8 बीघा में 17 लाख कमाई! नौकरी छोड़ किसान बना मिसाल

नई दिल्ली 16-Feb-2026 01:25 PM

8 बीघा में 17 लाख कमाई! नौकरी छोड़ किसान बना मिसाल

(सभी तस्वीरें- हलधर)

नालपुर, कोटपूतली-बहरोड़। फसल विविधीकरण के साथ कृषि नवाचारों को अपनाकर छोटी जोत से भी  समृद्धता की सफल कहानी लिखी जा सकती है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया है किसान धर्मवीर यादव ने। जिन्होंने 45 हजार रूपए महीने की नौकरी छोडक़र खुद को खेती से जोड़ा और 16-17 लाख रूपए की शुद्ध आय प्राप्त कर रहे है। गौरतलब है कि किसान धर्मवीर फसल उत्पादन तक सीमित नहीं है। वे मशरूम, बागवानी फसल, मोती उत्पादन, गोबर ईंट निर्माण, स्ट्रॉबेरी, सब्जी उत्पादन, पशुपालन सहित दूसरी कृषि गतिविधियों से जुड़े हुए है। किसान धर्मवीर ने हलधर टाइम्स को बताया कि डबल एमए करने के बाद एमसीएससी और सीसीएमए किया। इसके बाद डेढ़ दशक से ज्यादा समय तक नौकरी की। उन्होंने बताया कि उस समय 45 हजार रूपए तनख्वा थी। लेकिन, दिल्ली छोडक़र गांव लौट आया और यहां आकर खेती करने लगा। शुरूआत परम्परागत फसलों से हुई। लेकिन, लाभ-हानि का गणित समझने के बाद कृषि नवाचारों को रफ्तार देना शुरू किया। इसी का परिणाम है कि खेत प्राकृतिक समन्वित कृषि की कहानी बयां कर रहे है। बता दें कि किसान धर्मवीर परम्परागत के साथ-साथ फल-सब्जी फसलों की प्राकृतिक खेती कर रहे है। इसके  लिए अपने खेत पर प्राकृतिक आदान तैयार करने की इकाई स्थापित की हुई है। उन्होंने बताया कि परम्परागत फसलों मेें गेहूं, सरसों और बाजरा फसल का उत्पादन लेता हॅू। जल बचत और विद्युत बचत के लिए सूक्ष्म सिंचाई और सौर उर्जा का उपयोग कर रहा हॅूं। सिंचाई के लिए मेरे पास एक कुआं और दो ट्यूबवैल है। 

स्ट्रॉबेरी के साथ सब्जी उत्पादन

उन्होंने बताया कि एक बीघा क्षेत्र में स्ट्रॉबेरी का उत्पादन लेता हॅू। वहीं, दो बीघा क्षेत्र में खीरा, करेला, चपल टिंड़ा की तकनीक आधारित खेती करता हॅॅू। स्टॉबेरी की फसल से सालाना 5-6 लाख और सब्जी फसलों से डेढ़ लाख रूपए की बचत मिल जाती है। 

मिश्रित बागवानी से आमदनी

उन्होंने बताया कि खेत की मेड़ से भी आमदनी हो रही है। मेड़ पर फलदार पौधें लगाएं हुए है। जो करीब 7 साल के हो चुके है। इनमें चीकू , मौसमी, मोहगनी, नींबू, संतरा के पौधें शामिल है। इनसे भी सालाना डेढ़ लाख रूपए की बचत मिल रही है। 


ट्रेंडिंग ख़बरें