भारत ने पलटा पासा, रूस में शुरू की खाद बनाने की तैयारी

नई दिल्ली 29-Apr-2026 12:31 PM

भारत ने पलटा पासा, रूस में शुरू की खाद बनाने की तैयारी

(सभी तस्वीरें- हलधर)

ईरान-इजरायल तनाव और मिडिल-ईस्ट में जारी अस्थिरता के बीच भारत ने अपनी खाद्य सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया है। भारत और रूस ने मिलकर रूस के समारा में एक विशाल फर्टिलाइजर प्लांट (जॉइंट वेंचर) लगाने की प्रक्रिया तेज कर दी है।

20 हजार करोड़ की लागत वाला यह प्रोजेक्ट अगले दो साल में बनकर तैयार हो जाएगा। रूस में लगने वाला 20 लाख टन क्षमता के यूरिया प्रोजेक्ट में इंडियन पोटाश लिमिटेड, RCF और NFL शामिल हैं। इस प्रोजेक्ट से भारत खाद ते आयात पर निर्भरता कम करना चाहता है। 

क्यों जरूरी है यह प्रोजेक्ट?

भारत वर्तमान में अपनी जरूरत का करीब 71% यूरिया मिडिल-ईस्ट के देशों से आयात करता है। लाल सागर और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण सप्लाई चैन बाधित होने का खतरा बना रहता है। रूस में लगने वाला यह प्लांट भारत के लिए यूरिया का एक स्थायी और सुरक्षित साधन बनेगा।

प्रोजेक्ट से जुड़ी बातें

इस साझा प्रोजेक्ट में कुल ₹20,000 करोड़ का निवेश होगा। इसमें से ₹10,000 करोड़ भारत की तीन सरकारी कंपनियां (IPL, RCF और NFL) और बाकी ₹10,000 करोड़ रूस की कंपनी 'यूरालकेम ग्रुप' लगाएगी। यूरिया बनाने के लिए नेचुरल गैस सबसे मुख्य कच्चा माल है। रूस में गैस के विशाल भंडार होने की वजह से वहां उत्पादन भारत के मुकाबले काफी सस्ता पड़ेगा।

इस प्रोजेक्ट की नींव दिसंबर 2025 में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की भारत यात्रा के दौरान रखी गई थी। वहीं, प्रोजेक्ट कंसल्टेंट PDIL ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है और हाल ही में एक भारतीय दल ने रूस का दौरा कर प्रगति का जायजा लिया है।

भारत में यूरिया का गणित (सालाना)

  • कुल खपत- 400 लाख मीट्रिक टन
  • घरेलू उत्पादन- 300 लाख मीट्रिक टन
  • कमी- 100 लाख मीट्रिक टन (जिसे आयात से पूरा किया जाता है)
  • खर्च- 2025 में यूरिया आयात पर करीब ₹20,000 करोड़ खर्च किए गए।

वैकल्पिक रास्तों पर भी काम जारी

तनावपूर्ण हालातों को देखते हुए सरकार ने 2026 के लिए 25 लाख टन यूरिया के आयात को पहले ही मंजूरी दे दी है। रिस्क कम करने के लिए अब सप्लाई 'स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज' के बजाय अल्जीरिया, नाइजीरिया और ओमान जैसे देशों के वैकल्पिक रास्तों से मंगवाई जा रही है।


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