पश्चिमी जिलों के साथ-साथ पूर्वी जिलों में भी पानी की खींच नजर आना शुरू हो गई है। वहीं, चारे की समस्या भी बढऩे लगी है। 

क्यों बढ़ रही है गर्मी 

मौसम विभाग की मानें तो पश्चिमी राजस्थान के ऊपर बने प्रति चक्रवाती तंत्र के कारण तापमान तेजी से बढ़ रहा है। जानकारों का कहना है कि इस सीजन में प्रशांत महासागर में अलनीनो की स्थिति बनी हुई है। यह तीन महीने सामान्य स्थिति में रहेगा। पश्चिमी राजस्थान में गर्मी बढऩे का यह भी एक बड़ा कारण है।

यह करें किसान

प्रदेश में इन दिनों रबी फसलों की कटाई का काम किसान कर रहे है। बढ़ती गर्मी को देखते हुए किसानों को सावधानी बरतने की जरूरत है। किसान सुबह-शाम के समय फसलों की कटाई करें। ताकि, तेज गर्मी से बचा जा सके। ज्यादा से ज्यादा पेय पदार्थ का उपयोग करें। ताकि, शरीर में पानी की कमी नहीं हो। 

जायद बुवाई का समय

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार इस समय किसान जायद सब्जी फसलों की बुवाई के साथ-साथ खाद्यान्न और चारा फसलों की बुवाई कर सकते है। किसान इन फसलों की बुवाई सिंचाई की स्थिति को देखते हुए ही करें। क्योंकि, बढ़ता तापमान सिंचाई के अभाव में फसलों के साथ-साथ उत्पादन को झुलसाने का काम करेगा। बता दें कि किसान मूंग, मूंगफली, बाजरा, चारा फसल के साथ ग्रीष्मकालीन भिंड़ी की बुवाई कर सकते है। मध्य अप्रैल तक जायद फसलों की बुवाई की जा सकती है। आपको बता दें कि सिरोही, बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर, जालौर आदि जिलों मेें किसान जायद फसलों की बुवाई करते है। जानकारी के अनुसार प्रदेश में जायद फसलों का क्षेत्रफल 25-30 हजार हैक्टयर के करीब है। 

दुग्ध उत्पादन में आयेगी गिरावट

अब दूध देने वाले पशुओं की विशेष सार संभाल की जरूरत पशुपालको को होगी। सही तरीके से ध्यान न देने पर दूध उत्पादन तो कम होगा। साथ ही, पशुओं के बीमार होने का भी अंदेशा बना रहेगा। पशु विशेषज्ञों डॉ. योगेश आर्य के मुताबिक पौष्टिक आहार और पानी के साथ यूरिया उपचारित भूसा देकर उत्पादन समान बनाए रखा जा सकता है। गर्मी में जरूरी होता है कि दुधारू पशुओं को तेज धूप से बचाएं। उन्होंने बताया कि गर्मियों में पशुओं की मेटाबॉलिक रेट बढ़ जाता है। वहीं, एनर्जी लॉस शुरू हो जाता है। ऐसे में दूध का उत्पादन जानवर की ऊर्जा बचाने पर निर्भर करता है। पशु जितनी ऊर्जा बचाएंगे, उतनी ही उत्पादन क्षमता बनी रहेगी। 

फसल सलाह

कद्दूवर्गीय सब्जियाँ जैसे कद्दू, लौकी, टिंडा, करेला, तरबूज और खरबूज में लाल कीड़े का प्रकोप देखा जा रहा है। इससे बचाव के लिए किसान ट्राईजोफास 40 ईसी दवा की 2 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। दवा छिडक़ाव के सात दिन बाद तक सब्जियों को नहीं तोड़े। कद्दूवर्गीय जिन फसलों में फूल कम आ रहे हों उसमें एनएए नामक हार्मोन का 10-15 मिली प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। जिससे मादा फूलों की संख्या बढ़ेगी। जिसका सीधा प्रभाव उपज पर पड़ेगा।

गेहूं-जौ का करें बचाव

सामान्य से ज्यादा तापमान से गेहूं-जौ की फसल में हिट स्ट्रेस की समस्या देखने को मिल सकती है। फसल को बचाने के लिए एसकेआरएयू बीकानेर के कृषि वैज्ञानिको ने एडवाइजरी जारी की है।  वैज्ञानिको ने कहा है कि फसल को तेज गर्मी से बचाने के लिए किसान 100 लीटर पानी में 2 किलोग्राम यूरिया मिलाकर प्रति बीघा पर्णीय छिडक़ाव कर सकते हैं। अथवा 100 लीटर पानी में 2 किलोग्राम पोटेशियम नाइट्रेट मिलाकर प्रति बीघा की दर से गेहूं की पत्तियों पर छिडक़ाव किया जा सकता है। आवश्यकता पडऩे पर किसी एक छिडक़ाव को 15 दिन के अंतराल से दोहराया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार ये  छिडक़ाव गेहूं की अंतिम पत्ती के विकास में सहायक होते हैं, जिससे दानों का भराव अच्छा होता है और उत्पादन में वृद्धि मिलती है। 


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