मावठ-ओलावृष्टि का कहर: सरसों-जीरा-चना फसलों पर संकट
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। बसंत उत्साह के बीच प्रदेश के कई जिलों में मावठ, आंधी के साथ ओलावृष्टि हुई है। साथ ही, बादलों की गडगड़ाहट देखने को मिली है। इससे अगेती रबी फसलों को नुकसान पहुंचा है। खासकर श्रीगंगागनर, बीकानेर और हनुमानगढ़ जिले में आंधी से सरसों की फसल खेत में बिछ गई है। वहीं, पश्चिमी राजस्थान में भी ईसबगोल और जीरे की फसल को नुकसान पहुंचने के समाचार है। गौरतलब है कि पखवाडे भर से मौसम में बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी दिन-रात के तापमान मेें बढौत्तरी हो रही है तो कभी पारा और पाला गिरने की स्थिति बन रही है। ऐसे में किसान मौसम के चक्रव्यूह में उलझता जा रहा है। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो मौसमी गतिविधियों को रबी फसलों के अनुकूल नहीं कहा जा सकता है। तापमान में गिरावट और मौसम में नमी आने के साथ चल रही ठण्डी बयार से फसलों को भी नुकसान पहुंच रहा है। मौसम में आद्र्रता बढऩे से सरसों की फसल में तनागलन और सफेदरोली रोग प्रकोप की संभावनाओं को बल मिला है। मौसम की स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय राई-सरसों अनुसंधान संस्थान के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को तनागलन और सफेद रोली रोग नियंत्रण को लेकर सलाह जारी की है। ऐसे में मौसम खुलने के साथ ही नियंत्रण के उपाय अपनाने की बात वैज्ञानिकों ने किसानों से कही है। गौरतलब है कि यह दोनों रोग फसल के उत्पादन के साथ उत्पादकता को गिराने में मुख्य भूमिका निभाते है। संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि अब सरसों उत्पादक किसान फसल में सिंचाई नहीं करें। क्योंकि, सरसों को पकाव तक पहुुंचाने के लिए पर्याप्त बारिश हो चुकी है। भूमि में ज्यादा नमी से तना गलन रोग को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने बताया कि जहां हल्की मृदा है, उन क्षेत्रों के किसान जरूरत होने पर पकाव के समय फसल में सिंचाई कर सकते है। गौरतलब है कि पश्चिमी विभोक्ष के चलते राजधानी जयपुर सहित सीकर, झुंझुनूं, नागौर, डीडवाना-कुचामन, बीकानेर, जैसलमेर, जोधपुर आदि जिलों में मावठ की अच्छी बारिश दर्ज हुई है।
क्या है सफेद रोली
उन्होने बताया कि सफेद रोली सरसों का बीज -भूमि जनित रोग है। इसके कारण पत्तियों की सतह पर सफेद रंग के उभरे हुए फफोले दिखाई देते हैं। फफोलों के फटने पर सफेद चूर्ण पत्तियों पर फैल जाता है। पीले रंग के धब्बे आपस में मिलकर पत्तियों को पूरी तरह से ढक लेते हैं। इससे पुष्पीय भाग और फलियां पूरी तरह से विकृत हो जाती है। जिससे फलियों में बीज नहीं बन पाता है। इसके अलवा कड़ाके की इस सर्दी में तुलासिता रोग भी फैलता है। इस रोग में सरसों की पत्तियों की निचली सतह पर बैंगनी-भूरे रंग के धब्बे बनते है। यह रोग तीव्रता से फैलता है। इससे फसल के फूल नष्ट हो जाते है।

जीरे में ब्लाईट
तेज हवा, बारिश और आकाश में बादल छाएं रहने से जीरे की फसल में झुलसा- ब्लाईट और छाछ्या रोग तेजी से फैलने की संभावना हैं। झुलसा- ब्लाईट रोग नियंत्रण के लिए किसान मैन्कोजेब 0.2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। छाछ्या रोग नियंत्रण के लिए प्रति हैक्टयर 35 किलोग्राम गंधक चूर्ण का भुरकाव अथवा घुलनशील गंधक 0.2 ' घोल (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिडक़ाव करें।
27 से नया विक्षोभ
मौसम विभाग के दीर्घावधि पूर्वानुमान के अनुसार जबकि 27-28 जनवरी को एक और विक्षोभ के प्रभाव की संभावना है। फरवरी के पहले सप्ताह के बाद मौसम शुष्क होने लगेगा और तापमान में तेजी से बढ़ोतरी होगी।
फरवरी से बढेगा तापमान
इस बार फरवरी से ही गर्मी का एहसास होने लगेगा। मौसम विभाग के अनुसार 10 फरवरी के बाद प्रदेश में अधिकतम तापमान सामान्य से 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रहने की संभावना है, जिससे गर्मी की दस्तक अपेक्षाकृत जल्दी होगी। फरवरी के पहले सप्ताह के बाद मौसम शुष्क होने लगेगा। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ कमजोर पड़ते ही पारे में तेज उछाल आएगा, जिसका असर खासतौर पर पश्चिमी और दक्षिणी राजस्थान में अधिक देखने को मिलेगा।