कृषि विभाग का बड़ा ऐलान, बढ़ेगा खरीफ फसलों का रकबा
(सभी तस्वीरें- हलधर)जयपुर। प्रदेश में मानसून की आहट को देखते हुए किसानों ने खरीफ फसल बुवाई की तैयारियां शुरू कर दी है। वहीं, कृषि आयुक्तालय ने भी खरीफ फसल बुवाई के लक्ष्य जारी कर दिए है। इस बार 165 लाख हैक्टयर क्षेत्र में खरीफ फसलो की बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। जो पिछले साल से ज्यादा है। गौरतलब है कि यह लक्ष्य पिछले साल हुई कुल वास्तविक बुवाई से काफी ज्यादा है। पिछले वर्ष 158 लाख हैक्टयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हुई थी। इस वर्ष कृषि विभाग ने कम मानसून की स्थिति को देखते हुए मोटा अनाज और दलहनी फसलों पर जोर दिया है। बता दें कि इस साल पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय रहने से प्रदेश के कई जिलो में अच्छी बारिश देखने को मिली है। इससे खेतों में पानी चमक उठा है। वहीं, बीटी कपास की अगेती बुवाई करने वाले किसानों को बारिश से फायदा पहुंचा है। गौरतलब है कि कृषि विभाग ने धान, मूंगफली, ग्वार, मोठ जैसी फसल का लक्ष्य बढ़ाकर घोषित किया है।
अंकुरण में आयेगी समस्या
प्रदेश के कई जिलों में हुई बारिश से मौसम में ठंडक़ जरूर घुल गई है। लेकिन, गर्मी का असर बराबर बना हुआ है। ऐसे में बीज की बुवाई करना अभी खतरे से खाली नहीं है। क्योंकि, ग्वार और मंूग के जैसे खरीफ की दूसरी फसलों का बीज जमीन में ही दम तोड़ सकता है।
घट रहा है दलहन-तिलहन का रकबा
पिछले पांच सालों की औसत बुवाई पर गौर करें तो प्रदेश में दलहन और तिलहनी फसलों का रकबा घटता नजर आ रहा है। हालांकि, सालाना लक्ष्य में कोई ज्यादा फर्र्क नहीं है। लेकिन, औसत लक्ष्य में बुवाई का क्षेत्रफल कम हो रहा है। जबकि, फसलों का उत्पादन और उत्पादकता बढ़ रही है। ऐसे में समझा जा सकता है कि सरकार के द्वारा किसानों को उन्नत किस्मों के नि:शुल्क प्रमाणित बीज उपलब्ध कराने से उत्पादन और उत्पादकता में बढौत्तरी दर्ज हो रही है।
यह रखा लक्ष्य
इस साल धान की बुवाई के लिए 3 लाख हैक्टयर का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, ज्वार की बुवाई 6 लाख हैक्टयर, बाजरे की 40.50 लाख हैक्टयर, मक्का की 9.70 लाख हैक्टयर में होने का अनुमान है। नजर डाले दलहन पर तो मूंग की बुवाई के लिए 26.50 लाख हैक्टयर का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, मोठ की बुवाई के लिए 10 लाख हैक्टयर, उड़द के लिए 3.57 लाख हैक्टयर, चौला के लिए 65 हजार हैक्टयर, अरहर के लिए 5 हजार हैक्टयर का लक्ष्य तय किया गया है। तिलहन में तिल की बुवाई के लिए 2.50 लाख हैक्टयर, मंूगफली के लिए 11.50 लाख हैक्टयर, सोयाबीन के लिए 11 लाख हैक्टयर, अरंड़ी के लिए 2.50 लाख हैक्टयर और वाणिज्यिक फसल कपास के लिए 7.20 लाख हैक्टयर और ग्वार के लिए 25.50 लाख हैक्टयर का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।