बढ़ती गर्मी का खेती पर हमला, पशुधन और मछली पालन पर मंडराया गहरा संकट

नई दिल्ली 23-Apr-2026 06:47 PM

बढ़ती गर्मी का खेती पर हमला, पशुधन और मछली पालन पर मंडराया गहरा संकट

(सभी तस्वीरें- हलधर)

संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन और विश्व मौसम विभाग संगठन की एक रिपोर्ट ने चेताया गया है कि बढ़ती गर्मी खेती से जुड़े लोगों के लिए गंभीर संकट बनती जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादा गर्मी की वजह से हर साल दुनियाभर में करीब 50 करोड़ काम के घंटे बर्बाद जा रहे हैं और जैसे-जैसे यह तापमान बढ़ेगा वैसे ही यह नुकसान और ज्यादा हो जाएगा।

खेती पर असर कैसे

WMO की प्रमुख सेलेस्टे साउलो ने कहा कि, ज्यादा गर्मी खेती का करने के हालात को बदल रही है और पहले से मौजूद कमजोरियों को और बढ़ा रही है। गर्मी बढ़ने से खेती में काम करने वाले लोगों की परेशानी बढ़ेगी और खेती में लगने वाला श्रम घटेगा, जिससे उत्पादन पर बुरा नजर आ सकता है।

फसलें

30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर तापमान होने पर ज्यादातर फसलों की पैदावर कम होने लगती है। इससे पौधे कमजोर हो जाते हैं और अनाज कम पैदा होता है। जिससे आने वाले समय में उत्पादन खतरे में पड़ सकता है।

पशुधन

गाय, मुर्गियों और सूअर पर गर्मी का बुरा असर पड़ सकता है। गर्मी के असर से उनकी ग्रोथ रूक जाती है, दूध कम हो जाता है और कभी-कभी उनकी जान भी जा सकती है।

मछलियां

समुद्र का पानी गर्म होने से ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जा रही है, जिससे मछलियां परेशान हो रही हैं। साल 2024 में दुनिया  के 91% समुद्रों में समुद्री लू देखी गई। जिस वजह से मछलियों की मरने की दर बढ़ गई और मछुआरों की कमाई पर बुरा असर पड़ रहा है। 

जंगल

बढ़ती गर्मी से जंगलों में आग लगने का खतरा बढ़ने लगता है और पेड़ों की बढ़त भी रुकने लगती है। इससे पर्यावरण पर खतरा और प्रदूषण का जोखिम बढ़ जाएगा।

इंसानों पर भी असर

रिपोर्ट में बताया गया है कि दक्षिण एशिया, अफ्रीक और लैटिन अमेरिका के कई इलाकों में साल में 250 दिन तक काम करना बहुत खतरनाक हो सकता है। इससे खेतों में काम करने वाले लाखों मजदूरों की सेहत और जान को खतरा है और खाने की चीजों का उत्पादन भी घटेगा।


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