संतरा में पिंक रोग: किसान अपनाएं ये वैज्ञानिक उपाय

नई दिल्ली 14-Mar-2026 01:10 PM

संतरा में पिंक रोग: किसान अपनाएं ये वैज्ञानिक उपाय

(सभी तस्वीरें- हलधर)

संतरा फसल में लगने वाला पिंक रोग (गुलाबी बीमारी) एक खतरनाक कवक जनित रोग है, जो पेलिकुलेरिया सालमोनिकॉलर नामक फफूंद के कारण होता है। यह रोग मुख्य रूप से पेड़ की टहनियों और शाखाओं को प्रभावित करता है और समय पर नियंत्रण नहीं करने पर पौधे को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।

रोग की पहचान कैसे करें

किसान भाई संतरे के पौधों में निम्न लक्षण देखकर इस रोग की पहचान कर सकते हैं:

  • टहनियों और शाखाओं पर सफेद या गुलाबी रंग की कवकीय वृद्धि दिखाई देना।
  • रोग की शुरुआत में छाल से हल्का गोंद निकलना।
  • प्रभावित पौधों की पत्तियां पीली होकर सूखने लगती हैं।
  • रोगग्रस्त हिस्से पर सफेद कवकजाल की परत और छोटे गुलाबी छाले या स्फोट दिखाई देते हैं।

नियंत्रण के वैज्ञानिक उपाय

इस रोग से बचाव के लिए किसान निम्न उपाय अपनाएं:

  • संक्रमित टहनियों और शाखाओं की समय पर कटाई-छंटाई करें।
  • कटे हुए स्थान पर बोर्डो मिश्रण का लेप लगाएं।
  • रोग के नियंत्रण के लिए 1 प्रतिशत बोर्डो मिश्रण का छिड़काव करें।
  • आवश्यकता पड़ने पर चूना-गंधक (Lime Sulphur) का छिड़काव भी किया जा सकता है।
  • समय पर पहचान और सही प्रबंधन से किसान अपनी संतरा फसल को पिंक रोग से बचाकर उत्पादन और गुणवत्ता दोनों बढ़ा सकते हैं।

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