मौसम की पलटी से रबी संकट में, उत्पादन घटने के संकेत
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। मौसम में आए बदलाव और बढ़ते तापमान के कारण रबी की फसलों पर भी असर देखा जा रहा है। धूप के साथ चल रही हवा के कारण फसल जल्दी ही पकने के कगार पर पहुंचने की संभावना है। गौरतलब है कि बाड़मेर में पारा 35 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। कृषि विशेषज्ञ तापमान में हो रही बढौत्तरी को रबी फसलों के अनुकूल नहीं बता रहे है। उनका कहना है कि अभी पश्चिमी राजस्थान में जीरा, रायड़ा, ईसबगोल और दूसरे जिलों में गेहूं, जौ और चना की फसल में दाना बनने की प्रक्रिया शुरू हुई है। ऐेसे में तेज गर्मी से फसल उत्पादन पर विपरीत प्रभाव पडऩा तय है। किसानों का कहना है इस बार मौसम ने जल्दी पलटी मार ली। अभी फरवरी माह चल रहा है और धूप में तेजी से गर्मी का असर दिखा रही है, जिससे तापमान बढऩे से फसल की गुणवत्ता और उत्पादन पर असर पड़ेगा। किसानों का मानना है कि इस बार करीब 15 दिन पहले सरसों की फसल काटी जा रही है। क्योंकि, अचानक मौसम परिवर्तन के बाद गर्मी बढऩे लग गई है। जहां फरवरी माह में सर्दी रहती थी और अब हवा भी तेज चल रही है। देखा जाए तो मार्च के अंत तक सर्दी रहती थी। बस अब सुबह और शाम की ही सर्दी रही है। गौरतलब है कि मौसम में आए बदलाव से रबी फसलों को कीट-रोग का संक्रमण बढने की भी डर है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार तेज हवा चलने से मसाला और सब्जी फसल में छाछ्या, झुलसा, गेहूं में पीली रोली रोग का प्रकोप बढ़ेगा। साथ ही, एफिड़-जैसिड़ जैसे कीट का एक से दूसरे पौधे पर तेजी से प्रसार होगा। देरी से बुवाई की गई रबी फसलों में अधिक नुकसान होगा। साथ ही, जमीन से नमी गायब हो जाने का अंदेशा भी हैं। किसानों से प्राप्त जानकारी के अनुसार असिंचित क्षेत्र में चने की फसलों पर वर्तमान में सेमीलूपर (लट) फलीछेेदक कीट का प्रकोप हो रहा है। वहीं गेहूं-जौ की फसल में दीमक, मोयला की समस्या देखने में आ रही हैं। जीरे में छाछ्या और झुलसा रोग, लहसुन में काली पत्ती रोग दस्तक दे चुका हैं।
मौसम में ठंडक की आवश्यकता
फसलों को वृद्धि के साथ स्वस्थ रखने के लिए अभी मौसम में ठंडक की आवश्यकता है। बढे हुए तापमान से रबी फसलों की वृद्धि और फलन के लिए आवश्यक तापमान की समस्या बनी हुई हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार हवा फसल में रोग-कीट बढ़ाने का कार्य करेगी। ऐसे में किसान का फसल के साथ आर्थिक नुकसान तय है। साथ ही, फसल की गुणवत्ता में भी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
दाना छोटा रहने का डर
असमय ही गर्मी के कारण फसल कमजोर है। गर्मी के चलते फली भूरी-भूरी हो गई है, जिससे धूप में फली के चटकने का डर है। इसी आशंका में किसान अपनी फसल को काट रहे हैं। किसानों का कहना है कि तापमान में बढ़ोतरी के कारण सरसों के अलावा गेहूं व चना, जौ की फसल पर भी असर देखा जा रहा है। इन फसलों में सिंचाई की अधिक जरूरत पड़ेगी। साथ ही, हवा के चलने और तापमान में तेजी रहने के कारण फसल में पकाव जल्दी आ जाएगा। इससे दाना कमजोर रहने की आशंका। एकाएक पलटे मौसम का फसल की गुणवत्ता और उत्पादन दोनों पर असर डाल रहा है।
जीरे में चरमा और छाछ्या रोग
तेज हवा से जीरे की फसल में चरमा (झुलसा- ब्लाईट) और छाछ्या रोग तेजी से फैलने की संभावना हैं। झुलसा- ब्लाईट रोग नियंत्रण के लिए किसान मैन्कोजेब 0.2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। छाछ्या रोग नियंत्रण के लिए प्रति हैक्टयर 35 किलोग्राम गंधक चूर्ण का भुरकाव अथवा घुलनशील गंधक 0.2 प्रतिशत घोल (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिडक़ाव करें।
सरसों में सफेद रोली
सरसों में सफेद रोली की रोकथाम के लिए मेटालेक्सिल अथवा मेटालेक्सिस 4' + मेंकोजेब 64 प्रतिशत (68 डब्ल्यूपी) के मिश्रण, झुलसा रोग से बचाव के लिए कॉपर ऑक्सीक्लोराइड को दो ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब (उक्त सभी रोगों के लिए रसायन और पानी की मात्रा) से छिडक़ाव करें।
चने में लट नियंत्रण
चने की फसल में फलीछेदक लट नियंत्रण के लिए क्यूनालफॉस डेढ़ प्रतिशत चूर्ण 25 किलो की दर से प्रति हैक्टयर में भुरकाव करें।
लहसुन में डाउनी मिल्ड्यू
लहसुन में डाउनी मिल्ड्यू रोग और कुकडियाँ कीट प्रकोप के कारण फसल प्रभावित हो रही है। रोग-कीट नियंत्रण के लिए मेटालेक्सिल 35 प्रतिशत और एसिफेट 75 प्रतिशत 500-500 ग्राम का मिश्रण प्रति हैक्टयर के हिसाब से छिडक़ाव करें।
विक्षोभ का असर आज से
मौसम विभाग के प्रदेश में 17 फरवरी से एक कमजोर पश्चिमी विक्षोभ के एक्टिव होने की संभावना जताई है। जिसके प्रभाव से जयपुर और बीकानेर संभाग के कई क्षेत्रों में बादल छा सकते हैं और कहीं-कहीं हल्की बारिश होने की संभावना है।