मावठ बनी वरदान, रबी फसलों में बंपर पैदावार के संकेत
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। आधे राजस्थान में हल्की से तेज मावठ ने रबी फसलों के साथ-साथ किसानों के चेहरे का रंग खिला दिया है। हालांकि, मावठ के बाद से पूरा प्रदेश जाड़े की जकड़ में नजर आ रहा है। वहीं, कोहरे का असर भी आम जनजीवन पर देखनेे को मिल रहा है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है पिछले दिनों हुई मावठ की बरसात रबी फसलो में अमृत का काम करेगी। क्योंकि, इस बारिश से रबी फसलों को कोई नुकसान नहीं होगा। गौरतलब है कि इन दिनों सरसों और चना की फसल में चना और फलियां बन रहा है। कृषि वैज्ञानिकों की माने तो मौसमी गतिविधियों को रबी फसलों के अनुकूल है। तापमान में गिरावट और मौसम में नमी से फसल की बढ़वार अच्छी होगी। लेकिन, ठंड़ी हवा फसलों को थोड़ा बहुत नुकसान पहुंचा सकती है। गौरतलब है कि मौसम में आद्र्रता बढऩे से सरसों की फसल में तनागलन और सफेदरोली रोग प्रकोप की संभावनाओं को बल मिला है। मौसम की स्थिति को देखते हुए राष्ट्रीय राई-सरसों अनुसंधान निदेशालय के कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को तनागलन और सफेद रोली रोग नियंत्रण को लेकर सलाह जारी की है। वैज्ञानिकों ने मौसम खुलने के साथ ही नियंत्रण के उपाय अपनाने की बात वैज्ञानिकों ने किसानों से कही है। गौरतलब है कि यह दोनों रोग फसल के उत्पादन के साथ उत्पादकता को गिराने में मुख्य भूमिका निभाते है। निदेशालय के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. अशोक कुमार शर्मा ने बताया कि अब सरसों उत्पादक किसान फसल में सिंचाई नहीं करें। क्योंकि, सरसों को पकाव तक पहुुंचाने के लिए पर्याप्त बारिश हो चुकी है। भूमि में ज्यादा नमी से तना गलन रोग को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने बताया कि जहां हल्की मृदा है, उन क्षेत्रों के किसान जरूरत होने पर पकाव के समय फसल में सिंचाई कर सकते है। उधर, प्रदेश में रबी फसलों की बुवाई लक्ष्य तक पहुंच चुकी है।

जीरे में छाछ्या
डॉ. बीएल मीणा ने बताया कि तेज हवा से जीरे की फसल में चरमा (झुलसा- ब्लाईट) और छाछ्या रोग तेजी से फैलने की संभावना हैं। झुलसा- ब्लाईट रोग नियंत्रण के लिए किसान मैन्कोजेब 0.2 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। छाछ्या रोग नियंत्रण के लिए प्रति हैक्टयर 35 किलोग्राम गंधक चूर्ण का भुरकाव अथवा घुलनशील गंधक 0.2 ' घोल (2 ग्राम प्रति लीटर पानी) का छिडक़ाव करें।
पाला पडऩे पर यह करें उपाय
पाले से बचाव के लिए सबसे पहले हल्की सिंचाई करनी चाहिए। रात दस बजे के बाद खेत के उत्तर और पश्चिम दिशा में मेड़ों पर धुआं करके पाले के प्रभाव को कम किया जा सकता है। इसके अलावा सल्फर डस्ट 8 से 10 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से खेत में भुरकाव, थायो यूरिया 15 ग्राम प्रति पंप (पन्द्रह लीटर पानी) अथवा 150 ग्राम का डेढ सौ लीटर पानी के साथ छिडक़ाव करके भी पाले के प्रभाव को कम किया जा सकता है। यदि फसल पाले की चपेट में आ चुकी है तो तुरंत 25 से 30 ग्राम ग्लूकोज प्रति पंप (पन्द्रह लीटर पानी) की दर से प्रभावित फसल पर छिडक़ाव किया जा सकता है।
सुन्न करने वाली सर्दी का कहर
राजस्थान समेत उत्तर भारत के कई राज्यों में सुन्न करने वाली सर्दी ने कहर ढाया हुआ है। इससे बचने के लिए लोगों को घरों में कैद होना पड़ रहा है। हालांकि, दोपहर के वक्त हल्की धूप राहत तो जरूर देती है। लेकिन, कड़ाके की ठंड में फिर भी कंपकंपी छूटती रहती है। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में अगले दो दिन कई इलाकों में मावठ होने की संभावना है। वहीं दो-तीन दिन बाद बादल छंटने और आसमान साफ होने पर पारा गिरने और कडाके की सर्दी पडने की आशंका है।
रबी बुवाई लक्ष्य तक
बेहत्तर मानसून के कारण इस साल रबी फसलो की बुवाई लक्ष्य तक पहुंच चुकी है। 1 करोड़ 20 लाख हैक्टयर की तुलना में प्रदेश में फसल बुवाई शत प्रतिशत दर्ज हुई है। गौतरलब है कि इस साल जौ और चने की रिकॉर्ड बुवाई प्रदेश में हुई है।
फसल बुवाई क्षेत्र फसल बुवाई क्षेत्र

(बुवाई क्षेत्र लाख है. में)