किसानों के लिए चमत्कारी खोज: पादप सूक्ष्मजीव और जैव उर्वरक

नई दिल्ली 20-Jan-2026 12:31 PM

किसानों के लिए चमत्कारी खोज: पादप सूक्ष्मजीव और जैव उर्वरक

(सभी तस्वीरें- हलधर)

अत्यधिक रासायनिक उर्वरकों, कीटनाशकों और एक-फसली प्रणाली जिसने खेती को महँगा, जोखिमपूर्ण और अस्थिर बना दिया है। परिणामस्वरूप मिट्टी की जैविक शक्ति कम, रोगों का प्रकोप और किसान की लागत में बढ़त को कम करके बदले में सूक्ष्मजीवों से बने जैव उर्वरक और जैव नियंत्रक काम में लिए जा रहे है। वर्तमान कृषि विज्ञान हमें यह सिखा रहा है कि समाधान बाहर नहीं, बल्कि, पौधों के अंदर ही छिपा है। पौधों के अंदर रहने वाले सूक्ष्म, अदृश्य लेकिन, अत्यंत शक्तिशाली है।  

क्या है पादप सूक्ष्मजीव

पादप सूक्ष्मजीव क्या होते हैं? सूक्ष्मजीव कैसे दिखते हैं और पौध-पर्यावरण में कैसे कार्य करते हैं? अंत:पादप सूक्ष्मजीव (एंडोफाइटिक सूक्ष्मजीव)) लाभकारी जीवाणु, कवक और ऐक्टिनोमाइसीट्स के रूप में होते हैं जो पौधों के आंतरिक ऊतको जैसे जड़, तना, पत्ती, फूल और बीज आदि में रहते हैं, पौधों को बिना कोई नुकसान पहुँचाए सहजीवी संबंध में रहते हैं।

अंत:पादप सूक्ष्मजीव पौधों के साथ सहजीवी संबंध बनाने के साथ ही उसे कई प्रकार से लाभ पहुँचाते हैं।

सुरक्षा और शक्ति

यह संबंध इतना संतुलित और मजबूत होता है जैसे कि सुरक्षा और शक्ति प्रदान करने जैसे कार्य जिससे पौधा इन्हें आश्रय और पोषण देने पर मजबूर हो जाते है।

अंत:पादप सूक्ष्मजीव पौधे के अंदर कैसे पहुँचते हैं? 

अंत:पादप सूक्ष्मजीव अनेक माध्यमों से पौधों में प्रवेश करते हैं जैसे मिट्टी के माध्यम से जड़ों द्वारा, पत्तियों के रंध्रों से, प्राकृतिक घावों से, बीज के अंदर रहकर अगली पीढ़ी में एक बार प्रवेश करने के बाद यह पूरे जीवनकाल तक पौधे के साथ रहते हैं। अंत:पादप सूक्ष्मजीवों के प्रमुख प्रकार जैसे अंत:पादप जीवाणु बैसिलस, स्यूडोमोनास और एजोस्पाइरिलम अंत:पादप कवक और ट्राइकोडर्मा,  पिरिफॉर्मोस्पोरा इंडिका, अंत:पादप ऐक्टिनोमाइसीट्स स्ट्रेप्टोमाइसेस आदि।

कई तरह से लाभकारी

पौधों के लिए ये क्यों हैं आंतरिक रक्षक ? इस तथ्य को जानने के लिए अनेक क्रियाकलाप होते हैं, जो सूक्ष्मजीवों द्वारा किए जाते हैं जैसे कि पादप वृद्धि हार्मोन का निर्माण, इंडोल एसीटिक अम्ल, जिबरेलिन, साइटोकिनिन, पोषक तत्वों की बेहतर उपलब्धता नाइट्रोजन स्थिरीकरण, फॉस्फेट घुलनशील बनाना, रोगों से प्राकृतिक सुरक्षा रोगजनकों का धमन, प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाना।

कीट-रोगजनक सूक्ष्मजीवी जैव-नियंत्रक विभिन्न फसलों में रोग- कीटों के नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। धान की फसल में ट्राइकोडर्मा हार्जियानम और ट्राइकोडर्मा विरिडे शीथ ब्लाइट और जड़ सडऩ जैसे मृदा-जनित रोगों को नियंत्रित करते हैं। जबकि, स्यूडोमोनास फ्लुओरेसेंस धान में ब्लास्ट औरं बैक्टीरियल ब्लाइट रोग के दमन में सहायक होता है। गेहूं में ट्राइकोडर्मा प्रजातियाँ जड़ सडऩ और फु ट रॉट को कम करती हैं। मेटाराइजियम एनीसोप्लिए दीमक के प्रभावी जैव-नियंत्रण में उपयोगी है। कपास में ट्राइकोडर्मा विल्ट और रूट रॉट रोगों को नियंत्रित करता है। वहीं, ब्यूवेरिया बेसियाना और न्यूक्लियर पॉलीहैड्रोसिस वायरस (एनपीवी) अमेरिकन बॉलवर्म जैसे हानिकारक कीटों की संख्या को घटाते हैं। दलहनी फसलों जैसे चना, अरहर एवं मूंग में ट्राइकोडर्मा विल्ट और ड्राई रूट रॉट के नियंत्रण में प्रभावी है। एनपीवी फली छेदक (हेलिकोवर्पा) के जैव-नियंत्रण के लिए प्रयोग किया जाता है। तिलहनी फसलों में ट्राइकोडर्मा स्क्लेरोटिनिया स्टेम रॉट को कम करता है और ब्यूवेरिया बेसियाना माहू (एफिड) जैसे चूसक कीटों को नियंत्रित करता है। सब्जी फसलों जैसे टमाटर, मिर्च, बैंगन में ट्राइकोडर्मा डैम्पिंग-ऑफ  औरं विल्ट रोगों के दमन में उपयोगी है। जबकि, स्यूडोमोनास फ्लुओरेसेंस बैक्टीरियल विल्ट को नियंत्रित करता है। गन्ने की फसल में ट्राइकोडर्मा रेड रॉट रोग को कम करता है। मेटाराइजियम एनीसोप्लि और ब्यूवेरिया बेसियाना क्रमश: दीमक और पाइरिला जैसे कीटों के नियंत्रण में सहायक होते हैं। इस प्रकार जैव-नियंत्रक सूक्ष्मजीव फसलों में रोग-कीट प्रबंधन के लिए एक सुरक्षित, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ विकल्प प्रदान करते हैं। दवधानीकरण (जैव-कल्चर) का वैज्ञानिक विधि से उपयोग किसानों को यह समझता है कि अंत:पादप सूक्ष्मजीव तभी लाभ देंगे जब उन्हें सही विधि और सही समय पर प्रयोग किया जाए। 

सूक्ष्मजीवों उपचार की विधियाँ

बीज उपचार की विधि में 10-20 ग्राम जैव-कल्चर प्रति किलो बीज के साथ प्रयोग किया जाता है। जड़ उपचार की विधि में रोपाई से पहले 20-30 मिनट जड़ों को घोल में डुबोएँ रखना आवश्यक है। मदा का उपचार, 2-5 किग्रा जैव-कल्चर गोबर खाद में मिलाकर किया जाता है। 5-10 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर पर्णीय छिड़काव किया जाता है।

सावधानियां

अंत: पादप सूक्ष्मजीव को रासायनिक कीटनाशकों के साथ तुरंत न मिलाएँ। धूप और गर्मी से जैव-कल्चर को बचाकर रखना चाहिए। सही मात्रा में प्रयोग करना चाहिए।


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