प्याज किसानों की आंखों में आंसू ,लगत का भी टोटा
(सभी तस्वीरें- हलधर)देश में प्याज किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। कभी विदेशी बाजारों में भारतीय प्याज की मजबूत पकड़ थी, लेकिन अब निर्यात में आई भारी गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। आंकड़ों के मुताबिक, प्याज निर्यात का हिस्सा 46% से घटकर सिर्फ 6% तक सिमट गया है। किसानों का आरोप है कि सरकार की नीतियों और निर्यात प्रतिबंधों ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। निर्यात पर बार-बार लगने वाली रोक के कारण घरेलू मंडियों में कीमतें गिर गई हैं। कई राज्यों में किसान लागत से भी कम दाम पर प्याज बेचने को मजबूर हैं। किसानों का कहना है कि जिस फसल से बेहतर कमाई की उम्मीद थी, वही अब घाटे का सौदा बन गई है।
भंडारण और परिवहन लागत ने बढ़ाई मुश्किल
प्याज को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए भंडारण की जरूरत होती है, लेकिन छोटे किसानों के पास पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। ऊपर से परिवहन और मजदूरी खर्च बढ़ने से किसानों की आर्थिक हालत और खराब हो रही है। कई किसानों ने मजबूरी में प्याज सड़क पर फेंकने तक की चेतावनी दी है।
किसानों ने लगाया ‘सौतेला व्यवहार’ का आरोप
किसान संगठनों का कहना है कि सरकार उपभोक्ताओं को राहत देने के नाम पर निर्यात रोक देती है, लेकिन किसानों के नुकसान की भरपाई नहीं करती। उनका आरोप है कि सरकार ने प्याज उत्पादकों के साथ सौतेला व्यवहार किया है। किसानों का कहना है कि जब उत्पादन अच्छा होता है, तब उन्हें सही दाम नहीं मिलता और नुकसान का बोझ सिर्फ किसानों पर डाल दिया जाता है।
सरकार पर बढ़ा दबाव
प्याज उत्पादक राज्यों से सरकार पर निर्यात नीति में बदलाव का दबाव बढ़ रहा है। किसान संगठनों ने मांग की है कि निर्यात पर स्थायी और स्पष्ट नीति बनाई जाए ताकि किसानों को हर सीजन में अनिश्चितता का सामना न करना पड़े।