सर्दी का सितम बढ़ा, पाले से कांपे किसान और रबी फसलें
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। सर्दी का असर बढ़ता जा रहा है। सर्द हवा लोगों को शूल की भांति चूभ रही है। खेतों में काम करने वाले किसान का अलाव ही एक मात्र सहारा बना हुआ है। औसत न्यूनतम तापमान 8-10 डिग्री सेल्सियस तक आ पहुंंचा है। जिससे सूर्य देव की तपिश गायब होने लगी है। अल सुबह खेतों में बर्फ की परत जमने लगी है। इसी के साथ किसानों की रबी फसलों को पाला मार जाने की चिंता भी बढऩे लगी है।
गौरतलब है कि सीकर, चूरू, श्रीगंगानगर, सिरोही, अलवर, जयपुर, सीकर, झुंझुनू, बूंदी और दौसा सहित दूसरे जिलों में गिरते पारे ने रबी फसलों पर बर्फ की परत जमाना शुरू कर दिया है। जाड़े के बढ़ते सितम को देखकर किसान भी चिंतित हो उठे है। क्योंकि, गिरते पारे से रबी के साथ सब्जी फसलों में नुकसान होने का डर है। किसानों का कहना है कि सर्दी का आलम यही रहा तो फसल उत्पादन में नुकसान उठाना पड़ेगा। कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार पिछले एक सप्ताह से पड़ रही सर्दी और तापमान में निरंतर गिरावट का असर रबी की फसल पर पड़ा है। लेकिन, अभी कही से नुकसान के समाचार नहीं है। उधर, पारे की उठा-पटक के बीच प्रदेश में रबी फसलों की बुवाई एक करोड़ 19 हजार हैक्टयर क्षेत्र में हो चुकी है। गौरतलब है कि दिसम्बर माह मेें सर्दी के असर नहीं दिखाने से अधिकांश रबी फसलों पर विपरीत प्रभाव नजर आने लगा था।
दूध कम होने का डर
कृषि विज्ञान केन्द्र, भीलवाड़ा के डॉ. सीएम यादव ने सर्दी की वजह से पशुओं ने चारा-पानी कम कर दिया है। इस कारण दुधारू पशुओं का दूध कम होने लगा है। वहीं जुकाम का असर होने से पशुओं के नाक और मुंह से लार गिरने लगी है। विभाग के अनुसार जुकाम बढऩे से निमोनिया और बुखार आदि बीमारी भी हो सकती है।
फलदार पौधों का बचाव ऐसे
इस मौसम में 2 डिग्री से भी कम तापमान होने पर फलों के पौधों में नुकसान ज्यादा होने लगता है। ऐसे में छोटे और बड़े पौधों की दो तरह से सुरक्षा की जा सकती है। छोटे पौधों की सुरक्षा के लिए मल्चिंग करके यानि पराली, भूसा अथवा बाजरे की कड़बी को बिछाकर पौधों को गर्मी दी जाती है। वहीं थैटींग करके अजैविक माध्यम यानि पॉली अथवा मैट से पौधों को ढांपकर पाले से बचाया जाता है। इसके अलावा किन्नू, अमरूद, अनार, आंवला, मौसमी, माल्टा आदि के बड़े पौधों की सुरक्षा के लिए पतली नालियां बनाकर नियमित सिंचाई करें।

इसबगोल में तुलासिता की संभावना
कृषि विज्ञान केन्द्र बाड़मेर के प्रभारी डॉ. प्रदीप पगारिया ने किसानों को सलाह दी है कि बादल छाये रहने से जीरे की फसल में चरमा रोग फैल सकता है। रोग से बचाव हेतु कार्बेन्डाजिम 2 ग्राम प्रति लीटर पानी में मिलाकर फ सल पर छिड़काव करें। इसबगोल की फसल में तुलासिता रोग की संभावना है। नियंत्रण के लिए किसान मेंन्कोजेब 2 ग्राम प्रति लीटर पानी की दर से छिड़काव करें।
ठंड से गेहूं और चना को फायदा
मौसम साफ होते ही पारा गिरने से पाला पडऩे के आसार नहीं है। तेज ठंड से गेहूं व चना फसल को फायदा होगा। कृषि विशेषज्ञों ने बताया ठंड जितनी तेज पड़ेगी, गेहूं और चना फसल उत्पादन उतना अच्छा होगा। पाला पडऩे के आसार कम हैं। तापमान कम होने पर सब्जियों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है। आलू, बैगन और अरहर को नुकसान की आशंका है। ऐसे में सब्जी उत्पादक किसान को लगातार निगरानी की जरूरत है।
नए साल में बारिश
उधर, मौसम विभाग ने कहा है कि नए साल में मौसम का मिजाज बदल सकता है। संभवत: राजस्थान में मावठ की बारिश दर्ज हो सकती है। एक नया पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने से बारिश की संभावना बनी है।
जौ की 18 फीसदी ज्यादा बुवाई
अच्छी बारिश के बावजूद प्रदेश में अधिकांश रबी फसल लक्ष्य तक पहुंचने में सफल रही है। हालांकि, सरसो की बुवाई लक्ष्य से 4 फीसदी कम रही है। जबकि, जौ की बुवाई लक्ष्य से 18 तो चने की बुवाई लक्ष्य से 4 फीसदी ज्यादा हुई है। इस साल गेहूं की बुवाई लक्ष्य से 35.45 लाख हैक्टयर क्षेत्र में हो चुकी है। जो लक्ष्य 36 लाख से महज दो फीसदी कम है।

(बुवाई क्षेत्र लाख है. में)