सेहत के लिए अपनाई जैविक खेती

नई दिल्ली 06-May-2026 12:09 PM

सेहत के लिए अपनाई जैविक खेती

(सभी तस्वीरें- हलधर)

सहनवा, चित्तौडग़ढ़। आइए आपसे रूबरू कराते है महिला कृषक सीमा वैष्णव से। जिन्होंने अपने गांव की महिलाओं को गरीबी की रेखा से ऊपर उठाने का काम किया है। साथ ही, झोपड़ी में रहते हुए खुद का आर्थिक उड़ान दी है। गौरतलब है कि सीमा खेती के साथ-साथ पशुपालन से जुड़ी हुई है। उन्होंने बताया कि कोविड़-19 से हुई जनहानि को देखते हुए इम्यूनिटी मजबूत करने के लिए जैविक खेती की ओर रूझान बढ़ा और समय के साथ कारवां बढ़ता चला गया। गौरतलब है कि सीमा सालाना डेढ़ से दो लाख रूपए की आय प्राप्त कर रही है। महिला कृषक सीमा ने हलधर टाइम्स को बताया कि कोविड़-19 से पहले खेती-बाड़ी में ज्यादा रूचि नहीं थी। लेकिन, अब खेती के बिना दिन गुजरता नहीं। उन्होंने बताया कि कोविड-19 के दौर में कई रिश्तेदारों की जान गई। इस दौरान रोग प्रतिरोधकता की ओर ध्यान गया और परिवार का बेहत्तर पोषण उपलब्ध कराने की तलाश ने मुझे केवीके से जोड़ दिया। इसी का परिणाम है कि अब परिवार के लिए जैविक उपजा रही हॅू। साथ ही, वर्मी खाद से भी बेहत्तर आय प्राप्त कर रही हॅू। 10वीं तक पढ़ी सीमा ने बताया कि केवीके से जैविक खेती का प्रशिक्षण लिया। इसके बाद खेतों का जैविक बनाना शुरू किया। इसकी शुरूआत वर्मी कम्पोस्ट उत्पादन के साथ हुई। बाद में जरूरत के दूसरे जैविक आदान भी तैयार करने लगी। साथ ही, गांव की महिलाओं को भी जैविक खेती केे फायदें बताना शुरू किया। परिणाम रहा कि अधिकांश महिलाएं परिवार के लिए शुद्ध उपजा रही है और स्वस्थ खिला रही है।

फसल से 60 हजार

उन्होने बताया कि परम्परागत फसलों में गेहूं, मक्की और मूंगफली का उत्पादन लेती हॅू। इसके अलावा पशुधन के लिए चारा फसल तैयार करती हॅू। इन फसलों से सालाना 60=65 हजार रूपए की आमदनी मिल जाती है।

किचन गार्डन में सब्जी

उन्होने बताया कि जैविक से जुडऩे के बाद केवीके के द्वारा खेत पर किचन गार्डन भी स्थापित करवाया गया। इसमें बैगन, टमाटर, मिर्च सहित दूसरी सब्जी फसलेां का ऋतु अनुसार उत्पादन करती हॅू। गौरतलब है कि सीमा के प्रयास ने केवीके ने 150 घरो में किचन गार्डन स्थापित किए है। साथ ही, अन्य महिलाओं को भी जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया है।  

पशुपालन से आय

उन्होने बताया कि पशुधन में मेरे पास 1 गाय और 1 भैंस है। प्रतिदिन 10 लीटर दुग्ध का उत्पादन मिल रहा है। इसमें से एक समय का दुग्ध 55 रूपए प्रति लीटर की दर से बिक्री कर रही हॅू। इससे पशुधन के साथ-साथ परिवार का मासिक खर्च निकल जाता है। वहीं, पशु अपशिष्ट से वर्मी कम्पोस्ट खाद तैयार करके उपयोग ले रही हॅू।

स्टोरी इनपुट: डॉ. आरएल सोलंकी, केवीके, चित्तौडग़ढ़