फसलों को बचाने के लिए अपनाएं देसी नुस्खा, फिर लें दवा का सहारा 

नई दिल्ली 06-May-2026 02:34 PM

फसलों को बचाने के लिए अपनाएं देसी नुस्खा, फिर लें दवा का सहारा 

(सभी तस्वीरें- हलधर)

आज के समय में बढ़ती आबादी और जमीन की कमी से खेती में नई तकनीक अपनाना मजबूरी भी है और जरूरत भी। वहीं, लोगों के मन में अक्सर डर रहता है कि पेस्टीसाइड्स(कीटनाशक) सिर्फ जहर है और सेहत के लिए काफी खतरनाक है लेकिन इसे वैज्ञानिक नजरिया से देखा जाए तो कीटनाशक फसल के लिए दवा की तरह काम करता है।

दुनियाभर की बड़ी संस्थाएं जैसे FAO और WHO भी मनाती हैं कि अगर हम सही तरीके से इसका इस्तेमाल करें तो यह खेती को बेहतर बनाने का सबसे बड़ा जरिया हैं लेकिन पेस्टीसाइड्स का फायदा तभी है जब इसका इस्तेमाल सही तरीके से किया जाए।

देसी तरीके हैं सबसे अच्छे

आधुनिक खेती करने का सबसे तरीका है कि कीड़े मारने वाली रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल सबसे पहले नहीं बल्कि सबसे आखिर में करना चाहिए। सबसे पहले हमें देसी तरीके आजमाने चाहिए जैसे फसल चक्र बदलना या ऐसी किस्में बोना जिसमें बीमारी कम लगती हो। इसके बाद  लाइट ट्रेप या चिपचिपे कार्ड्स का इस्तेमाल करना चाहिए। अगर इनसे भी बात न बने, तो 'बायो-पेस्टीसाइड्स' यानी नीम के तेल या फायदेमंद कीड़ों का सहारा लेना चाहिए। जब ये चीजें काम न आए, तभी रसायनिक दवाओं की तरफ कदम बढ़ाना चाहिए. इसे ही 'अंतिम विकल्प' का सिद्धांत कहते हैं, जो हमारे पर्यावरण और सेहत दोनों को महफूज रखता है.

सही तरीके से इस्तेमाल

पेस्टीसाइड्स का फायदा तभी है जब इसे सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए। दवा हमेशा वही खरीदें जो सरकार से मान्यता प्राप्त हो और आपकी फसल की बीमारी के हिसाब से हो। छिड़काव भी तभी करें जब कीड़ों का हमला इतना बढ़ जाए कि नुकसान होना तय हो। उससे पहले बिना वजह स्प्रे करना पैसों और सेहत की बर्बादी है। साथ ही, दवा डालने वाली मशीन की हालत ठीक होनी चाहिए ताकि दवा पूरी फसल पर सही से फैले और कोई हिस्सा बाकी न रहे।


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