प्राकृतिक खेती पर सरकार का फोकस, किसानों को मिलेगा लाभ
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि जैविक खेती और प्राकृतिक खेती अलग-अलग हैं। जैविक खेती भारत की परंपरागत खेती नहीं है। जबकि, प्राकृतिक से रिश्ता पुराना है। क्योंकि, इससे खेती में लागत कम होती है और मिट्टी की गुणवत्ता बनी रहती है। वे भाजपा किसान मोर्चा के द्वारा एसएमएस इंडोर स्टेडियम में प्राकृतिक खेती को लेकर प्रदेश स्तरीय कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि वे स्वयं खेती करते हैं, हल चलाते हैं और गाय का दूध निकालते हैं। उन्होंने दावा किया कि प्राकृतिक खेती से रासायनिक खेती की तुलना में बेहतर उत्पादन लिया जा सकता है। कार्यशाला को राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े, किसान मोर्चा अध्यक्ष कैलाश चौधरी, बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड सहित अन्य वक्ताओं ने सम्बोधित किया।
हम खेती नहीं, पाप कर रहे
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने कहा कि खेती सबसे ज्यादा मेहनत से कमाया गया धन है। लेकिन, अब हम खेती नहीं, पाप कर रहे हैं, भविष्य की पीढ़ी हमें माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि गुजरात में लाखों किसान प्राकृतिक खेती अपना चुके हैं । इससे यूरिया और रासायनिक खाद की खपत में कमी आई है।
आने वाली पीढ़ी याद रखेंगी
कार्यशाला में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने प्राकृतिक खेती के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि पहले गांवों में खेती पारंपरिक तरीके से होती थी। लेकिन, समय के साथ रासायनिक खाद का उपयोग बढ़ा। उन्होंने कहा कि हमें यह सोचना होगा कि हम अपनी आने वाली पीढ़ी को कैसी जमीन सौंपकर जाएंगे। हमारे पूर्वजों ने कठिनाइयों के बावजूद जमीन को बचाकर रखा। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्राकृतिक खेती अपनाने में शुरुआत के एक-दो साल परेशानी आ सकती है, लेकिन इसके बेहतर परिणाम मिलेंगे।