आसमानी आफ़त ने रबी का रंग उतारा, सरकार का फैसला दे पाएगा राहत
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। बेमौसमी बरसात और हल्की ओलावृष्टि ने किसान को राम याद दिला दिया है। बारिश से दाने और चारे की गुणवत्ता खराब होने का डर है। वहीं, बिक्री के समय आर्थिक नुकसान भी तय है। गौरतलब है कि पिछले दिनो मजबूत पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता से प्रदेश के अधिकांश संभागों में जोरदार बारिश दर्ज हुई है। इससे पश्चिमी राजस्थान में जीरा और ईसबगोल की फसल में बड़ा नुकसान हुआ है। जबकि, चना, गेहूं और जौ फसल में दाने की गुणवत्ता खराब हुई है। किसानो का कहना है कि बारिश और ओलो की मार के चलते पकी फसलों की बालियों से गेहूं और जौ के दाने खेतों में बिखर गए। खेतों में पानी भरने से कटी फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। किसानो का कहना है कि बारिश से जमीन में नमी आ गई है। इससे फसल कटाई का कार्य बाधित होकर रह गया है। हालांकि, बारिश से जायद फसलों को फायदा पहुंचेगा।
आपस में उलझी बालियां
बरसात से गेहूं की फसल आड़ी बिछ गई है। वहीं, कटी हुई सरसों में भी नुकसान हुआ है। किसानों ने बताया कि तेज हवा के कारण कई जगह गेंहू की बालियां आपस में उलझ गई। फसल आड़ी होने से गेंहू में करीब 30-50 फीसदी तक नुकसान संभव है। पानी में भीगने से जहां गेहूं के दानों का आकार छोटा रह जायेगा। वहीं, दाना काला भी पडऩे की भी संभावना है।
एमएसपी लाभ पर संशय
गेहूं उत्पादक किसानों को समर्थन मूल्य का लाभ अब मिलना मुश्किल है। क्योंकि, खेत-खलिहान में पड़ी हुई फसल भीग चुकी है। ऐसे में अंदर से दाना काला पडऩे का डर है। यदि सरकार ने गेहूं खरीद से जुड़े नियमों को शिथिल नहीं किया तो सरकार कांटो पर बारिश से भीगे गेहूं की खरीद नहीं होगी। वहीं, बाजार में भी किसानों को अच्छे दाम नहीं मिलेेंगे।
बढ़ेंगे चारे के दाम
कई जिलों में सरसों का कूटा और गेहूं का भूसा बरसात की भेंट चढ़ चुका है। ऐसे में किसानों और पशुपालकों के लिए पशुधन की उदरपूर्ति करना चुनौतिपूर्ण नजर आ रहा है। क्योंकि, पशु भीगा हुआ चारा खाना पसंद नहीं करते है। ऐसे में सूखे चारे की व्यवस्था किसानों और पशुपालकों पर भारी पड़ सकती है।
मुआवजे की मांग
प्राकृतिक आपदा से प्रभावित गांवो से मुआवजे की मांग उठने लगी है। हालांकि, सरकार ने ओलावृष्टि और बारिश से हुए फसल खराबे की गिरदावरी के लिए आदेश जारी कर दिए हैं। किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा क्लेम का लाभ मिल सकेगा। इस सुविधा का लाभ लेने के लिए बीमित किसानों को फसल खराबे की सूचना 72 घंटे के भीतर देना अनिवार्य होगा। सूचना कृषि रक्षक पोर्टल अथवा हेल्पलाइन नंबर 14447 पर दर्ज करवाई जा सकती है। कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ीलाल मीण ने विभागीय अधिकारियों को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे मौके पर पहुंचकर फसल खराबे का निरीक्षण करें और प्रभावित किसानों को त्वरित राहत दिलाने में सहयोग करें।