बाजरा खेती में क्रांति: डबल मेटेंनर से बनी RHB-273 किस्म

नई दिल्ली 28-Jan-2026 02:11 PM

बाजरा खेती में क्रांति: डबल मेटेंनर से बनी RHB-273 किस्म

(सभी तस्वीरें- हलधर)

जयपुर। संकर बाजरा रिसर्च के क्षेत्र में कृषि वैज्ञानिकों को बड़ी सफलता मिली है। पहली बार किसी हाईब्रिड़ को तैयार करने में दो मेटेंनर यानी बी-1 और बी-2 का उपयोग हुआ है। जिसे वैज्ञानिकों ने थ्री-वे (त्रिधा) संकर बाजरा आरएचबी-273 नाम दिया है। हाल ही में केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस किस्म को विमोचित किया है। गौरतलब है कि आरएचबी-273 किस्म इक्रीसैट हैदराबाद और रारी दुर्गापुरा के संयुक्त शोध का परिणाम है। जिसने दुनिया को चौका दिया है। क्योंकि, आमतौर पर संकर बाजरा किस्म तैयार करने में एक मेंटर का उपयोग किया जाता है। जबकि, इस किस्म में बी-1 और बी-2 मेटेंनर का प्रयोग हुआ है। इस तरह से इस किस्म का विकास चार लाइन से हुआ है। कृषि वैज्ञानिकों ने बताया कि बाजरा किस्म विकास के लिए ए (आईसीएमए-97111) बी (आईसीएमए-97111) बी-2(आईसीएमए-13666) आर (आरआईबी-3135-18) लाइन का प्रयोग किया जाता है। जिसमें ए का आर लाइन से क्रॉस कराने पर हाइब्रिड़ तैयार होता है। वहीं, ए को बी लाइन से क्रॉस कराने पर ए लाइन का बीज तैयार होता है। जबकि, नवविकसित किस्म में बी-1 और बी-2 को आर लाइन से क्रॉस करवाया गया है। उन्होंने बताया कि ए (एसटीआईआरएलई) लाइन होती है। जिसमें उसका स्वयं का बीज तैयार नहीं होता है। गौरतलब है कि इस त्रिधा का विकास आरएमएस-30 ए(आईसीएमए-97111 गुना आईसीएमए-13666) गुना आरआई-बी 3135-18 के क्रॉस कराने से हुआ है। इस तरह इस संकर बाजरा में चार लाइन का उपयोग हुआ है। 

गौरतलब है कि यह किस्म न केवल सूखा सहनशील है। बल्कि, पैदावार और पोषण के मामले में भी बेहत्तर है। बता दें कि प्रदेश में 42 से 45 लाख हैक्टयर क्षेत्र में बाजरे की खेती होती है। इस किस्म के विकास में 

मिलेगा बेहत्तर पोषण

अखिल भारतीय समन्वित बाजरा अनुसंधान परियोजना में एसआरएफ डॉ. बाबूलाल ढाका ने बताया कि स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह किस्म लाभदायक है। इसमें 10.5 प्रतिशत प्रोटीन, 44 पीपीएम आयरन और 37 पीपीएम जिंक विद्यमान है। जो कुपोषण की दर को घटाने में सहायक होगा। इस किस्म के पुष्पगुच्छों पर विशेष रेशे होते हैं, जो इसे पक्षियों के नुकसान से भी बचाएंगे। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसका थ्री-वे हाइब्रिड होना है। इससे बीज उत्पादन की लागत कम आएगी।