पाला अलर्ट! 15 दिन में फसल बचाने की पूरी कृषि सलाह
(सभी तस्वीरें- हलधर)किसान भाईयों कृषि कार्यों को समय पर करने और उन्नत कृषि विधियां अपनाने पर कृषि से अधिक लाभ प्राप्त किया जा सकता है। समय पर कृषि क्रियाएं करने से रोग व कीटों का आक्रमण कम हो जाता है तथा इनसे होने वाली हानि को रोककर उत्पादन में वृद्धि की जा सकती है। किसानों के लिए 5 जनवरी से 11 जनवरी तक किए जाने वाले कृषि कार्य इस प्रकार हैं:
भिण्डी, मिर्च, टमाटर, नींबू और पपीता में विषाणु जनित रोग की रोकथाम के लिए डाईमिथोएट 30 ई. सी. 0.1 प्रतिशत अथवा एसिफेट 75 डब्लू पी 0.15 प्रतिशत अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एस.एल. 1 मि.ली. 3 लीटर पानी के घोल का छिड़काव करें।
मिर्च की फसल में डाईबैक (सूखा रोग) के लक्षण (पौधे का ऊपर से नीचे की ओर सूखना एवं शाखाओं पर काले धब्बे दिखाई देना) दिखाई देने पर फसल पर कॉपर ऑक्सीक्लोराइड 50 प्रतिशत डब्लू पी 2-3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
पाला क्या है:- पाले में कोशिका में पानी जम जाता है जिससे कोशिका का आयतन 10% बढ़ जाता है इससे कोशिका झिल्ली टूट जाती है। यही पाले का असर है।
सम्भावना:- पाले की सम्भावना के लिए आसमान साफ हो, हवा रुकी हुई हो, शाम के समय बेहद ठण्डक महसूस हो, न्यूनतम तापमान 4 डिग्री सेल्सियस के आसपास हो। पाला सामान्यतः रात्रि में 2 से 4 बजे के मध्य पड़ता है। राजस्थान में पाले के लिए असुरक्षित समय 15 दिसम्बर से 15 फरवरी तक रहता है।
पाले के लक्षण:- पाले में सुबह के समय पौधे की पत्तियां एवं टहनियां लटकी हुई नजर आती है, जो कि धीरे धीरे बदरंग होकर काली पड़ जाती है। पत्तियों में (मटर, सरसों) ऊपर से सफेद सी परत जम जाती है, बीज अन्दर ही अन्दर मर जाता है।
पाले से बचाव के उपाय:-
पाला रोधी किस्मों की बुवाई करें।
हल्की सिंचाई करें। (फव्वारा 30 मिनट तक अथवा कम ही चलाएं)
उत्तर पश्चिम दिशा में रात्रि के समय 12 बजे के बाद धुँआ करें, धुँआ जितनी देर से कर सकें उतना ही प्रभावी रहता है कारण देर रात के समय हवा रुकी हुई सी रहती है।
रसायनों का छिड़काव करें। थायोसेलिसीलिक अम्ल 100 पी.पी.एम. (0.1 मिली प्रति लीटर पानी) अथवा थायोयूरिया 500 पी.पी.एम. (0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी) अथवा घुलनशील गंधक 0.2 प्रतिशत (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) के घोल का छिड़काव करें। छिड़काव 15 दिन बाद पुनः दोहरायें।
ये रसायन कोशिका के चारों तरफ एयरस बॉण्ड बना देते है, जिससे तेलस्पष्ट नहीं होती है। यह बॉण्ड 15 दिन तक ही प्रभावी रहता है। इसलिए 15 दिन बाद पुनः दोहरायें।