सरकारी आकड़ो ने खोली पोल MSP बढ़ा ....किसानो की आय नहीं
(सभी तस्वीरें- हलधर)देशभर में सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को किसानों के लिए बड़ी राहत बताकर प्रचार कर रही है, लेकिन मंडियों की तस्वीर कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। कई राज्यों में किसान अपनी फसल MSP से कम दाम पर बेचने को मजबूर हैं। सरकारी आंकड़ों और जमीनी हालात के बीच का यह अंतर अब खुलकर सामने आने लगा है।
मंडियों में MSP से नीचे बिक रही फसलें
गेहूं, चना, सरसों और दालों जैसी कई प्रमुख फसलों के बाजार भाव MSP से नीचे दर्ज किए गए हैं। किसानों का कहना है कि सरकारी खरीद केंद्र सीमित हैं और वहां भी लंबी कतारें, धीमी प्रक्रिया और तकनीकी दिक्कतें बनी हुई हैं। मजबूरी में किसान निजी व्यापारियों को कम दाम पर फसल बेच रहे हैं।
खरीद केंद्रों पर अव्यवस्था, भुगतान में देरी
किसानों ने आरोप लगाया कि कई जगहों पर तौल व्यवस्था कमजोर है और भुगतान समय पर नहीं हो रहा। कुछ किसानों का कहना है कि कई दिनों तक इंतजार करने के बाद भी उनकी उपज की खरीद नहीं हो पाई। इससे खेती की लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है।
सरकारी दावे बनाम किसानों की हकीकत
सरकार रिकॉर्ड खरीद और करोड़ों रुपये के भुगतान का दावा कर रही है, लेकिन किसान संगठनों का कहना है कि आंकड़ों में दिख रही सफलता जमीन पर नजर नहीं आ रही। उनका आरोप है कि MSP सिर्फ घोषणा बनकर रह गया है, क्योंकि बड़ी संख्या में किसानों तक इसका लाभ नहीं पहुंच रहा।
कानूनी MSP की मांग फिर तेज
किसान संगठनों ने एक बार फिर सभी फसलों पर कानूनी MSP गारंटी लागू करने की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जब तक सरकार MSP पर खरीद की कानूनी जिम्मेदारी तय नहीं करेगी, तब तक किसानों को उचित दाम मिलना मुश्किल रहेगा।
राजनीतिक बहस भी हुई तेज
MSP और बाजार भाव के अंतर को लेकर विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि किसानों के नाम पर केवल घोषणाएं की जा रही हैं, जबकि असली फायदा किसानों तक नहीं पहुंच पा रहा।